मुंगेर,अंग भारत। पहली बार विधायक चुने जाने के बाद सीधे मुख्यमंत्री के पद तक पहुँचना एक बड़ी उपलब्धि है और सम्राट चौधरी ने इसे स्वीकार करते हुए कहा है कि यह उनके लिए केवल सम्मान नहीं, बल्कि एक भारी जिम्मेदारी है। तारापुर विधानसभा क्षेत्र के अपने हालिया दौरे के दौरान उन्होंने साफ कर दिया कि वे जनता के भरोसे को टूटने नहीं देंगे। उन्होंने न केवल अपने क्षेत्र के लिए विकास की नई योजनाओं का एलान किया, बल्कि शासन-प्रशासन में सुधार लाने के लिए कड़े तेवर भी अपनाए हैं। सरकारी फाइलों में लेटलतीफी को रोकने और अतिक्रमण के खिलाफ उनकी जीरो टॉलरेंस की नीति आने वाले समय में बिहार के प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव के संकेत दे रही है।
जनता और जनसेवा
तारापुर में कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के बीच पहुँचकर मुख्यमंत्री ने ‘मन की बात’ का 133वां एपिसोड सुना। यह प्रधानमंत्री के साथ सीधे जुड़ने का एक तरीका है। उन्होंने वहां की जनसभा में कहा कि पहली बार विधायक बनने के बाद इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिलना जनता के आशीर्वाद का फल है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विकास कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि बिहार को प्रगति के पथ पर आगे ले जाने के लिए जो नींव रखी गई है, उसे और मजबूत बनाना ही उनका लक्ष्य है।
प्रशासनिक कार्यों की निगरानी
मुख्यमंत्री ने सरकारी कार्यालयों में चल रही सुस्ती पर कड़ा प्रहार किया है। अब ब्लॉक और अंचल स्तर के कामों पर सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की नजर रहेगी। शासन में पारदर्शिता लाने के लिए उन्होंने निम्नलिखित निर्देश जारी किए हैं:
- यदि किसी अधिकारी ने फाइल एक महीने से अधिक रोकी, तो होगी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई।
- काम में जानबूझकर देरी करना अब सीधे तौर पर भ्रष्टाचार माना जाएगा।
- प्रखंड, अंचल और थानों के कामकाज की नियमित समीक्षा होगी ताकि आम आदमी को दर-दर न भटकना पड़े।
अतिक्रमण पर कड़ा रुख
अतिक्रमण के मामले में मुख्यमंत्री ने अपने स्वयं के उदाहरण से एक नजीर पेश की है। उन्होंने बताया कि तारापुर में उनके निजी घर की सीढ़ियां भी सरकारी जमीन पर पाई गई थीं, जिसे हटाने के निर्देश उन्होंने खुद दिए हैं। यह संदेश स्पष्ट है कि कानून सबके लिए बराबर है। यदि मुख्यमंत्री के घर पर बुलडोजर चल सकता है, तो किसी भी अन्य प्रभावशाली व्यक्ति के लिए कोई रियायत नहीं बरती जाएगी। सरकारी भूमि को खाली कराना सरकार की प्राथमिकता में शामिल है।
पंचायत स्तर पर समाधान
जनता की समस्याओं का निपटारा अब कार्यालयों के चक्कर काटने से नहीं, बल्कि सीधे पंचायत स्तर पर होगा। इसके लिए मुख्यमंत्री ने ‘सहयोग कार्यक्रम’ की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- हर महीने पंचायत स्तर पर दो दिवसीय विशेष शिविर लगाए जाएंगे।
- शिविर में जिला और प्रखंड स्तर के अधिकारी मौजूद रहकर मौके पर ही शिकायतों का समाधान करेंगे।
- पेंशन, राशन कार्ड, भूमि नामांतरण (म्यूटेशन) और पुलिस संबंधी मामलों के लिए अलग से कोई भागदौड़ नहीं करनी होगी।
विकास और इको-टूरिज्म
अपने क्षेत्र के विकास के लिए उन्होंने 12.49 करोड़ रुपये की नई परियोजनाओं की सौगात दी है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण परियोजना ‘ढोल पहाड़ी’ का विकास है। इसे एक इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके पीछे का मुख्य उद्देश्य स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। जब कोई क्षेत्र पर्यटन के मानचित्र पर आता है, तो वहां की पूरी अर्थव्यवस्था में सुधार होता है और स्थानीय कला-संस्कृति को भी बढ़ावा मिलता है।
“जनता की सेवा ही मेरा धर्म है। जो अधिकारी जनता के काम में बाधा बनेंगे, उन्हें पद पर रहने का कोई हक नहीं है। पारदर्शिता और जवाबदेही ही सुशासन की पहचान है।” – सम्राट चौधरी
मुख्यमंत्री का यह दौरा न केवल तारापुर की जनता के लिए एक बड़ी राहत है, बल्कि राज्य के अन्य जिलों के लिए भी एक संदेश है कि काम में ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। डिजिटल युग में, जनता की शिकायतों का समाधान समयबद्ध तरीके से होना ही चाहिए। यदि ये नीतियां जमीनी स्तर पर इसी गति से लागू होती रहीं, तो निश्चित रूप से बिहार के प्रशासनिक तंत्र में एक बड़ा सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा।








