रामगढ़,अंग भारत। झारखंड के रामगढ़ जिले में स्थित हेसला गांव के झारखंड इस्पात प्लांट में हुए फर्नेस हादसे ने एक और मजदूर की जान ले ली है। इस ताजा मौत के बाद इस दुर्घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है।
घायल मजदूर ने अस्पताल में तोड़ा दम
गंभीर रूप से झुलसे मजदूर बृजलाल बेदिया ने रांची के देवकमल अस्पताल में सोमवार देर रात दम तोड़ दिया। वह हादसे के बाद से ही जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे थे। इससे पहले इसी घटना में घायल अशोक बेदिया और अखिल राय की भी इलाज के दौरान मौत हो चुकी है।
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चार मजदूर अब भी जिंदगी से जूझ रहे
हादसे में घायल अन्य मजदूरों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। चार मजदूरों का इलाज जारी है और वे अब भी अस्पताल में भर्ती हैं। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
फर्नेस फटने से हुआ था हादसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार झारखंड इस्पात प्लांट में फर्नेस फटने की घटना के बाद यह बड़ा हादसा हुआ था। अचानक हुए विस्फोट से कई मजदूर इसकी चपेट में आ गए थे, जिससे वे गंभीर रूप से झुलस गए। इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल बन गया था।
मुआवजे पर बनी सहमति, खत्म हुआ आंदोलन
हादसे के बाद मृतकों के परिजनों और ग्रामीणों ने मुआवजे और अन्य मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। सोमवार देर रात जिला प्रशासन, प्लांट प्रबंधन और ग्रामीणों के बीच वार्ता के बाद छह बिंदुओं पर सहमति बनी, जिसके बाद आंदोलन समाप्त कर दिया गया।
मृतकों के आश्रितों को 21 लाख मुआवजा
समझौते के तहत प्रत्येक मृतक के आश्रितों को 21 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही सभी घायलों का समुचित और निःशुल्क इलाज कराने की जिम्मेदारी प्लांट प्रबंधन ने ली है।
घायलों को मिलेगा वेतन और सुविधाएं
यह भी तय हुआ है कि जब तक घायल मजदूर पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो जाते, उन्हें नियमित वेतन मिलता रहेगा। इसके अलावा सभी मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी का लाभ दिया जाएगा और कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) की सुविधा भी लागू की जाएगी।
प्रदूषण नियंत्रण का भी आश्वासन
वार्ता में यह भी सहमति बनी कि प्लांट प्रबंधन तीन महीने के भीतर प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवश्यक कदम उठाएगा। इससे स्थानीय लोगों को होने वाली परेशानियों को कम करने का प्रयास किया जाएगा।इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मजदूरों और उनके परिजनों में अब भी भय और आक्रोश का माहौल है, जबकि प्रशासन ने मामले की जांच और आगे की कार्रवाई का आश्वासन दिया है।









