नई दिल्ली, अंग भारत। एफआईएच महिला हॉकी विश्व कप 2026 के लिए क्वालिफाई करने के बाद भारतीय महिला हॉकी टीम ने अब अपनी पूरी निगाहें पूल डी की कठिन चुनौतियों पर टिका दी हैं। आगामी विश्व कप में भारत का सामना इंग्लैंड, चीन और दक्षिण अफ्रीका जैसी मजबूत टीमों से होगा। कोच सजोर्ड मारिजने का मानना है कि ड्रॉ की जटिलता से ज्यादा महत्वपूर्ण टीम का मैदान पर अपना स्वाभाविक खेल दिखाना है। अगस्त में होने वाले इस टूर्नामेंट के लिए टीम अपनी रणनीतियों को धार देने में जुटी है, ताकि हैदराबाद क्वालिफायर में मिली सीख को बड़े मंच पर भुनाया जा सके।
पूल डी का समीकरण
विश्व कप के पूल डी में टीमों की रैंकिंग और उनकी खेल शैली के आधार पर भारत के लिए राह आसान नहीं होगी। ग्रुप में शामिल टीमों का विवरण इस प्रकार है:
- चीन: विश्व रैंकिंग में चौथे स्थान पर मौजूद चीन इस पूल की सबसे ऊंची रैंक वाली टीम है। उनकी रक्षात्मक तकनीक और गति भारतीय खिलाड़ियों के लिए कड़ी परीक्षा होगी।
- इंग्लैंड: दुनिया में छठे नंबर की टीम, जिसने हाल ही में हैदराबाद, तेलंगाना में संपन्न हुए एफआईएच हॉकी विश्व कप 2026 क्वालिफायर्स के फाइनल में भारत को हराकर खिताब जीता था।
- भारत: नौवें स्थान पर मौजूद भारतीय टीम इस टूर्नामेंट में अपनी लय और निरंतरता के साथ उतरेगी।
- दक्षिण अफ्रीका: 19वें स्थान पर काबिज यह टीम टूर्नामेंट की सबसे बड़ी ‘अनप्रिडिक्टेबल’ यानी अप्रत्याशित टीम मानी जाती है।
कोच मारिजने की रणनीति
भारतीय टीम के मुख्य कोच सजोर्ड मारिजने ने टीम की तैयारियों पर बात करते हुए स्पष्ट किया कि उनका ध्यान विरोधियों की कमजोरी खोजने से ज्यादा अपनी ताकत को पहचानने पर है। सजोर्ड मारिजने ने कहा कि यह एक प्रतिस्पर्धी पूल है, जहां हर टीम का अनुभव अलग है। उन्होंने जोर दिया कि विश्व कप जैसे टूर्नामेंट में हर मैच फाइनल की तरह होता है। सजोर्ड मारिजने के अनुसार, टीम का लक्ष्य निरंतरता और साहस के साथ अपनी शैली की हॉकी खेलना है, जिससे विरोधी टीमों पर मानसिक दबाव बनाया जा सके।
हैदराबाद से मिली सीख
हाल ही में हैदराबाद, तेलंगाना में संपन्न हुए क्वालिफायर्स ने भारतीय टीम के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी है। हालांकि फाइनल में इंग्लैंड से मिली हार एक सबक रही, लेकिन टीम के आंकड़े काफी सकारात्मक रहे।
“हमने आगे बढ़कर अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन हमारे लिए सबसे जरूरी बात यह है कि हम अपने मौकों को गोल में बदलने पर ध्यान दें,” सजोर्ड मारिजने ने अपनी टीम के प्रदर्शन का विश्लेषण करते हुए यह बात कही।
टीम ने पूरे टूर्नामेंट में कुल 11 गोल किए, जिसमें से छह गोल पेनल्टी कॉर्नर के जरिए आए। यह दर्शाता है कि टीम के पास सेट-पीस को गोल में बदलने की अच्छी क्षमता है, जिसे विश्व कप में और बेहतर करने की आवश्यकता है।
तैयारियों का रोडमैप
विश्व कप के लिए टीम सिर्फ ट्रेनिंग कैंप तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर में कई दौरों के जरिए अपनी तैयारी को पुख्ता कर रही है। सजोर्ड मारिजने ने बताया कि टीम की तैयारी का खाका बेहद व्यवस्थित है:
- अंतर्राष्ट्रीय दौरे: यूएसए और अर्जेंटीना का दौरा टीम को अलग-अलग खेल परिस्थितियों से रूबरू कराएगा।
- प्रतियोगिताएं: न्यूजीलैंड में नेशंस कप और जर्मनी में अभ्यास मैच टीम के कॉम्बिनेशन को परखने में मदद करेंगे।
- यूरोपीय अनुभव: नीदरलैंड्स में खेले जाने वाले मैच टीम को बड़े टूर्नामेंट के माहौल में ढलने का मौका देंगे।
सुधार के मुख्य बिंदु
कोच सजोर्ड मारिजने ने साफ तौर पर कहा है कि टीम को मैदान के दोनों छोरों पर सटीक रहने की जरूरत है। डिफेंस में बिखराव को कम करना और फील्ड गोल में तब्दीली की दर को बढ़ाना ही विश्व कप में सफलता की चाबी होगी। टीम के खिलाड़ी अब अपने फिटनेस और स्किल सेट पर व्यक्तिगत स्तर पर भी काम कर रहे हैं, ताकि एशियन गेम्स और वर्ल्ड कप की दोहरी चुनौतियों का सामना किया जा सके। निरंतरता बनाए रखना ही इस समय टीम का एकमात्र मंत्र है।








