तेहरान,अंग भारत। ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़ी रस्में जारी हैं। रविवार को तेहरान में आयोजित प्रार्थना सभा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इस दौरान खामेनेई के तीन बेटे मसूद, मुस्तफा और मेसम मौजूद रहे, लेकिन उनके उत्तराधिकारी और पुत्र मोजतबा खामेनेई कहीं नजर नहीं आए। उनकी गैरमौजूदगी के बाद एक बार फिर अटकलों का दौर तेज हो गया है।
मोजतबा की गैरमौजूदगी बनी चर्चा का विषय
खामेनेई के निधन के बाद से दुनिया की नजर उनके उत्तराधिकारी मोजतबा खामेनेई पर टिकी हुई है। माना जा रहा था कि वह अंतिम प्रार्थना सभा में पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आ सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। रिपोर्टों के मुताबिक, 28 फरवरी को हुए हमले में मोजतबा भी घायल हुए थे और तब से उन्होंने कोई सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं किया है।ईरान में उनकी सुरक्षा को लेकर भी लगातार चर्चा हो रही है। इसी वजह से उनके सार्वजनिक कार्यक्रमों को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
प्रार्थना सभा में जुटी बड़ी संख्या में भीड़
तेहरान के ग्रैंड मोसाला परिसर में आयोजित प्रार्थना सभा का नेतृत्व प्रमुख शिया धर्मगुरु जाफर सोभानी ने किया। इस मौके पर ईरान के कई वरिष्ठ नेता, सैन्य अधिकारी और बड़ी संख्या में आम लोग मौजूद रहे।रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रमुख अहमद वाहिदी भी प्रार्थना सभा में शामिल हुए। उम्मीद थी कि उनके साथ मोजतबा खामेनेई भी पहुंचेंगे, लेकिन वह कार्यक्रम में नहीं आए। सुरक्षा व्यवस्था के बीच लोगों ने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की।
अंतिम दर्शन के लिए रखा गया पार्थिव शरीर
अयातुल्ला अली खामेनेई के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए तेहरान में रखा गया है। उनके ताबूत के साथ उन चार परिजनों के ताबूत भी रखे गए हैं, जिनकी मौत फरवरी में हुए हमलों में हुई थी।ईरान सरकार ने रविवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया, ताकि अधिक से अधिक लोग अंतिम दर्शन कर सकें। राजधानी तेहरान में शोक जुलूस भी निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया।
आगे का कार्यक्रम तय
अंतिम संस्कार की रस्मों के तहत खामेनेई के पार्थिव शरीर को मंगलवार को कोम ले जाया जाएगा। इसके बाद बुधवार को इराक और फिर गुरुवार को उनके पैतृक शहर मशहद में दफनाया जाएगा।माना जा रहा है कि मशहद में होने वाले अंतिम कार्यक्रम के दौरान मोजतबा खामेनेई पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आ सकते हैं। हालांकि इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
डेढ़ करोड़ लोगों के शामिल होने का अनुमान
ईरान की अर्ध-सरकारी तस्नीम समाचार एजेंसी के मुताबिक, स्वास्थ्य मंत्रालय ने अनुमान जताया है कि अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया में करीब 1.5 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं।इसको देखते हुए तेहरान, कोम और मशहद में विशेष तैयारियां की गई हैं। तेहरान के इमाम खुमैनी ग्रैंड मोसाला के आसपास अस्थायी अस्पताल बनाए गए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को तुरंत चिकित्सा सुविधा मिल सके। सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को भी पहले से अधिक मजबूत किया गया है।
चार दशक तक रहा प्रभाव
1939 में मशहद में जन्मे अयातुल्ला अली खामेनेई कम उम्र में ही शिया धर्मगुरु बन गए थे।उन्होंने ईरान के तत्कालीन शाह मोहम्मद रजा पहलवी के खिलाफ आंदोलन में हिस्सा लिया और इसके चलते जेल भी गए।1981 में उन पर जानलेवा हमला हुआ था, जिसमें उनका दाहिना हाथ हमेशा के लिए प्रभावित हो गया। इसके बाद वह राष्ट्रपति बने और 1989 में अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी के निधन के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता बने।करीब चार दशक तक उन्होंने ईरान की राजनीति, विदेश नीति और सुरक्षा व्यवस्था में अहम भूमिका निभाई। अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रति उनका रुख हमेशा सख्त माना जाता रहा। उनके निधन के बाद अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि नए नेतृत्व में ईरान किस दिशा में आगे बढ़ता है।










