तेहरान,अंग भारत। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने दुनिया भर के मुस्लिम देशों से एकजुट होकर काम करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में इस्लामी देशों के बीच एकता पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गई है। राष्ट्रपति का कहना था कि अगर मुस्लिम देश मिलकर आगे बढ़ें तो क्षेत्र में शांति और स्थिरता स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।तेहरान में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई का संदेश आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने कहा कि न्याय, सम्मान, आजादी और प्रतिरोध की सोच किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं होती, बल्कि समय के साथ और मजबूत होती जाती है।
सम्मेलन में दिया एकता का संदेश
राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने “इमाम खामेनेई : प्रतिरोध के अमर नेता” विषय पर आयोजित सम्मेलन में देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सम्मेलन मुस्लिम देशों के बीच आपसी सहयोग और भाईचारे को मजबूत करने में मदद करेगा।उन्होंने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में हिंसा, आतंकवाद और संघर्ष जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। ऐसे समय में इस्लामी देशों को आपसी मतभेद भुलाकर एक साथ खड़ा होना चाहिए।
खामेनेई के विचारों को बताया प्रेरणादायक
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने अयातुल्ला अली खामेनेई को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका मार्गदर्शन केवल ईरान तक सीमित नहीं था, बल्कि दुनिया के कई देशों के लोगों को भी प्रेरित करता रहा है।उन्होंने कहा कि किसी महान नेता का निधन उसके विचारों का अंत नहीं होता। उनके सिद्धांत और संदेश हमेशा जीवित रहते हैं और नई पीढ़ियों को सही दिशा दिखाते हैं।राष्ट्रपति ने कहा कि खामेनेई ने एकता, सम्मान, आजादी और प्रतिरोध का जो संदेश दिया, वह आज भी दुनिया के अलग-अलग देशों और समुदायों में गूंज रहा है।
राजनीतिक नहीं, रणनीतिक जरूरत है एकता
मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि इस्लामी एकता केवल राजनीतिक नारा नहीं है, बल्कि समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने कहा कि सभी मुसलमानों का ईश्वर एक है, पैगंबर एक हैं और पवित्र ग्रंथ भी एक ही है। ऐसे में सांप्रदायिक और राजनीतिक मतभेदों को आपसी रिश्तों के बीच नहीं आने देना चाहिए।उन्होंने कहा कि भाईचारा, सहयोग और मेल-मिलाप इस्लामी समाज की सबसे बड़ी ताकत रहे हैं। इतिहास भी इस बात का गवाह है कि जब-जब मुस्लिम देश एकजुट हुए हैं, तब-तब उन्होंने बड़ी चुनौतियों का सामना मजबूती से किया है।
गाजा और फिलिस्तीन का भी किया जिक्र
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में गाजा, लेबनान और फिलिस्तीन की स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अगर मुस्लिम देश एक साथ खड़े हों तो इन क्षेत्रों में लंबे समय से जारी संघर्ष और मानवीय संकट को कम करने में मदद मिल सकती है।उन्होंने कहा कि इस्लामी देशों के बीच बंटवारा बाहरी शक्तियों को फायदा पहुंचाता है। इसलिए सभी देशों को मिलकर क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम करने के लिए काम करना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं पर उठाए सवाल
ईरानी राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में इजराइल की कार्रवाई और उसे अमेरिका के समर्थन की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में वैज्ञानिकों, बुद्धिजीवियों और अन्य प्रभावशाली लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मानवाधिकारों की रक्षा का दावा करने वाले कई संगठन ऐसी घटनाओं पर प्रभावी कदम उठाने में सफल नहीं रहे हैं।
शांति और सहयोग का दोहराया संकल्प
अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान क्षेत्र में शांति, न्याय और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आपसी सम्मान, संवाद और एकजुटता के जरिए ही क्षेत्र की समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है।उन्होंने मुस्लिम देशों से अपील की कि वे मतभेदों को पीछे छोड़कर साझा हितों पर काम करें। राष्ट्रपति का कहना था कि मजबूत सहयोग और आपसी विश्वास से ही क्षेत्र में स्थिरता आएगी और भविष्य की चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना किया जा सकेगा।










