सुपौल,अंग भारत। बिहार में शराबबंदी लागू है, लेकिन शराब तस्कर नए-नए तरीके अपनाकर शराब की खेप राज्य के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने की कोशिश में लगे हुए हैं। इस बार तस्करों ने ट्रेन का सहारा लिया, लेकिन उनकी चालाकी ज्यादा देर तक नहीं चल सकी। सोमवार को सुपौल रेलवे स्टेशन पर उत्पाद एवं मद्यनिषेध विभाग और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की संयुक्त कार्रवाई में वैशाली एक्सप्रेस से करीब 220 लीटर विदेशी शराब और बीयर बरामद की गई। इस दौरान दो तस्करों को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
गुप्त सूचना मिलते ही हरकत में आई टीम
उत्पाद अधीक्षक अशोक कुमार को सूचना मिली थी कि ललितग्राम से सहरसा की ओर जा रही वैशाली एक्सप्रेस (15566) के जरिए भारी मात्रा में शराब ले जाई जा रही है। सूचना मिलते ही उत्पाद विभाग और आरपीएफ की टीम ने तुरंत योजना बनाई और ट्रेन के सुपौल स्टेशन पहुंचने का इंतजार किया।जैसे ही ट्रेन प्लेटफॉर्म पर रुकी, अधिकारियों ने बिना समय गंवाए बी-04 और बी-05 कोच में सघन जांच शुरू कर दी। जांच के दौरान यात्रियों के सामान के बीच कुछ बोरे और बैग संदिग्ध हालत में मिले।
बोरों और बैग में भरी थी शराब की बोतलें
जब अधिकारियों ने 9 बोरे और 3 पीठू बैग खोलकर देखे तो उसमें बड़ी संख्या में विदेशी शराब और बीयर की बोतलें मिलीं। सभी बोतलों की गिनती करने पर 209.250 लीटर विदेशी शराब और 10.500 लीटर बीयर बरामद हुई। कुल मिलाकर 219.750 लीटर शराब और बीयर जब्त की गई।अधिकारियों के मुताबिक जब्त शराब की कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है। पूरी खेप को जब्त कर उत्पाद विभाग ने अपने कब्जे में ले लिया है।
दो तस्कर मौके से दबोचे गए
कार्रवाई के दौरान पुलिस और उत्पाद विभाग ने दो लोगों को मौके से गिरफ्तार कर लिया। उनकी पहचान अभिनाश कुमार चौधरी उर्फ फेंटा और बिनीत कुमार के रूप में हुई है। दोनों सहरसा जिले के कहरा थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं।दोनों आरोपितों से पूछताछ की जा रही है। अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि शराब कहां से लाई गई थी, किसके कहने पर ले जाई जा रही थी और आखिर इसे किस जगह पहुंचाना था।
पूरे नेटवर्क की होगी जांच
उत्पाद अधीक्षक अशोक कुमार ने बताया कि शुरुआती जांच में ऐसा लग रहा है कि इसके पीछे संगठित तस्करी का नेटवर्क काम कर रहा है। इसलिए सिर्फ गिरफ्तार आरोपितों तक जांच सीमित नहीं रहेगी। पूछताछ में जिन लोगों के नाम सामने आएंगे, उन सभी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।उन्होंने कहा कि शराब तस्कर अब सिर्फ सड़क ही नहीं, बल्कि रेल मार्ग का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी वजह से रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों पर लगातार निगरानी बढ़ाई जा रही है। गुप्त सूचनाओं के आधार पर समय-समय पर ऐसे अभियान चलाए जाएंगे।
शराबबंदी कानून के तहत होगी कार्रवाई
गिरफ्तार दोनों आरोपितों के खिलाफ बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई के लिए भेजा जाएगा। जब्त शराब को भी विभाग ने अपने कब्जे में लेकर कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अधिकारियों की सतर्कता से नाकाम हुई तस्करी
इस पूरे अभियान में मद्यनिषेध निरीक्षक प्रभुनाथ सिंह, संजय प्रियदर्शी, कुश कुमार, अवर निरीक्षक विष्णुदेव यादव, विशाल कुमार, मद्यनिषेध सिपाही अभिषेक कुमार तथा आरपीएफ सहरसा के निरीक्षक धनंजय कुमार समेत आरपीएफ और उत्पाद विभाग की संयुक्त टीम शामिल रही। अधिकारियों की सतर्कता की वजह से शराब की बड़ी खेप अपने गंतव्य तक पहुंचने से पहले ही पकड़ ली गई।गौरतलब है कि बिहार में वर्ष 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है। इसके बावजूद सीमावर्ती इलाकों और रेल मार्ग के जरिए शराब तस्करी की कोशिशें लगातार सामने आती रहती हैं। सुपौल नेपाल सीमा के करीब होने के कारण पहले भी कई बार शराब तस्करी के मामलों को लेकर चर्चा में रहा है। ऐसे में इस कार्रवाई को उत्पाद विभाग की बड़ी सफलता माना जा रहा है। साथ ही विभाग ने लोगों से अपील की है कि अगर कहीं भी शराब की तस्करी की जानकारी मिले तो तुरंत सूचना दें, ताकि ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।










