गुवाहाटी, अंग भारत। असम में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आगामी 2026 विधानसभा चुनाव के लिए कमर कस ली है। नई दिल्ली में लगातार दो दिनों तक चली हाई-प्रोफाइल बैठकों के बाद, भाजपा ने असम की 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए अपने 88 उम्मीदवारों की पहली सूची आधिकारिक रूप से जारी कर दी है। यह फैसला राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक के दौरान लिया गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृहमंत्री अमित शाह जैसे वरिष्ठ नेता मौजूद थे।
रणनीति और गठबंधन
भाजपा ने इस बार बेहद सधी हुई रणनीति अपनाई है। पार्टी ने न केवल अपने पुराने और अनुभवी विधायकों पर भरोसा जताया है, बल्कि सहयोगी दलों के साथ तालमेल बिठाने का भी पूरा प्रयास किया है। भाजपा ने असम गण परिषद (अगप) के लिए 26 सीटें और बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट (बीपीएफ) के लिए 11 सीटें छोड़ी हैं। यह कदम एनडीए के गठबंधन को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा संकेत है ताकि विपक्ष के खिलाफ एक स्पष्ट मुकाबला पेश किया जा सके।
प्रमुख उम्मीदवार
सूची में 88 नाम शामिल हैं, जिनमें छह महिला उम्मीदवार भी अपनी जगह बनाने में कामयाब रही हैं। नीचे प्रमुख उम्मीदवारों की सूची दी गई है:
- डॉ. हिमंत बिस्व सरमा – जालुकबारी (37)
- रंजीत कुमार दास – भवानीपर-सोरभोग (21)
- भवेश कलिता – रंगिया (31)
- चंद्रमोहन पाटोवारी – टिहू (40)
- बिस्वजीत दैमारी – तामुलपुर (अजजा) (43)
- पीयूष हजारिका – जागीरोड (अजा) (52)
- अशोक सिघल – ढेकियाजुली (65)
- अजंता नेओग – गोलाघाट (103)
- डॉ. राजदीप रॉय – सिलचर (118)
- प्रशांत फुकन – डिब्रूगढ़ (88)
चुनावी समीकरण और प्रभाव
इस सूची में कई ऐसे नाम हैं जो अपने क्षेत्र में काफी मजबूत पकड़ रखते हैं। भाजपा का मुख्य फोकस जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को टिकट देने के साथ-साथ उन सीटों पर भी है जहां पिछले चुनावों में कड़ी टक्कर देखने को मिली थी। उदाहरण के लिए, जालुकबारी से डॉ. हिमंत बिस्व सरमा की उम्मीदवारी पहले से ही तय मानी जा रही थी, जो राज्य की राजनीति में भाजपा के चेहरे के रूप में देखे जाते हैं। वहीं, गोलाघाट से अजंता नेओग को फिर से मौका देना पार्टी का उन पर बना अटूट विश्वास दर्शाता है।
सामाजीक समावेशिता
भाजपा ने अपनी सूची में जातिगत और क्षेत्रीय संतुलन को बनाए रखने की कोशिश की है। सूची में बोडोलैंड क्षेत्र, बराक घाटी और ऊपरी असम के विभिन्न हिस्सों के नेताओं को स्थान दिया गया है। अनुसूचित जाति (अजा) और अनुसूचित जनजाति (अजजा) के लिए आरक्षित सीटों पर भी स्थानीय दिग्गजों को प्राथमिकता दी गई है, जैसे कि रंगापारा से कृष्ण कमल तांती और ढकुआखाना से डॉ रनोज पेगु। यह विविधता बताती है कि भाजपा असम के हर वर्ग तक अपनी पैठ बनाना चाहती है।
आगामी चुनौतियां
88 उम्मीदवारों की घोषणा के बाद अब सभी की निगाहें शेष 38 सीटों पर टिकी हैं। पार्टी के अंदर टिकट वितरण के बाद उपजे असंतोष को शांत करना और गठबंधन के भीतर सीटों के तालमेल को आखिरी रूप देना अब भाजपा के रणनीतिकारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। हालांकि, राष्ट्रीय नेतृत्व की सीधी देखरेख में हुई इस घोषणा से पार्टी के कैडर में उत्साह का माहौल है। असम के चुनावी दंगल में भाजपा अब पूरी तरह से ‘इलेक्शन मोड’ में आ चुकी है और बाकी पार्टियों के लिए भी अब अपनी रणनीति को सार्वजनिक करना अनिवार्य हो गया है।








