कोलकाता, अंग भारत। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। वे दूसरे चरण के मतदान से पहले कोलकाता में ही डेरा डालकर चुनावी गतिविधियों की कमान सीधे अपने हाथों में ले चुके हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, वे 27 अप्रैल तक राज्य में रहकर हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर नजर रखेंगे। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य न केवल रणनीतियों को अंतिम रूप देना है, बल्कि कार्यकर्ताओं के गिरते मनोबल को ऊपर उठाना और बूथ प्रबंधन की कमियों को दूर करना भी है। शाह की यह सीधी मौजूदगी संकेत देती है कि भाजपा बंगाल चुनाव को किसी भी हाल में ढिलाई के साथ नहीं लेना चाहती।
रणनीति और बैठकें
हाल ही में अमित शाह ने न्यू टाउन स्थित भाजपा के मुख्य कार्यालय में देर रात तक एक उच्च-स्तरीय बैठक की। यह बैठक रात 9:45 बजे शुरू हुई और अगली सुबह 2:05 बजे तक चली, जो यह बताती है कि पार्टी हर बारीक मुद्दे पर कितना गंभीर है। इसमें 13 संगठनात्मक जिलों के अध्यक्षों, जिला प्रभारियों और प्रवासी प्रभारियों के अलावा भाजपा के दिग्गज नेता जैसे भूपेंद्र यादव, बिप्लब देव, सुनील बंसल और अमित मालवीय भी मौजूद थे। बैठक में मुख्य फोकस दूसरे चरण की उन सभी सीटों पर था, जहाँ मुकाबला कांटे का माना जा रहा है।
विस्तृत समीक्षा के बिंदु
- प्रत्येक विधानसभा सीट की जमीनी स्थिति का विश्लेषण।
- अल्पसंख्यक मतदाताओं का रुझान और उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों की मैपिंग।
- मतदाता सूची में बदलाव और नए मतदाताओं के जुड़ाव की समीक्षा।
- विपक्षी दलों के मजबूत और कमजोर इलाकों की पहचान।
जमीनी रिपोर्ट का महत्व
अमित शाह ने केवल सुनी-सुनाई बातों पर भरोसा न करते हुए बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं और स्थानीय प्रभारियों से सीधे फीडबैक लिया। उनके पास अपना एक गुप्त रिपोर्ट कार्ड भी था, जिसका मिलान उन्होंने स्थानीय नेताओं की रिपोर्ट से किया। इस प्रक्रिया के जरिए उन्होंने यह जानने की कोशिश की कि चुनावी शोर-शराबे और हकीकत में कितना अंतर है। उन्होंने साफ कर दिया है कि केवल हवा में बातें करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि हर सीट पर जीत का ठोस आधार चाहिए।
बूथ स्तर पर पकड़
शाह का सबसे ज्यादा जोर ‘बूथ जीतो, चुनाव जीतो’ के मंत्र पर रहा है। बैठक के दौरान उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि चुनाव प्रचार के आखिरी घंटों में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं का आह्वान करते हुए कहा कि केंद्रीय नेतृत्व उनके साथ मजबूती से खड़ा है, इसलिए उन्हें बिना डरे अपने काम में जुटना चाहिए।
| प्रमुख बिंदु | विवरण |
|---|---|
| प्रचार का अंतिम दौर | 29 अप्रैल को मतदान से पहले का समय निर्णायक |
| निगरानी का दायरा | 13 प्रमुख संगठनात्मक जिले |
| नेतृत्व का संदेश | बूथ स्तर तक संगठन को पूरी तरह सक्रिय करना |
क्यों अहम है यह दौरा?
दूसरे चरण का मतदान भाजपा के लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल करने का एक बड़ा मौका है। 23 अप्रैल को पहले चरण के मतदान के दौरान भी शाह की राज्य में मौजूदगी ने पार्टी कैडर में ऊर्जा भरने का काम किया है। राजनीति के गलियारों में चर्चा है कि शाह की यह सक्रियता विपक्षी दलों की नींद उड़ाने के लिए काफी है, क्योंकि वे सीधे तौर पर माइक्रो-मैनेजमेंट पर काम कर रहे हैं। बंगाल की राजनीति का इतिहास गवाह है कि अंतिम समय में की गई मेहनत ही जीत और हार के बीच की रेखा तय करती है, और अमित शाह इसी बारीकी को साधने में माहिर माने जाते हैं।
अब देखना यह होगा कि गृहमंत्री का यह मैराथन प्रवास भाजपा को बंगाल की सत्ता के कितना करीब ले जाता है। कार्यकर्ताओं को स्पष्ट निर्देश मिल चुके हैं कि अब वक्त भाषणों का नहीं, बल्कि जमीन पर पसीना बहाने का है। चुनाव परिणाम आने तक बंगाल की राजनीति का पारा इसी तरह चढ़ा रहने की पूरी संभावना है।








