नई दिल्ली,अंग भारत। कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने पंजाब कांग्रेस में विधानसभा चुनाव समिति की सूची को लेकर सामने आई असंतोष की खबरों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है, जहां हर नेता और कार्यकर्ता को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। किसी नेता या समर्थक द्वारा अपनी राय रखना असंतोष का संकेत नहीं माना जाना चाहिए।नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस में विचारों को दबाने की परंपरा नहीं है। पार्टी के भीतर खुलकर चर्चा होती है और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।
‘कांग्रेस में सभी को अपनी बात कहने की आजादी’
जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस के पास कई अनुभवी और जनाधार वाले नेता हैं। स्वाभाविक है कि उनके समर्थक अपने-अपने नेताओं के पक्ष में खुलकर राय रखें। कई बार यही बातें मीडिया में असंतोष या विवाद के रूप में पेश कर दी जाती हैं, जबकि वास्तविक स्थिति इससे अलग होती है।उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक दल में अलग-अलग विचार होना सामान्य बात है। कांग्रेस में सभी को सम्मान के साथ अपनी बात रखने का अवसर मिलता है और यही पार्टी की लोकतांत्रिक संस्कृति की पहचान है।
पंजाब में कांग्रेस की वापसी का दावा
जयराम रमेश ने विश्वास जताया कि पंजाब में कांग्रेस एक बार फिर मजबूत स्थिति में लौट रही है। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता मौजूदा सरकार से निराश है और बदलाव चाहती है।उनका कहना था कि कांग्रेस लगातार लोगों के बीच काम कर रही है और आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी को जनता का व्यापक समर्थन मिलेगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस संगठन को मजबूत करने और चुनाव की तैयारी में पूरी गंभीरता से जुटी हुई है।
परिसीमन के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर निशाना
लोकसभा सीटों के परिसीमन और संभावित संवैधानिक संशोधन के मुद्दे पर भी जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ऐसे किसी भी कदम का विरोध करेगी, जिससे देश के लोकतांत्रिक और संघीय ढांचे पर असर पड़े।उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार संसद में जरूरी संख्या जुटाने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों में विभाजन कराने की कोशिश कर रही है। उनका कहना था कि पहले भी परिसीमन से जुड़े संवैधानिक संशोधन को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाया था और अब सरकार दोबारा इस दिशा में प्रयास कर सकती है।उन्होंने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए क्षेत्रीय दलों को कमजोर करने की कोशिश लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।
मतदाता सूची पर निर्वाचन आयोग से सवाल
कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भी कांग्रेस महासचिव ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।उन्होंने कहा कि कांग्रेस मतदाता सूची को अद्यतन करने के खिलाफ नहीं है, लेकिन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए। उनका आरोप था कि निर्वाचन आयोग की कार्यशैली निष्पक्ष नहीं दिखाई दे रही है।उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने कर्नाटक के सभी विधायकों के साथ बैठक की है और पार्टी यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से न हटे। उन्होंने कहा कि बिहार जैसी स्थिति कर्नाटक में नहीं बनने दी जाएगी।
राम मंदिर चढ़ावा मामले में जांच की मांग दोहराई
जयराम रमेश ने राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में भी अपनी पार्टी की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की जांच उच्चतम न्यायालय के किसी वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में कराई जानी चाहिए।उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री को इस मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि लोगों के बीच किसी तरह का भ्रम न रहे।
ऑपरेशन सिंदूर पर भी सरकार को घेरा
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर संसद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान पर कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल द्वारा दिए गए विशेषाधिकार हनन नोटिस का भी जयराम रमेश ने समर्थन किया।उन्होंने कहा कि अब इस मामले में निर्णय लेना लोकसभा अध्यक्ष का अधिकार है और उन्हें उचित कार्रवाई करनी चाहिए।कांग्रेस महासचिव ने कहा कि पार्टी हर उस मुद्दे को मजबूती से उठाती रहेगी, जो लोकतंत्र, संविधान और जनता के अधिकारों से जुड़ा है। उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस के भीतर लोकतांत्रिक माहौल है और पार्टी पूरी मजबूती के साथ आगामी राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है।










