सहरसा,अंग भारत। सहरसा में आयोजित समृद्धि यात्रा के दौरान अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार द्वारा बनाई गई रेत की विशाल कलाकृति लोगों और अतिथियों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बन गई। शाहपुर स्थित निगम पार्क परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के स्वागत में कोशी नदी की लगभग 100 टन बालू का उपयोग करके करीब 20 फीट ऊंची भव्य सैंड आर्ट तैयार की गई थी। ‘समृद्ध बिहार’ की थीम पर आधारित इस कलाकृति को देखकर न केवल मुख्यमंत्री बल्कि वहां पहुंचे हजारों लोग दंग रह गए। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण करते हुए इस कलाकृति के पास कुछ पल बिताए, रेत पर उकेरी गई अपनी जीवंत छवि को निहारा और कलाकार मधुरेंद्र कुमार की पीठ थपथपाकर उन्हें धन्यवाद दिया।
सैंड आर्ट की विशेषताएं
यह कोई सामान्य रेत की मूर्ति नहीं थी, बल्कि इसे बनाने के पीछे कड़ी मेहनत और गहरी कलात्मक सोच थी। सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार ने इस भव्य कलाकृति को आकार देने के लिए लगातार 15 घंटे तक बिना थके काम किया। कोशी क्षेत्र की अपनी एक अलग भौगोलिक पहचान है, और कोशी नदी की महीन बालू से इतनी विशाल और सजीव आकृति बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण काम माना जाता है। लगभग 100 टन कोशी की पीली बालू को पानी और विशेष तकनीकों के सहारे जमाकर 20 फीट ऊंची मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आकृति को उकेरा गया। समृद्धि यात्रा का मुख्य संदेश बिहार की प्रगति को दिखाना था, और इस रेत कला ने उस संदेश को सीधे धरातल पर जीवंत कर दिया।
वीआईपी मेहमानों का जमावड़ा
इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी केवल आम लोग ही नहीं बने, बल्कि बिहार सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी और मंत्री भी वहां मौजूद थे। जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कलाकार की कलात्मक समझ की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि कोशी की बालू का ऐसा सकारात्मक और सुंदर उपयोग देखना वास्तव में एक सुखद अनुभव है। वहीं बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने भी सुरक्षा व्यवस्था के जायजे के साथ-साथ इस कलाकृति को काफी करीब से देखा और मधुरेंद्र की तारीफ की। स्थानीय प्रशासन के मुखिया, सहरसा के डीएम दीपेश कुमार और एसपी हिमांशु ने भी इस कलाकृति को सहरसा की सांस्कृतिक गरिमा के लिए एक बड़ा गौरव बताया और कलाकार का उत्साहवर्धन किया।
कलाकृति के मुख्य आंकड़े
इस अद्भुत सैंड आर्ट के निर्माण और इसकी भव्यता से जुड़े कुछ बेहद महत्वपूर्ण आंकड़े नीचे दी गई तालिका में देख सकते हैं:
| विवरण | कलाकृति से जुड़े मुख्य आंकड़े |
|---|---|
| मुख्य सैंड आर्टिस्ट | मधुरेंद्र कुमार (अंतरराष्ट्रीय कलाकार) |
| उपयोग की गई रेत | लगभग 100 टन (कोशी नदी की बालू) |
| कलाकृति की ऊंचाई | करीब 20 फीट |
| निर्माण में लगा समय | लगातार 15 घंटे की कड़ी मेहनत |
| मुख्य थीम | समृद्ध बिहार |
| आयोजन स्थल | शाहपुर स्थित निगम पार्क परिसर, सहरसा |
कोशी बालू का जादू
कोशी नदी को अक्सर बाढ़ और तबाही से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार ने उसी कोशी की मिट्टी और बालू को अपनी रचनात्मकता का माध्यम बनाकर एक नया दृष्टिकोण पेश किया है। कोशी की बालू की अपनी एक खास बनावट होती है। इसमें सिल्ट और मिट्टी की मात्रा अधिक होती है, जिससे बड़ी आकृतियां बनाना और उन्हें स्थिर रखना आसान नहीं होता। तेज हवाओं और धूप के बीच रेत की मूर्ति को ढहने से बचाए रखना एक बेहद मुश्किल काम है। मधुरेंद्र ने अपनी सुई जैसी बारीक कलात्मक औजारों और तकनीकों का उपयोग करके मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के चेहरे के हाव-भाव को रेत पर बिल्कुल सटीक तरीके से उतारा, जिसे देखकर हर कोई अचंभित था।
“कोशी की मिट्टी और बालू में इस क्षेत्र की संस्कृति और संघर्ष की कहानी छिपी है। जब इस बालू से मुख्यमंत्री जी की आकृति बनी और उन्होंने खुद इसे देखकर सराहना की, तो मेरी 15 घंटे की पूरी थकान दूर हो गई।”
– मधुरेंद्र कुमार, सैंड आर्टिस्ट
लोगों में भारी उत्साह
शाहपुर के निगम पार्क में जैसे ही यह खबर फैली कि मुख्यमंत्री के आगमन पर कोशी की बालू से इतनी बड़ी कलाकृति बनी है, वैसे ही वहां स्थानीय लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। लोग इस भव्य कलाकृति के साथ सेल्फी लेते और इसकी बारीकियों को समझते नजर आए। कोशी क्षेत्र के युवाओं के लिए यह कलाकृति एक बड़ी प्रेरणा बनकर सामने आई है। मधुरेंद्र कुमार ने अपनी कला के जरिए यह साबित कर दिया कि अगर हुनर हो तो स्थानीय और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके भी वैश्विक स्तर की कला का प्रदर्शन किया जा सकता है। समृद्धि यात्रा के इस पड़ाव ने सहरसा के लोगों को विकास योजनाओं के साथ-साथ कला और संस्कृति का एक अनूठा संगम भी देखने का मौका दिया।
कला और सरकारी प्रोत्साहन
बिहार में सैंड आर्ट यानी रेत कला को लेकर हाल के वर्षों में लोगों की दिलचस्पी काफी तेजी से बढ़ी है। मधुरेंद्र कुमार जैसे प्रतिभावान कलाकारों ने अपनी दिन-रात की मेहनत से इस कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्थापित किया है। समृद्धि यात्रा जैसे बड़े सरकारी कार्यक्रमों में ऐसी कलाकृतियों को मुख्य स्थान मिलने से न केवल कलाकारों का मनोबल मजबूत होता है, बल्कि समाज में कला के प्रति सम्मान भी बढ़ता है। प्रशासनिक स्तर पर डीएम दीपेश कुमार और एसपी हिमांशु की मौजूदगी में मिली यह सराहना स्थानीय स्तर पर अन्य नवोदित कलाकारों के लिए भी नए रास्ते खोलने का काम करेगी।








