पटना,अंग भारत। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘सम समृद्धि यात्रा’ के दौरान जमुई में एक बड़ा ऐलान किया गया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि जमुई में 6 हजार करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से एक अत्याधुनिक स्टील प्लांट की स्थापना की जाएगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक विकास को गति देना और स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करना है। इसके साथ ही, नवादा में परमाणु ऊर्जा संयंत्र लगाने की कार्ययोजना पर भी काम शुरू हो चुका है, जो बिहार को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
जमुई का औद्योगिक विकास
उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जमुई के लछुआर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जमुई, जो कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता था, अब औद्योगिक हब बनने की ओर अग्रसर है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि यदि स्थानीय स्तर पर उद्योग स्थापित होंगे, तो बिहार से होने वाले पलायन पर स्थायी रूप से रोक लग सकेगी। स्टील प्लांट के अलावा, क्षेत्र में इथेनॉल प्लांट की स्थापना की भी रूपरेखा तैयार की गई है। इन उद्योगों के लगने से न केवल प्रत्यक्ष रोजगार मिलेंगे, बल्कि सहायक उद्योगों के माध्यम से भी स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
पर्यटन और आधारभूत संरचना
केवल उद्योग ही नहीं, बल्कि जमुई को पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख स्थान के रूप में विकसित किया जा रहा है। सरकार की योजनाओं के बारे में बताते हुए सम्राट चौधरी ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जोर दिया:
- भीमबांध और कुंड घाट को इको-टूरिज्म के रूप में विकसित किया जाएगा।
- कुंड घाट जलाशय का उद्घाटन किया जा चुका है।
- बरनार जलाशय के विकास के लिए कार्ययोजना पर काम जारी है।
- पर्यटन से स्थानीय स्तर पर होटल, गाइड और परिवहन जैसे क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे।
नवादा में ऊर्जा क्रांति
जमुई के बाद नवादा के आईटीआई मैदान में जनसभा को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ने नवादा के लिए भी कई बड़ी घोषणाएं कीं। नवादा में परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Nuclear Power Plant) की स्थापना का प्रस्ताव राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। यह संयंत्र न केवल सस्ती बिजली उपलब्ध कराएगा, बल्कि क्षेत्र में एक नया औद्योगिक वातावरण भी तैयार करेगा। इसके अतिरिक्त, नवादा में मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जो स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करेगा। फुलवरिया डैम के विकास और मछली पालन (Fisheries) को बढ़ावा देकर कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को भी सहारा दिया जा रहा है।
बिहार का बदला स्वरूप
सम्राट चौधरी ने आंकड़ों के माध्यम से 2005 के बिहार और आज के बिहार की तुलना की। उन्होंने बताया कि किस तरह बुनियादी बदलाव आए हैं:
| पैमाना | वर्ष 2005 | वर्तमान स्थिति |
|---|---|---|
| सड़कों की लंबाई | 6 हजार किमी | 1.40 लाख किमी |
| राज्य का बजट | 23 हजार करोड़ | 3.5 लाख करोड़ |
| बिजली उपभोक्ता | 17 लाख | 2.16 करोड़ |
महिला सशक्तिकरण की भूमिका
उपमुख्यमंत्री ने जीविका दीदियों और महिला सशक्तिकरण की चर्चा करते हुए कहा कि आज राज्य की अर्थव्यवस्था में महिलाएं एक बड़ी ताकत बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के अंतर्गत 1 करोड़ 81 लाख महिलाओं को आर्थिक संबल प्रदान किया गया है। जीविका समूहों से जुड़ी ये महिलाएं अब 1 लाख 26 हजार करोड़ रुपये का योगदान राज्य की अर्थव्यवस्था में दे रही हैं। यह न केवल उनकी आत्मनिर्भरता को दर्शाता है, बल्कि राज्य के सामाजिक बदलाव का भी प्रमाण है।
सरकार का भावी लक्ष्य
अगले पांच वर्षों में सरकार का मुख्य लक्ष्य एक करोड़ लोगों को रोजगार और नौकरी मुहैया कराना है। सम्राट चौधरी का कहना है कि बिहार की सड़कों की स्थिति में सुधार होने के बाद अब ध्यान पूरी तरह से औद्योगिक विकास और निवेश को आकर्षित करने पर है। 88 प्रतिशत परिवारों का बिजली बिल शून्य होना और 22 से 24 घंटे बिजली की उपलब्धता यह साबित करती है कि बिहार विकास की पटरी पर तेजी से दौड़ रहा है। नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में एनडीए सरकार का दावा है कि राज्य में शांति, सुशासन और रोजगार का जो वातावरण बना है, वह आने वाले समय में बिहार को देश के अग्रणी राज्यों में शुमार करेगा।








