नई दिल्ली,अंग भारत। केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार और गांवों के विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से बड़ा फैसला लेते हुए ‘विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी VB-G Ram Ji Act 2025 लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है। यह नया कानून एक जुलाई 2026 से पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभावी होगा। इसके लागू होने के साथ ही महात्मा गाँधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट यानी मनरेगा अधिनियम-2005 को निरस्त माना जाएगा।
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अब 100 नहीं, 125 दिन रोजगार की गारंटी
सरकार के अनुसार नई योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में काम मांगने वाले लोगों को अब साल में 100 दिन की बजाय 125 दिन रोजगार की गारंटी दी जाएगी। एक जुलाई तक मनरेगा के सभी प्रावधान लागू रहेंगे और अधूरे कार्य उसी योजना के तहत पूरे किए जाएंगे। इसके बाद सभी काम नई व्यवस्था के अंतर्गत संचालित होंगे।केंद्रीय कृषि, किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह कानून ग्रामीण गरीबों, मजदूर परिवारों, महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आएगा। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि गांवों में रोजगार बढ़े, आय सुरक्षा मजबूत हो और टिकाऊ विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ें।
राज्यों को तैयारी के लिए मिलेगा समय
मंत्री ने बताया कि इस योजना को लागू करने के लिए राज्यों को अधिकतम छह महीने तक की तैयारी अवधि दी जाएगी। हालांकि, यदि कोई राज्य एक जुलाई तक पूरी तैयारी नहीं कर पाता है, तब भी उस राज्य में फंडिंग नई योजना के तहत ही जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि बदलाव के इस दौर में कोई भी मजदूर रोजगार से वंचित न रहे।
मजदूरों को सीधे खाते में मिलेगा भुगतान
सरकार ने योजना के लिए अपने बजट में 95 हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया है। वहीं राज्यों के योगदान को मिलाकर कुल राशि 1.51 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होगी। मजदूरों को भुगतान सीधे डीबीटी के जरिए बैंक या डाकघर खातों में भेजा जाएगा। सरकार का लक्ष्य तीन दिनों के भीतर भुगतान करना है, जबकि अधिकतम 15 दिन की समयसीमा तय की गई है।यदि तय समय के भीतर मजदूरी नहीं पहुंचती है, तो मजदूरों को विलंब भुगतान का मुआवजा मिलेगा। साथ ही काम मांगने के बावजूद रोजगार नहीं मिलने पर बेरोजगारी भत्ता भी दिया जाएगा।
गांवों में होंगे बड़े विकास कार्य
योजना के तहत जल संरक्षण, सड़क निर्माण, पुल-पुलिया, स्कूल भवन, आंगनवाड़ी केंद्र, खेतों से जुड़े विकास कार्य और ग्रामीण अधोसंरचना पर बड़े स्तर पर काम किए जाएंगे। स्वयं सहायता समूहों और एफपीओ के लिए वर्किंग शेड जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। बाढ़ और जलभराव वाले इलाकों में रिटेनिंग वॉल जैसे सुरक्षात्मक कार्य भी इस योजना का हिस्सा होंगे।सरकार ने प्रशासनिक खर्च की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दी है, ताकि योजना से जुड़े कर्मचारियों को समय पर और पर्याप्त भुगतान सुनिश्चित किया जा सके। मंत्री ने विश्वास जताया कि यह योजना विकसित गांव और विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूत आधार देगी।











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