पूर्वी चंपारण,अंग भारत। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के चकिया थाना क्षेत्र स्थित रामडीहा गांव में सोमवार की देर रात पुलिस और अपराधियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में दो खूंखार अपराधियों को मार गिराया गया है। इस दुखद ऑपरेशन के दौरान पुलिस विभाग ने अपने एक जांबाज जवान, श्रीराम यादव को खो दिया, जो कर्तव्य का पालन करते हुए शहीद हो गए। यह मुठभेड़ उस समय हुई जब स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने अपराधियों को पकड़ने के लिए रामडीहा इलाके में घेराबंदी की थी। जवाबी कार्रवाई में कुंदन ठाकुर और प्रियांशु दुबे नामक अपराधी ढेर हो गए, जबकि उनके अन्य साथी अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे।
मुठभेड़ की पृष्ठभूमि
यह मुठभेड़ अचानक नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित साजिश और पुलिस की त्वरित कार्रवाई थी। घटना से दो दिन पहले, इन दोनों अपराधियों ने चकिया थाना के अपर थानाध्यक्ष गौरव कुमार को एक नेपाली नंबर से फोन करके जान से मारने की धमकी दी थी। गौरव कुमार को दी गई इस धमकी को पुलिस प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया। इसके बाद तकनीकी शाखा ने सक्रिय होकर उस संदिग्ध नंबर को ट्रेस करना शुरू किया। कॉल ट्रेसिंग के जरिए अपराधियों का सटीक लोकेशन रामडीहा गांव के पास का मिला, जिसके आधार पर एसटीएफ और जिला पुलिस की एक संयुक्त टीम ने जाल बिछाया।
ऑपरेशन और मुठभेड़
जब पुलिस टीम रामडीहा गांव पहुंची, तो अपराधियों को अपने घिरने का एहसास हो गया। खुद को फंसता देख कुंदन ठाकुर और प्रियांशु दुबे ने पुलिस बल पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने भी मोर्चा संभाला और जवाबी कार्रवाई शुरू की।
- मुठभेड़ स्थल: रामडीहा गांव, चकिया थाना क्षेत्र।
- शहीद जवान: श्रीराम यादव (एसटीएफ/पुलिस टीम के सदस्य)।
- मारे गए अपराधी: कुंदन ठाकुर और प्रियांशु दुबे।
- अपराधियों की पृष्ठभूमि: दोनों पर आर्म्स एक्ट सहित कई गंभीर आपराधिक मामले पहले से दर्ज थे।
शहीद जवान को श्रद्धांजलि
रामडीहा की इस घटना ने पूरे बिहार पुलिस महकमे को झकझोर दिया है। जवान श्रीराम यादव की शहादत ने न केवल उनके परिवार को अपूरणीय क्षति पहुंचाई है, बल्कि पुलिस विभाग के हर सदस्य के मन में शोक की लहर पैदा कर दी है। एक पुलिस अधिकारी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, श्रीराम यादव ने बहादुरी का परिचय देते हुए अपराधियों के खिलाफ मोर्चा लिया था। उनकी शहादत की खबर मिलने के बाद स्थानीय पुलिस मुख्यालय में गम का माहौल है और साथी जवान उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
सर्च ऑपरेशन जारी
गोलीबारी थमने के बाद, क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है। मौके पर एसपी (पुलिस अधीक्षक) और डीआईजी (पुलिस उपमहानिरीक्षक) सहित कई आला अधिकारी पहुंचे और घटनास्थल का जायजा लिया। पूरे रामडीहा और आसपास के क्षेत्रों में व्यापक घेराबंदी की गई है। पुलिस की विशेष टीम उन फरार साथियों की तलाश कर रही है जो अंधेरे का लाभ उठाकर भागने में कामयाब रहे। पुलिस का दावा है कि जल्द ही फरार आरोपियों की पहचान कर उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
कानून-व्यवस्था का संदेश
बिहार में अपराधियों के हौसले पस्त करने के लिए पुलिस द्वारा लगातार दबिश दी जा रही है। विशेषकर चकिया जैसे क्षेत्रों में, जहां आपराधिक गतिविधियों की सूचनाएं मिलती रहती हैं, पुलिस अब आक्रामक मोड में काम कर रही है। हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अपराधी अब पुलिस अधिकारियों को भी सीधे धमकी देने का दुस्साहस करने लगे हैं। अपर थानाध्यक्ष गौरव कुमार को मिली धमकी और उसके बाद हुई इस मुठभेड़ ने स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून का पालन करने वाली एजेंसियां किसी भी कीमत पर अपराधियों को बख्शने के मूड में नहीं हैं।
“पुलिस बल पर हमला करना सीधे तौर पर राज्य की कानून व्यवस्था को चुनौती देना है। हम इस ऑपरेशन के दौरान शहीद हुए अपने साथी श्रीराम यादव के बलिदान को बेकार नहीं जाने देंगे और फरार अपराधियों को जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा।” – एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का बयान।
अभी तक इस मामले में पुलिस प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक रिपोर्ट या प्रेस विज्ञप्ति जारी नहीं की गई है, क्योंकि जांच प्रक्रिया चल रही है और सर्च ऑपरेशन प्राथमिकता पर है। इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है और आम जनता से सतर्क रहने की अपील की गई है।








