गुवाहाटी,अंग भारत। भारत की अध्यक्षता में 6 और 7 जुलाई को असम की राजधानी गुवाहाटी में ब्रिक्स देशों की मादक पदार्थ निरोधक एजेंसियों के प्रमुखों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होगी। इस बैठक में ब्रिक्स के सभी सदस्य देशों की मादक पदार्थ नियंत्रण एजेंसियों के प्रमुख और वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा लेंगे। बैठक का मुख्य उद्देश्य नशीले पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने के लिए आपसी सहयोग को मजबूत करना और साझा रणनीति तैयार करना है।भारत इस बैठक को केवल औपचारिक चर्चा तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि इसे ऐसे मंच के रूप में देख रहा है जहां सदस्य देश मिलकर ठोस फैसले लें और मादक पदार्थों के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करें।
तस्करी के नए तरीकों पर होगी चर्चा
पिछले कुछ वर्षों में मादक पदार्थों की तस्करी के तरीके तेजी से बदले हैं। अब तस्कर केवल पारंपरिक रास्तों का इस्तेमाल नहीं कर रहे, बल्कि सिंथेटिक ड्रग्स, न्यू साइकोएक्टिव सब्सटेंस (एनपीएस), डार्कनेट और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवैध कारोबार को बढ़ावा दे रहे हैं।इन नई चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक, डेटा एनालिटिक्स और वित्तीय खुफिया तंत्र की भूमिका भी लगातार बढ़ रही है। बैठक में इन सभी विषयों पर विस्तार से चर्चा होगी ताकि सदस्य देश नई चुनौतियों का मिलकर सामना कर सकें।
ऑपरेशनल सहयोग पर रहेगा जोर
बैठक के दौरान सदस्य देशों के बीच खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान, संयुक्त कार्रवाई, क्षमता निर्माण और नई तकनीकों के इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया जाएगा।भारत चाहता है कि ब्रिक्स देशों के बीच केवल बातचीत ही न हो, बल्कि जमीनी स्तर पर भी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बने। इसके लिए संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम, विशेषज्ञों का आदान-प्रदान और तस्करी से जुड़े मामलों में तेजी से सूचना साझा करने जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर विचार किया जाएगा।
भारत बताएगा अपनी रणनीति
यह बैठक भारत के लिए अपने मादक पदार्थ विरोधी अभियान को दुनिया के सामने रखने का भी बड़ा अवसर होगी। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने नशे के कारोबार और उससे जुड़े संगठित अपराध के खिलाफ अभियान तेज किया है।सरकार लगातार मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। इसके साथ ही लोगों को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। नशे की लत से प्रभावित लोगों के इलाज और पुनर्वास पर भी सरकार विशेष ध्यान दे रही है।हाल ही में भारत ने “मादक पदार्थ नियंत्रण पर विज़न डॉक्यूमेंट 2026-2029” जारी किया है। इस दस्तावेज का उद्देश्य देश में मादक पदार्थों के खिलाफ लड़ाई को और अधिक मजबूत बनाना तथा संबंधित संस्थाओं की क्षमता बढ़ाना है।
नई चुनौतियों पर बनेगी साझा रणनीति
ब्रिक्स देशों की इस बैठक में गुप्त प्रयोगशालाओं में तैयार किए जा रहे सिंथेटिक ड्रग्स, इनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की निगरानी और फार्मास्यूटिकल उत्पादों के दुरुपयोग जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होगी।इसके अलावा तस्करी से जुड़ी खुफिया जानकारी साझा करने, बेहतर जांच तकनीक अपनाने, संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने और विशेषज्ञों के नियमित आदान-प्रदान जैसे प्रस्तावों पर भी विचार किया जाएगा। भारत का मानना है कि इन उपायों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
संयुक्त घोषणा-पत्र के साथ होगा समापन
दो दिनों तक चलने वाली इस बैठक का समापन संयुक्त घोषणा-पत्र के साथ होगा। इसमें भविष्य में आपसी सहयोग बढ़ाने, साझा अभियान चलाने और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ मिलकर काम करने का रोडमैप तय किया जाएगा।भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता का विषय “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” रखा गया है। इसी सोच के तहत भारत सदस्य देशों के बीच सहयोग को नई दिशा देने की कोशिश कर रहा है।ब्रिक्स आज दुनिया की 11 प्रमुख उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। इसमें ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका के अलावा मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात भी शामिल हैं। यह समूह वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच सहयोग और समन्वय का प्रमुख मंच माना जाता है। गुवाहाटी में होने वाली यह बैठक भी इसी दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।










