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बाबा साहेब अम्बेडकर जयंती धूमधाम से मनाई गई

चान्दन/बांका/अंग भारत । मंगलवार को चान्दन प्रखंड में डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती को एक पर्व की तरह मनाया गया, जिसमें स्थानीय लोगों ने न केवल उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त की, बल्कि उनके द्वारा दिखाए गए समानता और शिक्षा के मार्ग पर चलने का संकल्प भी लिया। यह आयोजन केवल एक रस्म नहीं थी, बल्कि बाबा साहेब के उन विचारों का पुनर्मूल्यांकन था, जो आज भी भारत के सामाजिक ढांचे को सशक्त बनाने की नींव हैं। बिरनिया पंचायत के शेखपुरा, गोपडीह, खिरर्तरी और शिलजोरी पंचायत के पेलवा जैसे गांवों से निकली भीड़ ने यह स्पष्ट कर दिया कि बाबा साहेब की विरासत आज भी करोड़ों लोगों के दिल में जीवित है।

बाबा साहेब का योगदान

डॉ. भीमराव अम्बेडकर केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचारधारा का नाम हैं। उन्होंने भारत के संविधान का निर्माण करते समय हर वर्ग के व्यक्ति को गरिमा के साथ जीने का अधिकार दिया। चान्दन में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य केंद्र बिंदु बाबा साहेब के ‘शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो’ के मूल मंत्र को जन-जन तक पहुंचाना था। जुलूस में शामिल युवाओं का उत्साह यह बता रहा था कि आने वाली पीढ़ी अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति अब पहले से कहीं ज्यादा जागरूक है।

जुलूस और जनभागीदारी

इस भव्य जुलूस की सबसे बड़ी खासियत इसका अनुशासन और सामाजिक संदेश था। लोग हाथों में बाबा साहेब के चित्र वाले बैनर और नीले झंडे लिए हुए थे। जुलूस का मार्ग चान्दन बाजार तक तय किया गया, जहाँ से गुजरते हुए लोगों ने सामाजिक न्याय की पुरजोर मांग की।

  • शिक्षा को प्राथमिकता: जुलूस में तख्तियों के माध्यम से शिक्षा को ही समाज के पिछड़ेपन को दूर करने का एकमात्र हथियार बताया गया।
  • समानता का संदेश: विभिन्न गांवों के लोगों का एक साथ आना सामाजिक एकजुटता की मिसाल पेश करता है।
  • जागरूकता अभियान: जुलूस के दौरान बाबा साहेब के जीवन संघर्षों पर आधारित नारे लगाए गए।

श्रद्धांजलि और चर्चा

बाजार क्षेत्र में जुलूस के रुकने पर बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण का कार्यक्रम हुआ। स्थानीय बुद्धिजीवियों ने बाबा साहेब के संघर्षों को याद किया। उन्होंने बताया कि कैसे विषम परिस्थितियों में भी बाबा साहेब ने देश को सबसे बड़ा लिखित संविधान दिया। यह चर्चा केवल उनके जीवन तक सीमित नहीं रही, बल्कि आज के दौर में संविधान की प्रासंगिकता और उस पर मंडरा रहे चुनौतियों पर भी बात हुई।

सुरक्षा और प्रबंधन

इतनी बड़ी भीड़ को व्यवस्थित करना एक बड़ी जिम्मेदारी थी। चान्दन थाना प्रभारी श्रीकांत भारती ने खुद कमान संभाली। उनके नेतृत्व में पुलिस बल ने पूरी मुस्तैदी दिखाई। किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रशासन ने जो सतर्कता बरती, उसी का नतीजा था कि पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण रहा। पुलिस और जनता के बीच का यह तालमेल एक लोकतांत्रिक उत्सव के लिए बहुत जरूरी होता है।

“बाबा साहेब की जयंती मनाना तब सार्थक होगा जब हम उनके द्वारा बताए गए शिक्षा और समानता के सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारेंगे।” – कार्यक्रम के आयोजक मंडल के सदस्य।

सफलता में योगदान

इस आयोजन को धरातल पर उतारने के लिए महीनों पहले से तैयारी चल रही थी। इसमें शामिल लोगों की मेहनत का ही परिणाम था कि चान्दन प्रखंड में एक नया इतिहास रचा गया। आयोजन को सफल बनाने में निम्नलिखित लोगों की विशेष भूमिका रही:

नाम योगदान
चन्द्रशेखर दास मुख्य समन्वय
भगवान दास आर्थिक व रणनीतिक सहयोग
बलराम दास युवाओं का मार्गदर्शन
गौतम दास और कार्तिक दास व्यवस्था प्रबंधन

भविष्य के संकल्प

जुलूस और सभा के समापन के बाद, स्थानीय लोगों ने यह तय किया कि वे हर वर्ष इस दिन को अधिक व्यापक रूप देंगे। डॉ. अम्बेडकर जयंती अब केवल एक आयोजन नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक क्रांति का प्रतीक है जो चान्दन जैसे छोटे कस्बों में भी लोगों को सही रास्ता दिखा रही है। भविष्य में वे लोग मिलकर गांव-गांव में छोटे-छोटे शिक्षण केंद्र खोलने पर भी विचार कर रहे हैं, ताकि बाबा साहेब का शिक्षा का सपना पूरा हो सके।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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