चंडीगढ़,अंग भारत। हरियाणा कांग्रेस में राज्यसभा चुनाव के दौरान हुई क्रॉस वोटिंग का मामला अब पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। कांग्रेस की अनुशासन समिति ने रतिया के विधायक जरनैल सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है, जो इस मामले में पार्टी की ओर से उठाया गया ताजा कदम है। इस नोटिस के साथ ही अब तक कुल पांच कांग्रेस विधायकों को पार्टी नेतृत्व के सवालों का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि इन सभी विधायकों को सात दिनों के भीतर अपने जवाब दाखिल करने होंगे, अन्यथा उनके खिलाफ निलंबन या निष्कासन जैसी कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
पांच विधायकों को नोटिस
अनुशासन समिति के अध्यक्ष धर्मपाल मलिक ने विधायक जरनैल सिंह को नोटिस भेजकर राज्यसभा चुनाव में हुई वोटिंग प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण मांगा है। इससे पहले पार्टी ने चार अन्य विधायकों को एक साथ नोटिस जारी कर अपनी रणनीति साफ कर दी थी। कांग्रेस आलाकमान इस मामले को बहुत गंभीरता से ले रहा है, क्योंकि 16 मार्च को संपन्न हुए राज्यसभा चुनाव में हुई कथित क्रॉस वोटिंग ने पार्टी की एकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- जरनैल सिंह (रतिया) को ताजा नोटिस जारी हुआ।
- कुल पांच विधायकों को अब तक घेरे में लिया गया।
- जवाब देने के लिए सात दिनों का समय दिया गया है।
- अनुशासन समिति के अध्यक्ष धर्मपाल मलिक ने कार्रवाई का नेतृत्व किया।
वोटिंग का गणित
16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। केवल क्रॉस वोटिंग का मामला ही नहीं, बल्कि चार विधायकों के वोट तकनीकी खामियों के चलते रद्द भी हो गए थे। इस दोहरी मार ने कांग्रेस की राज्य इकाई में खलबली मचा दी है। तकनीकी त्रुटि और क्रॉस वोटिंग, इन दोनों घटनाओं ने न केवल चुनाव परिणाम को प्रभावित किया बल्कि पार्टी के भीतर अनुशासन की कमी को भी उजागर किया है।
वरिष्ठ नेताओं का रुख
हरियाणा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने शुरू से ही इन पांचों विधायकों पर पार्टी लाइन से हटकर मतदान करने का आरोप लगाया है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि इन नेताओं की नाराजगी इस बात से है कि इतनी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में लापरवाही या जानबूझकर की गई गलती पार्टी के भविष्य के लिए घातक साबित हो सकती है।
“पार्टी ने स्पष्ट किया है कि यदि विधायकों द्वारा दिए गए जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाते हैं, तो भविष्य में उनके खिलाफ निलंबन जैसे कड़े कदम उठाए जाएंगे।”
राजनीति पर असर
यह पूरा घटनाक्रम हरियाणा कांग्रेस की अंदरूनी कलह का एक और बड़ा सबूत बनकर उभरा है। आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच इस तरह की अनुशासनहीनता पार्टी के वोट बैंक और कार्यकर्ताओं के मनोबल पर बुरा असर डाल सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि समय रहते इन असंतुष्ट विधायकों पर लगाम नहीं कसी गई, तो आने वाले दिनों में पार्टी को और भी ज्यादा आंतरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
क्या हो सकती है कार्रवाई?
पार्टी के संविधान के अनुसार, यदि कोई सदस्य व्हिप का उल्लंघन करता है या पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:
- विधायकों को सीधे पार्टी से निष्कासित करना।
- विधायक दल से निलंबित करना।
- चुनाव आयोग को रिपोर्ट भेजकर दलबदल कानून के तहत अयोग्यता की मांग करना।
अब सबकी निगाहें इन पांचों विधायकों के जवाब पर टिकी हैं। क्या वे अपने बचाव में कोई ठोस दलील पेश कर पाएंगे या फिर कांग्रेस नेतृत्व अपनी साख बचाने के लिए उन पर बड़ी गाज गिराएगा, यह आने वाले कुछ ही दिनों में स्पष्ट हो जाएगा। यह देखना भी दिलचस्प होगा कि राज्य की सक्रिय राजनीति में इन विधायकों का अगला कदम क्या होता है।








