पंजवारा/बांका/अंग भारत। बिहार के बांका जिले में शराबबंदी कानून को ठेंगा दिखाने वाले तस्करों के खिलाफ पुलिस ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। पंजवारा थाना क्षेत्र स्थित उत्पाद विभाग चेकपोस्ट पर शुक्रवार की शाम एक ई-रिक्शा से भारी मात्रा में अवैध शराब बरामद की गई है। पुलिस ने गुप्त केबिन से कुल 381 बोतल शराब जब्त की, जिसका कुल वजन लगभग 79.270 लीटर मापा गया है। इस अवैध धंधे में शामिल एक नाबालिग चालक को हिरासत में लिया गया है, जो पड़ोसी राज्य झारखंड के गोड्डा जिले का निवासी है। थानाध्यक्ष चंदन कुमार ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी को विधि विरुद्ध बालक के रूप में निरुद्ध कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
शराब की बरामदगी
चेकपोस्ट पर तैनात पुलिसकर्मियों को नियमित जांच के दौरान बड़ी सफलता मिली। तस्करों ने पुलिस की नजरों से बचने के लिए ई-रिक्शा के निचले हिस्से में एक विशेष लोहे का बॉक्स (सीक्रेट चैंबर) बना रखा था। सामान्य तौर पर देखने से इस बॉक्स का पता लगाना बेहद मुश्किल था। तलाशी के दौरान जब पुलिस ने ई-रिक्शा के ढांचे को बारीकी से खंगाला, तब जाकर इस गुप्त केबिन का खुलासा हुआ।
बरामद की गई अवैध शराब की पूरी सूची इस प्रकार है:
- झारखंड निर्मित देशी शराब: 320 बोतल
- विदेशी शराब: 61 बोतल
- कुल बरामद बोतलें: 381 बोतल
- शराब की कुल मात्रा: लगभग 79.270 लीटर
यह पूरी खेप झारखंड से बिहार के भीतर तस्करी कर लाई जा रही थी ताकि स्थानीय बाजारों में इसे ऊंचे दामों पर बेचा जा सके। चेकपोस्ट पर मुस्तैद जवानों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए इस बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया।
नाबालिगों का इस्तेमाल
इस पूरे मामले ने शराब तस्करी के एक बेहद चिंताजनक पहलू को उजागर किया है। शराब माफिया अब खुद को पुलिस की पकड़ से बचाने के लिए नाबालिग बच्चों को ढाल बना रहे हैं। इस घटना में पकड़ा गया ई-रिक्शा चालक नाबालिग है और वह झारखंड के गोड्डा जिले का रहने वाला है।
“तस्कर अक्सर गरीब परिवारों के नाबालिग बच्चों को चंद रुपयों का लालच देकर इस दलदल में धकेल देते हैं। पुलिस से बचने के लिए यह उनकी एक नई चाल है।” – स्थानीय सूत्र
तस्करों द्वारा नाबालिगों का उपयोग करने के पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- कम संदेह: आमतौर पर पुलिस ई-रिक्शा चलाने वाले बच्चों पर ज्यादा शक नहीं करती, जिससे वे आसानी से सीमा पार कर जाते हैं।
- कानूनी ढील: किशोर न्याय कानून के तहत नाबालिगों को कड़ी सजा के बजाय बाल सुधार गृह भेजा जाता है, जिसका फायदा तस्कर उठाते हैं।
- कम खर्च: पेशेवर तस्करों की तुलना में बच्चों को बेहद कम पैसों में इस जोखिम भरे काम के लिए तैयार कर लिया जाता है।
पुलिस की कार्रवाई
पंजवारा थाना पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए शराब और ई-रिक्शा दोनों को जब्त कर लिया है। थानाध्यक्ष चंदन कुमार ने मीडिया को बताया कि पकड़े गए नाबालिग को कानून के प्रावधानों के तहत निरुद्ध किया गया है। पुलिस अब इस पूरे सिंडिकेट के असली नेटवर्क को खंगालने में जुट गई है।
पुलिस जांच में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है:
- झारखंड के गोड्डा में वह कौन सा मुख्य आपूर्तिकर्ता है जिसने शराब लोड करवाई थी?
- बिहार के बांका या अन्य किसी इलाके में यह खेप किस स्थानीय डीलर को सौंपी जानी थी?
- ई-रिक्शा में सीक्रेट बॉक्स बनाने वाले गैराज और उसके मालिकों की पहचान करना।
सीमा पर चौकसी
पंजवारा चेकपोस्ट बिहार और झारखंड की सीमा पर स्थित एक बेहद संवेदनशील और व्यस्त मार्ग है। चूंकि झारखंड में शराब पर कोई पाबंदी नहीं है, इसलिए वहां से बिहार के सीमावर्ती जिलों में शराब लाना तस्करों के लिए मुनाफे का सौदा बन चुका है। बिहार में पूर्ण शराबबंदी को लागू रखने के लिए इस बॉर्डर पर चौबीसों घंटे कड़ी निगरानी रखी जाती है।
तस्कर लगातार अपने तरीके बदलते रहते हैं। कभी एम्बुलेंस, कभी डाक पार्सल गाड़ियां, तो कभी दूध के वाहनों का उपयोग शराब छिपाने के लिए किया जाता है। हाल के दिनों में ई-रिक्शा जैसी छोटी गाड़ियों का उपयोग बढ़ा है क्योंकि ये स्थानीय स्तर पर आसानी से घुल-मिल जाती हैं।
सख्त निगरानी आवश्यक
इस घटना से साफ है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में केवल पारंपरिक वाहनों की जांच ही काफी नहीं है। पुलिस को अब हर छोटी-बड़ी सवारी गाड़ी और संदिग्ध दिखने वाले वाहनों की गहराई से जांच करनी होगी। पंजवारा पुलिस ने सीमा पर सुरक्षा और गश्त को और अधिक कड़ा कर दिया है ताकि भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सके। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अपने आसपास की किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें ताकि नशामुक्त समाज का निर्माण किया जा सके।








