नईदिल्ली,अंग भारत| दो महीने तक ‘ग्राउंडेड’ रहने के बाद भारतीय वायु सेना के स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमानों ने आधिकारिक तौर पर दोबारा उड़ान भरना शुरू कर दिया है। तकनीकी खामियों के कारण सुरक्षा को लेकर खड़े हुए सवालों के बाद, विमान के ब्रेकिंग सिस्टम और सॉफ्टवेयर में बड़े सुधार किए गए हैं। वायु सेना और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की संयुक्त जांच और कठोर परीक्षणों के बाद अब ये लड़ाकू विमान पूरी तरह से ऑपरेशनल होने के लिए तैयार हैं, जो भारतीय रक्षा बेड़े की ताकत को फिर से मजबूती प्रदान करेगा।
क्यों ग्राउंड हुए थे तेजस?
हाल के दिनों में भारतीय वायु सेना के लिए तेजस विमानों की सुरक्षा एक बड़ी प्राथमिकता बन गई थी। लगातार तीन घटनाओं ने सुरक्षा विशेषज्ञों और रक्षा अधिकारियों के कान खड़े कर दिए थे। इन घटनाओं का सिलसिला तब टूटा जब वायु सेना ने एहतियात के तौर पर अपने करीब 35 तेजस मार्क-1 विमानों के पूरे फ्लीट को जमीन पर उतार दिया था।
- फरवरी 2025 का हादसा: पश्चिमी मोर्चे पर टेकऑफ के दौरान विमान रनवे से फिसलकर मिट्टी में जा धंसा था।
- जैसलमेर दुर्घटना: मार्च 2024 में जैसलमेर के पास हुए हादसे ने विमान की संरचनात्मक मजबूती पर सवाल खड़े किए थे।
- दुबई एयरशो: नवंबर 2025 में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना में पायलट की जान चली गई थी, जिसने सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा को अनिवार्य बना दिया था।
जांच में क्या मिला?
विमानों के ग्राउंड होने के बाद भारतीय वायु सेना और एचएएल (HAL) की एक विशेष टीम ने इनकी गहन तकनीकी जांच की। इस जांच का मुख्य केंद्र विमान का ब्रेकिंग सिस्टम था। डेटा विश्लेषण से पता चला कि रनवे पर विमान के अनियंत्रित होने के पीछे सॉफ्टवेयर की एक छोटी लेकिन गंभीर खामी थी।
विशेषज्ञों ने न केवल सॉफ्टवेयर, बल्कि विमान के अंडर-कैरिज, पहियों में इस्तेमाल होने वाली मेटलर्जी और इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक ब्रेकिंग सिस्टम की भी बारीकी से जांच की। यह साबित हो गया कि एक सटीक तकनीकी सुधार से इन विमानों को दोबारा सुरक्षित बनाया जा सकता है।
सॉफ्टवेयर में बड़े बदलाव
एचएएल के चेयरमैन डीके सुनील ने स्पष्ट किया है कि विमान में कोई आमूल-चूल बदलाव नहीं किया गया है, बल्कि मौजूदा ब्रेकिंग सॉफ्टवेयर को अपग्रेड किया गया है। नया अपडेटेड सिस्टम विमान की कंट्रोलिंग को और ज्यादा स्मूथ बनाता है, जिससे आपातकालीन स्थिति में भी पायलट विमान को सुरक्षित संभाल सके।
सॉफ्टवेयर का यह नया वर्जन अब पहले से कहीं अधिक सटीक है। सभी स्तरों पर कड़े टेस्ट पास करने के बाद ही इसे ऑपरेशनल मंजूरी दी गई है।
क्यों है तेजस महत्वपूर्ण?
तेजस केवल एक लड़ाकू विमान नहीं है, यह भारत की ‘आत्मनिर्भरता’ का प्रतीक है। यह विमान अत्यधिक जटिल ऑन-बोर्ड मिशन कंप्यूटर पर चलता है। इसके कुछ प्रमुख तकनीकी फीचर्स निम्नलिखित हैं:
- एडवांस्ड टारगेटिंग: कंप्यूटर आधारित सटीक निशाना लगाने की क्षमता।
- रडार सिग्नेचर: दुश्मन के रडार की पकड़ से बचने के लिए लो-सिग्नेचर टेक्नोलॉजी।
- फायरिंग सिस्टम: स्वचालित और सटीक मिसाइल फायरिंग कंट्रोल।
भविष्य की राह
फरवरी में पोखरण में आयोजित ‘वायु शक्ति’ अभ्यास में तेजस की अनुपस्थिति ने वायु सेना की क्षमता में कमी महसूस कराई थी। लेकिन अब जब ये विमान दोबारा आसमान में लौट आए हैं, तो भारतीय वायु सेना का मनोबल काफी बढ़ा है। सुरक्षा मानकों को और कड़ा करते हुए, इन विमानों को भविष्य में और अधिक मिशनों के लिए तैयार किया जा रहा है। भारतीय रक्षा क्षेत्र के लिए यह एक सकारात्मक मोड़ है, जो दिखाता है कि स्वदेशी तकनीक न केवल भविष्य का रास्ता है, बल्कि इसे लगातार सुधारने की क्षमता भी हमारे पास है।








