बीजिंग,अंग भारत। शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप के बीच गुरुवार को बीजिंग में अहम द्विपक्षीय वार्ता की शुरुआत हुई। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के शीर्ष नेताओं की इस मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि यह बैठक आने वाले वर्षों में चीन और अमेरिका के संबंधों की दिशा तय कर सकती है।
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शी जिनपिंग बोले- नया अध्याय शुरू होने की उम्मीद
बीजिंग स्थित ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में आयोजित इस मुलाकात से पहले दोनों नेताओं ने शुरुआती संबोधन दिया। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वर्ष 2026 चीन-अमेरिका संबंधों में एक ऐतिहासिक और मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय एक नए मोड़ पर खड़ी है और ऐसे समय में दोनों देशों के बीच बेहतर संवाद बेहद जरूरी है।चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ और अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दोनों नेताओं ने गर्मजोशी के साथ एक-दूसरे का स्वागत किया। ट्रंप इस स्वागत से काफी उत्साहित नजर आए।
रेड कार्पेट स्वागत और सैन्य सम्मान
औपचारिक स्वागत समारोह के दौरान दोनों नेताओं ने अपने-अपने प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की। इसके बाद ट्रंप और शी रेड कार्पेट पर चलते हुए विशेष मंच तक पहुंचे, जहां लाल और सुनहरे रंग की भव्य सजावट की गई थी।समारोह में सैन्य बैंड ने दोनों देशों के राष्ट्रगान बजाए। वहीं तियानमेन चौक के पास तोपों की सलामी भी दी गई। दोनों नेताओं ने सैनिकों का निरीक्षण किया और समारोह में मौजूद बच्चों का अभिवादन किया। इस दौरान ट्रंप और शी जिनपिंग कई बार एक-दूसरे के हाथ पर हाथ रखकर मित्रता और स्नेह का संदेश देते नजर आए।
व्यापार, टेक्नोलॉजी और ताइवान पर चर्चा
दो दिनों तक चलने वाली इस बैठक में व्यापार, टेक्नोलॉजी, ताइवान और वैश्विक सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच चल रहे तनावपूर्ण मुद्दों पर इस वार्ता का असर लंबे समय तक दिखाई दे सकता है।विशेष रूप से ताइवान को लेकर चीन और अमेरिका के बीच लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं। इसके अलावा टेक्नोलॉजी सेक्टर में प्रतिस्पर्धा और व्यापारिक नीतियों को लेकर भी दोनों देशों के संबंधों में उतार-चढ़ाव देखा गया है।
ईरान और ऊर्जा संकट पर भी नजर
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजराइल के ईरान के साथ संभावित तनाव और उससे पैदा हो सकने वाले वैश्विक ऊर्जा संकट का मुद्दा भी इस यात्रा के दौरान प्रमुख बना हुआ है। माना जा रहा है कि ट्रंप, चीन से ईरान पर दबाव बनाने का आग्रह कर सकते हैं ताकि क्षेत्र में तनाव कम हो और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग को सुरक्षित रखा जा सके।अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के साथ इस दौरे पर कई बड़े उद्योगपति और शीर्ष अधिकारी भी पहुंचे हैं। इनमें एलन मस्क और टिम कुक प्रमुख रूप से शामिल हैं।










