गुवाहाटी,अंग भारत। असम के विभिन्न हिस्सों में आई विनाशकारी बाढ़ का पानी अब धीरे-धीरे नीचे उतरने लगा है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में हालात सुधर रहे हैं। हालांकि, पानी घटने के बाद जो तबाही सामने आई है, वह चिंताजनक है। इस साल बाढ़ ने उन इलाकों को अपना निशाना बनाया है, जो आमतौर पर सुरक्षित माने जाते थे, जिससे जनजीवन और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हुआ है। बाढ़ का प्राथमिक कारण पड़ोसी राज्य नगालैंड में हुई भारी बारिश और बादल फटना रहा, जिसके अचानक आए पानी के सैलाब ने शिवसागर, चराईदेव और जोरहाट जैसे जिलों में तबाही मचा दी।
बाढ़ का मुख्य कारण
असम में आई इस भयावह स्थिति के पीछे नगालैंड में हुई प्राकृतिक आपदा है। नगालैंड की पहाड़ियों में बादल फटने के कारण अचानक बड़ी मात्रा में पानी निचले इलाकों की तरफ बढ़ा। चूंकि इन जिलों के लोग इस तरह की बाढ़ के लिए पूरी तरह तैयार नहीं थे, इसलिए घरों और कृषि योग्य भूमि को भारी क्षति हुई। नदियां अपने उफान पर थीं, और खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूबने के कारण पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं। अब चुनौती सिर्फ पानी निकालने की नहीं, बल्कि घरों और रास्तों में जमा हुई गाद और कीचड़ को हटाने की भी है।
आंकड़ों पर नजर
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) द्वारा 27 जुलाई को जारी किए गए आंकड़े स्थिति की गंभीरता को बयां करते हैं:
- कुल प्रभावित जिले: 06 (शिवसागर, गोलाघाट, चराईदेव, जोरहाट, नगांव, कामरूप मेट्रो)।
- प्रभावित आबादी: 4,45,495 लोग।
- प्रभावित कृषि भूमि: 37,139.52 हेक्टेयर।
- कुल प्रभावित गांव: 631 गांव।
- मौतों का कुल आंकड़ा: 68।
राहत और बचाव कार्य
राज्य सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए कमर कस ली है। राहत कार्यों को युद्ध स्तर पर चलाया जा रहा है ताकि प्रभावित लोगों को तत्काल भोजन, दवाइयां और सुरक्षित ठिकाने मुहैया कराए जा सकें।
| राहत सुविधा का प्रकार | संख्या |
|---|---|
| राहत शिविर | 90 |
| राहत वितरण केंद्र | 94 |
| शिविरों में रह रहे लोग | 28,695 |
| गैर-शिविरों में राहत प्राप्तकर्ता | 51,777 |
पशुधन की सुरक्षा
इस बाढ़ में केवल इंसान ही नहीं, बल्कि बेजुबान जानवर भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ से प्रभावित जानवरों की संख्या 2,56,334 दर्ज की गई है। प्रशासन ने एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, भारतीय सेना, वायुसेना और स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर 67 नावों को राहत कार्यों में लगाया है। इन नावों के जरिए अब तक 59 लोगों और 36 जानवरों को बाढ़ के पानी से सुरक्षित निकाल लिया गया है।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
बाढ़ के बाद का समय सबसे कठिन होता है। जब पानी वापस लौटता है, तो अपने पीछे भारी मात्रा में गाद और मलबा छोड़ जाता है। किसान अब अपनी फसल खो चुके हैं, और छोटे व्यवसाय पूरी तरह ठप हो गए हैं। सड़कों की मरम्मत और बिजली लाइनों का सुचारू होना प्राथमिकता है। स्थानीय प्रशासन स्वयंसेवकों की मदद से स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई कर रहा है, ताकि जल्द से जल्द सामान्य जनजीवन बहाल किया जा सके।
प्रशासनिक सतर्कता
फिलहाल धनसिरी (नुमालीगढ़) नदी अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जो स्थानीय निवासियों के लिए चेतावनी है। प्रशासन लगातार निगरानी बनाए हुए है ताकि किसी भी तरह की अनहोनी को टाला जा सके। सरकार द्वारा जारी निर्देशों का पालन करना ही इस समय सबसे जरूरी है, क्योंकि आने वाले कुछ दिन पुनर्वास और सफाई की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।







