फुल्लीडुमर/बांका/अंगभारत। गर्मी की शुरुआत के साथ ही बांका जिले के फुल्लीडुमर प्रखंड की खेसर पंचायत के वार्ड संख्या-8 स्थित वनवर्षा गांव के पुझार टोला में भीषण जलसंकट उत्पन्न हो गया है। यहां पीएचईडी (PHED) विभाग द्वारा छह साल पहले लाखों की लागत से स्थापित जलमीनार पिछले डेढ़ साल से पूरी तरह ठप पड़ी है, जिससे 60 महादलित परिवारों को पीने के पानी के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। शनिवार को आक्रोशित ग्रामीणों ने जलमीनार के सामने प्रदर्शन करते हुए विभागीय अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की लापरवाही के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।
पानी के लिए संघर्ष
पुझार टोला के निवासियों के लिए पानी की समस्या अब दैनिक संघर्ष बन चुकी है। डेढ़ साल से बंद पड़े इस जलमीनार के कारण गांव की महिलाएं और बच्चे मीलों दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं। महादलित टोला में रहने वाले इन परिवारों की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे निजी चापाकल लगवा सकें।
- 60 परिवार लंबे समय से जलापूर्ति से वंचित हैं।
- महिलाएं और बच्चियों को घरेलू काम के लिए काफी दूर जाना पड़ता है।
- गर्मी का मौसम आने के साथ ही स्थिति और भी भयावह हो गई है।
जलमीनार की बदहाली
स्थानीय निवासी त्रिवेणी पुझार, अजय पुझार, नागे पुझार, शुभ पुझार, हीरा पुझार और राजेंद्र पुझार ने बताया कि यह जलमीनार शुरू से ही तकनीकी खामियों का शिकार रही है। पीएचईडी विभाग ने जिस उद्देश्य से इसका निर्माण किया था, वह अब पूरी तरह विफल हो चुका है। जलमीनार अब केवल एक ढांचा बनकर रह गई है, जिसमें न तो मोटर चल रही है और न ही पाइपलाइन में पानी आता है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि विभाग के पास बार-बार गुहार लगाने के बाद भी सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं, कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
प्रशासन से अपेक्षा
प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही जलापूर्ति बहाल नहीं की जाती है, तो वे सड़क पर उतरकर बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। ग्रामीणों की मुख्य मांगे निम्नलिखित हैं:
| मांग | विवरण |
|---|---|
| तकनीकी मरम्मत | मोटर और पाइपलाइन की तत्काल जांच हो। |
| जवाबदेही | लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो। |
| वैकल्पिक व्यवस्था | जब तक मीनार ठीक न हो, टैंकर भेजे जाएं। |
जनप्रतिनिधियों की उदासीनता
गांव के लोगों का कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन संकट के समय कोई भी नेता या अधिकारी झांकने तक नहीं आता। त्रिवेणी पुझार के अनुसार, स्थानीय जनप्रतिनिधियों को समस्या की पूरी जानकारी है, फिर भी महादलित टोले की इस समस्या को नजरअंदाज किया जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर इस उदासीनता ने आम नागरिकों का भरोसा व्यवस्था से कम कर दिया है।
समाधान की दिशा
इस संकट का एकमात्र समाधान पीएचईडी विभाग द्वारा त्वरित तकनीकी ऑडिट और मरम्मत है। जलमीनार की पाइपलाइन में फंसी खामियों को दूर करना कोई बहुत बड़ा काम नहीं है, बशर्ते विभाग इसे प्राथमिकता दे। गर्मी का भीषण प्रकोप शुरू हो चुका है, ऐसे में प्रशासन को मानवीय आधार पर बिना किसी देरी के जलापूर्ति बहाल करनी चाहिए। ग्रामीणों की यह मांग अब केवल पानी की नहीं, बल्कि अपने मौलिक अधिकारों के लिए लड़ने की बन गई है। यदि जिला प्रशासन समय रहते हस्तक्षेप नहीं करता है, तो पुझार टोला के लोग अपने भविष्य के लिए कड़े कदम उठाने की तैयारी कर रहे हैं।








