नई दिल्ली,अंग भारत। संसद भवन परिसर में गुरुवार को विपक्षी इंडी (I.N.D.I.A.) गठबंधन के सांसदों ने देश में लगातार हो रहे प्रश्नपत्र लीक मामलों, प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिसिया कार्रवाई और उन पर कथित तौर पर पैलेट गन चलाए जाने के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार युवाओं की आवाज को दबाने के लिए बल का प्रयोग कर रही है। इस प्रदर्शन के जरिए विपक्ष ने सीधे तौर पर गृह मंत्रालय और सरकार की नीतियों को कठघरे में खड़ा किया है। परीक्षाओं में हो रही धांधली ने देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य को संकट में डाल दिया है, जिसे लेकर संसद से सड़क तक गुस्सा फूट रहा है।
प्रदर्शन के मुख्य मुद्दे
संसद के मकर द्वार पर हुए इस प्रदर्शन के केंद्र में मुख्य रूप से तीन बड़े मुद्दे थे। पहला मुद्दा देश की प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने का है। इसने परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। दूसरा मुद्दा अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा की गई बर्बर कार्रवाई है। तीसरा और सबसे गंभीर मुद्दा है छात्रों के खिलाफ पैलेट गन का कथित इस्तेमाल। विपक्ष का कहना है कि अपराधियों की तरह छात्रों पर इस तरह के घातक हथियारों का इस्तेमाल किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता। युवाओं पर बल प्रयोग करने के बजाय सरकार को उनकी समस्याओं का समाधान ढूंढना चाहिए।
शामिल नेता और नारे
इस बड़े विरोध प्रदर्शन में इंडी गठबंधन के कई कद्दावर नेता और सांसद एकजुट नजर आए। इनमें कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, केसी वेणुगोपाल, समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव, शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत और कांग्रेस सांसद किशोरी लाल शर्मा मुख्य रूप से शामिल थे। सांसदों ने हाथों में बड़े-बड़े पोस्टर और बैनर ले रखे थे। प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने सरकार के खिलाफ “चढ़ावा चोर गद्दी छोड़” जैसे तीखे नारे लगाए। इसके साथ ही विपक्ष के हाथों में एक बड़ा पोस्टर भी था, जिस पर साफ शब्दों में लिखा था- ‘ऑर्डर किसने दिया’। यह सवाल सीधे तौर पर पुलिस कार्रवाई के जिम्मेदार अधिकारियों और सरकार की तरफ इशारा कर रहा था।
सरकार से सीधे सवाल
कांग्रेस के संगठन महासचिव और सांसद केसी वेणुगोपाल ने इस मुद्दे को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भी मजबूती से उठाया। उन्होंने सीधे देश के गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा। वेणुगोपाल ने पूछा कि गृह मंत्री इस गंभीर मामले पर देश और संसद को जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं। उन्होंने लिखा कि जब विपक्ष संसद भवन के मकर द्वार पर विरोध कर रहा है, तब गृह मंत्री संसद से गायब हैं। विपक्ष ने सरकार से मुख्य रूप से दो बड़े स्पष्टीकरण मांगे हैं:
- पहला, शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे निहत्थे छात्रों पर आखिर किसके आदेश पर पैलेट गन चलाई गई और इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
- दूसरा, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को इस बेहद संवेदनशील और युवाओं से जुड़े विषय पर बोलने से क्यों रोका गया?
छात्रों की आवाज दबाना
विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए कहा कि परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक ने पहले ही छात्रों को मानसिक तनाव में डाल दिया है। दिन-रात मेहनत करने वाले छात्रों का भरोसा इस व्यवस्था से उठ रहा है। जब ये छात्र अपने हक के लिए सड़कों पर उतरते हैं, तो सरकार सुरक्षा बलों के दम पर उनकी आवाज को दबाने की कोशिश करती है। पुलिसिया लाठीचार्ज और पैलेट गन का इस्तेमाल इस बात का प्रमाण है कि सरकार युवाओं से डरती है। देश के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ और उनकी लोकतांत्रिक आवाज को बंद करना देश के विकास को पीछे धकेलने जैसा है।
आगे की राह
इस विरोध प्रदर्शन के जरिए विपक्षी गठबंधन ने यह साफ कर दिया है कि वे इस मुद्दे को इतनी आसानी से ठंडा नहीं होने देंगे। परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखना और छात्रों को एक सुरक्षित व पारदर्शी माहौल देना किसी भी चुनी हुई सरकार की पहली जिम्मेदारी होती है। जब तक सरकार छात्रों पर हुई कार्रवाई और पेपर लीक के मुख्य आरोपियों के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाती, तब तक संसद के भीतर और बाहर यह आंदोलन जारी रहेगा। छात्रों पर हुई इस बर्बर कार्रवाई की एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होना समय की मांग है ताकि दोषियों को सजा मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।







