पटना,अंग भारत। बिहार में जिन परिवारों का राशन कार्ड अब तक नहीं बना है, उनके लिए सरकार ने एक बड़ी राहत दी है। बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के साथ समीक्षा बैठक कर स्पष्ट कर दिया है कि आगामी 13 अगस्त तक राज्य के सभी पात्र परिवारों के लिए 11 लाख से अधिक नए राशन कार्ड हर हाल में बनकर तैयार हो जाने चाहिए। अधिकारियों को सीधी चेतावनी दी गई है कि इस काम में किसी भी प्रकार की कोताही या सुस्ती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार का मुख्य मकसद यह है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत राज्य का कोई भी गरीब और योग्य परिवार सरकारी अनाज से वंचित न रह जाए।
राशन कार्ड सिर्फ एक सरकारी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह गरीब परिवारों के लिए सम्मान से जीने और पेट भरने की गारंटी है। बिहार जैसे राज्य में, जहां एक बड़ी आबादी दैनिक मजदूरी और कृषि पर निर्भर है, वहां हर महीने मिलने वाला सस्ता या मुफ्त अनाज घर का चूल्हा जलाने में सबसे बड़ी मदद करता है। अमूमन देखा जाता है कि लोग ब्लॉक और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर परेशान हो जाते हैं, लेकिन उनका कार्ड नहीं बन पाता। मुख्य सचिव की यह सख्त चेतावनी सीधे तौर पर इसी प्रशासनिक सुस्ती पर करारा प्रहार है। सरकार ने इसके लिए रोजाना का काम तय कर दिया है, ताकि हर शाम को प्रगति की रिपोर्ट ली जा सके।
मिशन मोड में राशन कार्ड
अब यह अभियान केवल सरकारी फाइलों तक सीमित नहीं रहेगा। बिहार सरकार ने तय किया है कि पूरे राज्य में हर दिन 36,814 नए राशन कार्ड जारी किए जाएंगे। इस विशाल लक्ष्य को हासिल करने के लिए ब्लॉक स्तर से लेकर जिला मुख्यालय तक के अधिकारियों को युद्ध स्तर पर काम करना होगा। इस मिशन को समय पर पूरा करने के लिए सरकार ने जिलावार लक्ष्य तय किए हैं, ताकि किसी भी स्तर पर काम न अटके।
किस जिले को क्या लक्ष्य
बिहार के अलग-अलग जिलों में पेंडिंग आवेदनों और स्थानीय आबादी की जरूरत के आधार पर अलग-अलग लक्ष्य बांटे गए हैं। सबसे ज्यादा काम उन जिलों में होना है जहां आबादी अधिक है और पेंडिंग मामलों की सूची बहुत लंबी है।
| जिला | कुल कार्ड का लक्ष्य | दैनिक कार्ड बनाने का लक्ष्य |
|---|---|---|
| पटना | 1,18,649 | 3,955 |
| वैशाली | 1,03,704 | 3,457 |
| मुजफ्फरपुर | 86,175 | 2,873 |
| अरवल | 2,180 | 73 |
पटना और वैशाली सबसे आगे
आंकड़े बताते हैं कि पटना जिले पर सबसे भारी जिम्मेदारी है। पटना में कुल 1.18 लाख से ज्यादा राशन कार्ड बनने हैं, जिसके लिए रोजाना लगभग 4 हजार कार्ड बनाने होंगे। वैशाली और मुजफ्फरपुर भी इस सूची में बहुत आगे हैं। इन बड़े जिलों में काम की गति बहुत मायने रखती है क्योंकि यहां से आने वाली शिकायतें भी सबसे ज्यादा होती हैं। इसलिए इन जिलों के जिलाधिकारियों को सीधे तौर पर इस अभियान की कमान संभालने को कहा गया है।
छोटे जिलों में तेजी
जिन जिलों में काम का बोझ बहुत कम है, जैसे कि अरवल, वहां केवल 2,180 नए कार्ड बनाने हैं। मुख्य सचिव ने साफ निर्देश दिया है कि अरवल, बक्सर और जहानाबाद जैसे जिले अपने छोटे लक्ष्यों को जल्द से जल्द पूरा कर लें। छोटे जिले अगर समय से पहले अपना काम खत्म करेंगे, तो वहां के मानव संसाधन का उपयोग दूसरे बड़े जिलों के बैकअप के लिए किया जा सकेगा।
कैसे होगा त्वरित सत्यापन
राशन कार्ड बनने की प्रक्रिया में सबसे बड़ी बाधा भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के दौरान आती है। अक्सर कर्मचारी समय पर आवेदकों के पते पर नहीं पहुंचते या कागजी दस्तावेजों में कमियां निकालकर फाइल को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं। इस बार इस समस्या से निपटने के लिए कई बड़े बदलाव किए जा रहे हैं:
- डिजिटल जांच में तेजी: ब्लॉक स्तर पर आईटी सहायकों को सक्रिय किया गया है ताकि ऑनलाइन आए आवेदनों के दस्तावेजों की तुरंत जांच हो सके।
- पारदर्शिता पर जोर: केवल उन्हीं लोगों को कार्ड मिलेगा जो वास्तव में इसके हकदार हैं। अपात्र लोगों को बाहर रखने के लिए कड़े मानक अपनाए जा रहे हैं।
- फीडबैक और सुधार: अगर किसी आवेदक का फॉर्म रिजेक्ट होता है, तो उसका स्पष्ट कारण बताना होगा ताकि लोग दोबारा सही आवेदन कर सकें।
बिचौलियों पर लगेगी लगाम
राशन कार्ड बनवाने के नाम पर ब्लॉक परिसरों में सक्रिय रहने वाले दलाल अक्सर गरीब लोगों से पैसे ऐंठते हैं। इस सख्त अभियान से ऐसे बिचौलियों का धंधा बंद होने वाला है। जब सीधे मुख्य सचिव स्तर से मॉनिटरिंग हो रही है और दैनिक प्रगति देखी जा रही है, तो कर्मचारियों के पास फाइल दबाकर बैठने का कोई बहाना नहीं बचेगा। प्रशासन सीधे योग्य लोगों के पते पर सत्यापन करेगा, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
“सरकार का लक्ष्य केवल आंकड़े छूना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को बिना किसी परेशानी के उसका अधिकार मिले।”
लापरवाही पर सख्त कार्रवाई
सरकारी दफ्तरों में ‘कल करेंगे’ वाली मानसिकता अब नहीं चलने वाली है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत के कड़े तेवर से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कह दिया है कि 13 अगस्त कोई आम तारीख नहीं है, बल्कि यह लक्ष्मण रेखा है। अगर किसी भी जिले में दैनिक लक्ष्य हासिल करने में लापरवाही दिखी, तो वहां के संबंधित आपूर्ति पदाधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ सीधे अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
बिहार की जन वितरण प्रणाली (PDS) को मजबूत करने के लिए यह एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है। जब हर योग्य परिवार के हाथ में राशन कार्ड होगा, तभी राशन की कालाबाजारी रुकेगी और सरकारी अनाज सीधे थाली तक पहुंचेगा। अब देखना यह है कि सरकारी अमला इस बड़ी चुनौती को तय समय में कैसे पूरा करता है।








