कोलकाता,अंग भारत। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान से ठीक पहले, कर्सियांग में हुई केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की जनसभा ने पूरे उत्तर बंगाल की राजनीतिक फिजा बदल दी है। इस रैली के जरिए शाह ने ममता बनर्जी सरकार पर सीधा और तीखा हमला बोलते हुए सत्ता परिवर्तन का स्पष्ट आह्वान किया है। उन्होंने न केवल गोरखा समुदाय के लंबित अधिकारों और सुरक्षा के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया, बल्कि अवैध घुसपैठ, महिला सुरक्षा और उत्तर बंगाल में कनेक्टिविटी को आधार बनाकर भाजपा के चुनावी एजेंडे को पूरी तरह साफ कर दिया है। यह सभा इस बात का संकेत है कि चुनाव के पहले चरण में भाजपा किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है और पूरी ताकत झोंक रही है।
गोरखा समुदाय का भविष्य
कर्सियांग की इस रैली में अमित शाह का सबसे बड़ा संदेश गोरखा भाई-बहनों के लिए था। दशकों से चले आ रहे गोरखाओं के राजनीतिक और सामाजिक संकट को मुद्दा बनाते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस और टीएमसी ने इस समाज को सिर्फ एक वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया है। शाह ने वादा किया कि भाजपा की सरकार बनने के बाद गोरखाओं के गौरव और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए एक स्थायी समाधान निकाला जाएगा। उनका यह आश्वासन दार्जिलिंग पहाड़ियों में वर्षों से बनी राजनीतिक अनिश्चितता को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा वादा माना जा रहा है।
मतदाता सूची पर स्पष्ट रुख
रैली के दौरान शाह ने उन खबरों का विशेष उल्लेख किया जिनमें गोरखा समुदाय के लोगों के नाम मतदाता सूची से काटे जाने का दावा किया गया था। उन्होंने मंच से हुंकार भरी कि अगर किसी के नाम गलत तरीके से सूची से हटाए गए हैं, तो नई सरकार के गठन के बाद उन्हें प्राथमिकता के आधार पर वापस जोड़ा जाएगा। यह मुद्दा स्थानीय स्तर पर काफी संवेदनशील है और शाह ने इसे सीधे सुरक्षा और अधिकार से जोड़कर मतदाताओं के बीच एक मजबूत विश्वास पैदा करने की कोशिश की है।
घुसपैठ और राष्ट्रीय सुरक्षा
अमित शाह ने बंगाल की सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर करते हुए अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर ममता सरकार को घेरा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि रोहिंग्या तत्वों और सीमा पार से हो रही घुसपैठ ने राज्य की डेमोग्राफी के साथ-साथ सुरक्षा को भी खतरे में डाल दिया है। भाजपा का वादा है कि सरकार बनते ही सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाया जाएगा। उनका तर्क है कि जब तक घुसपैठ पर पूरी तरह लगाम नहीं लगेगी, तब तक स्थानीय युवाओं के रोजगार और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना नामुमकिन है।
उत्तर बंगाल का कायाकल्प
विकास की बात करते हुए गृह मंत्री ने केंद्र सरकार की उन योजनाओं का खाका रखा जो उत्तर बंगाल की तकदीर बदलने वाली हैं। उन्होंने जिन प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा की, वे इस प्रकार हैं:
- रेल कनेक्टिविटी: सेवक-रंगपो रेल परियोजना का तेजी से चल रहा निर्माण कार्य।
- आधुनिकीकरण: न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करना।
- वंदे भारत: उत्तर बंगाल के प्रमुख शहरों को जोड़ने के लिए वंदे भारत ट्रेनों का विस्तार।
- पर्यटन को बढ़ावा: पर्यटन क्षमता का दोहन करने के लिए नई बुनियादी ढांचा नीतियां।
महिला सुरक्षा और अपराध
ममता सरकार पर निशाना साधते हुए शाह ने कहा कि आज बंगाल की महिलाएं असुरक्षित महसूस कर रही हैं और अपराध के मामले में राज्य की स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने चेतावनी दी कि भाजपा की सरकार में किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। उनका यह बयान चुनावी सभाओं में महिलाओं की बड़ी भागीदारी को आकर्षित करने के लिए एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
अंतिम दौर का महासंग्राम
पहले चरण के चुनाव की दहलीज पर खड़ी भाजपा अपनी पूरी ताकत झोंक रही है। कर्सियांग के अलावा कुल्टी, शालबनी और चंडीपुर में अमित शाह की लगातार रैलियां इस बात का प्रमाण हैं कि भाजपा बंगाल के हर कोने तक पहुंचना चाहती है। उत्तर बंगाल का यह इलाका भाजपा के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां पिछले चुनावों में पार्टी को मजबूत समर्थन मिला था। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या शाह के ये दावे और वादे 23 अप्रैल को मतदान केंद्रों तक पहुंचने वाले वोटरों पर अपना प्रभाव छोड़ पाते हैं या नहीं।








