गुवाहाटी,अंग भारत। असम विधानसभा के सोलहवें सत्र की शुरुआत आज से होने जा रही है। राज्य की राजनीति के लिहाज से यह सत्र काफी अहम माना जा रहा है। पहले ही दिन विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए चुनाव होगा और मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व वाली सरकार सदन में अपना बहुमत भी साबित करेगी। साथ ही सरकार समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक भी पेश करने जा रही है, जिसको लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
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यूसीसी विधेयक पर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने
यूसीसी विधेयक को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विधानसभा में मौजूद मुस्लिम विधायक इस विधेयक का विरोध करने की तैयारी में हैं। सदन में कुल 22 विपक्षी विधायकों में से 20 विधायक मुस्लिम समुदाय से जुड़े बताए जा रहे हैं। ऐसे में विधानसभा के भीतर जोरदार हंगामे और तीखी बहस की संभावना जताई जा रही है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकार इस विधेयक को अपनी बड़ी राजनीतिक पहल के तौर पर पेश कर रही है, जबकि विपक्ष इसे सामाजिक और धार्मिक मुद्दों से जोड़कर जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है।
रंजीत दास के नामांकन से तेज हुई सियासत
बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए विधायक रंजीत दास के समर्थन में एनडीए प्रतिनिधिमंडल ने नामांकन पत्र दाखिल किया। मंत्री अतुल बोरा, चंद्रमोहन पटवारी, विधायक पीयूष हजारिका, केशव महंत और मानव डेका ने संयुक्त रूप से उनका नामांकन प्रस्तुत किया। विधानसभा में एनडीए के पास स्पष्ट बहुमत होने के कारण रंजीत दास की जीत लगभग तय मानी जा रही है।इससे पहले वरिष्ठ भाजपा नेता चंद्रमोहन पटवारी ने राज्यपाल के समक्ष प्रोटेम स्पीकर के रूप में शपथ ग्रहण की। उनके नेतृत्व में विधानसभा की प्रारंभिक कार्यवाही और अध्यक्ष चुनाव की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।
नेता प्रतिपक्ष को लेकर भी बढ़ी राजनीतिक हलचल
इधर, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। चर्चा है कि स्वतंत्रता के बाद पहली बार असम विधानसभा में “मियां” समुदाय से किसी नेता को विपक्ष का नेता बनाया जा सकता है। कांग्रेस विधायक वाजेद अली चौधरी का नाम इस पद के लिए सबसे आगे माना जा रहा है।यदि ऐसा होता है तो इसे असम की राजनीति में बड़ा सामाजिक और राजनीतिक बदलाव माना जाएगा। इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई है।राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यूसीसी विधेयक, बहुमत परीक्षण और नेता प्रतिपक्ष के चयन जैसे मुद्दों के कारण इस बार का विधानसभा सत्र काफी हंगामेदार रहने वाला है। आने वाले दिनों में सदन के भीतर तीखे आरोप-प्रत्यारोप और जोरदार राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती है।










