रांची,अंग भारत। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रांची के लोक भवन स्थित बिरसा मंडप में एक भव्य सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार की उपस्थिति में कुल 253 लोगों ने एक साथ योगासन किए। इस कार्यक्रम की मुख्य विशेषता यह रही कि इसमें लोक भवन परिवार के सदस्यों के साथ-साथ शहर के स्कूली बच्चों ने भी पूरी ऊर्जा के साथ भाग लिया। योग के इस सामूहिक अभ्यास ने न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाई, बल्कि समाज में एकजुटता का संदेश भी दिया।
योग का वैश्विक महत्व
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने इस अवसर पर योग को भारत की तरफ से पूरी दुनिया को मिला एक अनमोल उपहार बताया। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि योग का अर्थ केवल कुछ शारीरिक आसन करना नहीं है। यह असल में एक ऐसी जीवनशैली है, जो व्यक्ति के मन, शरीर और आत्मा के बीच एक गहरा सामंजस्य स्थापित करती है। जब हम नियमित योगाभ्यास करते हैं, तो हमारे भीतर अनुशासन और सकारात्मकता का संचार होता है, जो आज के भागदौड़ भरे युग में बहुत जरूरी है।
2014 से बदली तस्वीर
भारत की सांस्कृतिक विरासत को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका को राज्यपाल ने रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि किस तरह वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित करना भारत के लिए गर्व की बात थी। यह निर्णय न केवल भारत की प्राचीन परंपरा को मान्यता देता है, बल्कि वैश्विक कल्याण के लिए भारत की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। राज्यपाल ने साल 2019 में रांची में हुए अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के भव्य आयोजन को भी याद किया, जिसमें प्रधानमंत्री ने स्वयं भाग लिया था।
तनाव मुक्त जीवन की कुंजी
आज के दौर में हर व्यक्ति कहीं न कहीं मानसिक तनाव से जूझ रहा है। इस संबंध में राज्यपाल ने कहा कि योग ही वह एकमात्र प्राकृतिक उपचार है, जो व्यक्ति को मानसिक शांति दे सकता है। विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के दौरान, दुनिया ने यह महसूस किया कि यदि आपकी शारीरिक और मानसिक रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है, तो आप कठिन परिस्थितियों का भी सामना कर सकते हैं।
- तनाव को कम करने के लिए प्राणायाम का अभ्यास।
- नियमित योगासनों से मांसपेशियों में लचीलापन।
- आत्मविश्वास और धैर्य में उल्लेखनीय वृद्धि।
- बेहतर नींद और बेहतर पाचन तंत्र।
विद्यार्थियों के लिए योग
कार्यक्रम में स्कूली बच्चों की भागीदारी को देखकर राज्यपाल ने काफी उत्साह व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि छात्र जीवन में एकाग्रता सबसे बड़ा धन है। योग करने से बच्चों का मन भटकता नहीं है और उनकी याददाश्त क्षमता में सुधार होता है। योग का अनुशासन उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने में मदद करता है।
दैनिक दिनचर्या में शामिल करें
“स्वस्थ व्यक्ति ही स्वस्थ समाज की नींव रखता है। इसलिए योग को महज एक दिन के उत्सव तक सीमित न रखकर इसे अपनी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाना चाहिए।” – संतोष कुमार गंगवार, राज्यपाल, झारखंड।
राज्यपाल ने जनता से आग्रह किया कि वे योग को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं। इस कार्यक्रम में शामिल हुए 253 लोगों ने स्वस्थ जीवन जीने की शपथ ली। यह संकल्प ही आने वाले समय में एक सशक्त और ऊर्जावान राष्ट्र बनाने की दिशा में एक छोटा लेकिन अत्यंत प्रभावी कदम है। योग केवल एक शारीरिक प्रक्रिया नहीं है, यह स्वयं को बेहतर बनाने की एक निरंतर यात्रा है जिसे हर भारतीय को अपनाना चाहिए।








