पटना/सुपौल,अंग भारत। बिहार में मानसून के आगमन से पहले राज्य सरकार ने बाढ़ और सुखाड़ की संभावित स्थिति को देखते हुए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। हर वर्ष बाढ़ से प्रभावित होने वाले जिलों में इस बार पहले से सतर्कता बरती जा रही है। इसी क्रम में गुरुवार को राज्य स्तर पर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न विभागों की तैयारियों का विस्तृत आकलन किया गया।बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई, जिसमें राज्य के बाढ़ और सुखाड़ प्रभावित जिलों के अधिकारी शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने की। इस दौरान मौसम विभाग, जल संसाधन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, नगर विकास विभाग, कृषि विभाग, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग और पशु संसाधन विभाग सहित कई विभागों ने अपनी-अपनी तैयारियों की जानकारी दी।
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तटबंध, राहत शिविर और दवाइयों पर विशेष जोर
समीक्षा बैठक में सबसे अधिक ध्यान तटबंधों की मजबूती और राहत कार्यों की तैयारियों पर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि संवेदनशील इलाकों में तटबंधों की निगरानी बढ़ा दी गई है और जहां जरूरत है वहां मरम्मत कार्य तेजी से कराया जा रहा है।इसके अलावा संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविरों की तैयारी, दवाइयों की उपलब्धता, स्वच्छ पेयजल व्यवस्था और पशुओं के लिए चारे की आपूर्ति को लेकर भी विस्तृत चर्चा की गई। स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया गया कि किसी भी आपदा की स्थिति में मेडिकल टीम तुरंत सक्रिय हो सके, इसके लिए आवश्यक दवाओं और संसाधनों का पर्याप्त भंडारण रखा जाए।
मानसून से पहले सभी तैयारी पूरी करने का निर्देश
उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिया कि मानसून शुरू होने से पहले सभी सुरक्षात्मक और राहत संबंधी कार्य हर हाल में पूरे कर लिए जाएं। उन्होंने कहा कि आपदा की स्थिति में राहत और बचाव कार्यों में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।उन्होंने जिलों के अधिकारियों से कहा कि संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी की जाए और स्थानीय प्रशासन को पूरी तरह सतर्क रखा जाए। साथ ही लोगों को भी जागरूक करने और आपदा से बचाव संबंधी जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।
सुपौल प्रशासन अलर्ट मोड में
सुपौल जिला मुख्यालय से इस बैठक में जिलाधिकारी सावन कुमार, पुलिस अधीक्षक सरथ आर एस, उप विकास आयुक्त सारा असरफ समेत आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य और जल संसाधन विभाग के कई अधिकारी मौजूद रहे।बैठक के बाद सुपौल प्रशासन ने जिले के सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड में रहने का निर्देश जारी किया। अधिकारियों से कहा गया कि बाढ़ पूर्व तैयारियों की नियमित समीक्षा की जाए और सभी योजनाओं को समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए। प्रशासन का लक्ष्य है कि संभावित बाढ़ के दौरान जान-माल की क्षति को न्यूनतम रखा जा सके और प्रभावित लोगों को तुरंत राहत उपलब्ध कराई जा सके।राज्य सरकार की सक्रियता को देखते हुए माना जा रहा है कि इस बार मानसून के दौरान संभावित आपदा से निपटने के लिए प्रशासन पहले से अधिक सतर्क और तैयार नजर आ रहा है।











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