हजारीबाग,अंग भारत। सावन के इस पावन महीने में देवघर जाकर बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर आ चुकी है। भारतीय रेलवे ने रांची और भागलपुर के बीच श्रावणी मेला स्पेशल ट्रेन (गाड़ी संख्या 08646/08645) का परिचालन शुरू कर दिया है। इस ट्रेन के चलने से अब हजारीबाग, रामगढ़, कोडरमा और रांची के शिवभक्तों को सुल्तानगंज और बाबाधाम जाने के लिए सीधे ट्रेन की सुविधा मिलेगी। अब श्रद्धालुओं को न तो बार-बार गाड़ियां बदलनी पड़ेंगी और न ही महंगे सड़क सफर के धक्के खाने पड़ेंगे। इस सीधी रेल सेवा से भक्तों का सफर बेहद सुगम, सुरक्षित और समय बचाने वाला साबित होगा।
ट्रेन का पूरा शेड्यूल
श्रावणी मेला स्पेशल ट्रेन का यह सफर सीमित समय के लिए है, इसलिए यात्रा से पहले इसके दिनों और तारीखों को अच्छी तरह समझ लेना जरूरी है। रेलवे द्वारा जारी की गई समय-सारणी के मुताबिक, ट्रेन संख्या 08646 (रांची से भागलपुर) का संचालन प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को किया जा रहा है। यह सेवा 27 जुलाई से शुरू हो चुकी है और 11 सितंबर 2026 तक जारी रहेगी।
वहीं दूसरी तरफ, भागलपुर से रांची वापसी के लिए ट्रेन संख्या 08645 प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को चलाई जाएगी। वापसी की यह सेवा 28 जुलाई से शुरू होकर 12 सितंबर 2026 तक चलेगी। इस पूरे सावन और भादो के महीने में यह स्पेशल ट्रेन दोनों दिशाओं से कुल 14-14 फेरे लगाएगी, जिससे हजारों श्रद्धालुओं को सीट मिलने में आसानी होगी।
| ट्रेन संख्या | कहाँ से कहाँ तक | चलने के दिन | परिचालन की अवधि |
|---|---|---|---|
| 08646 | रांची से भागलपुर | सोमवार, शुक्रवार | 27 जुलाई से 11 सितंबर 2026 |
| 08645 | भागलपुर से रांची | मंगलवार, शनिवार | 28 जुलाई से 12 सितंबर 2026 |
प्रमुख ठहराव और रूट
यह स्पेशल ट्रेन किसी एक जिले के लिए नहीं, बल्कि पूरे झारखंड और बिहार के कई महत्वपूर्ण इलाकों को आपस में जोड़ती है। ट्रेन के रूट में कई ऐसे स्टॉपेज शामिल किए गए हैं, जहाँ से भारी संख्या में श्रद्धालु सुल्तानगंज के लिए रवाना होते हैं। यह ट्रेन रांची से खुलकर मुरी, बरकाकाना, हजारीबाग टाउन, तिलैया, कोडरमा और गयाजी जंक्शन होते हुए सुल्तानगंज और भागलपुर पहुंचेगी।
सुल्तानगंज स्टेशन का इस रूट में होना सबसे महत्वपूर्ण है। यहाँ से श्रद्धालु उत्तरवाहिनी गंगा का पवित्र जल उठाते हैं और फिर करीब 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा यानी कांवर यात्रा तय कर देवघर में बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित करते हैं। गयाजी और कोडरमा जैसे बड़े स्टेशनों पर रुकने से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी सीधे तौर पर इसका फायदा मिलेगा।
कोच में बड़ा बदलाव
इस बार रेलवे ने यात्रियों की भीड़ और उनकी सुविधा का खास ख्याल रखा है। अमूमन ऐसी स्पेशल ट्रेनों में कोच की संख्या कम होती है, जिससे यात्रियों को पैर रखने तक की जगह नहीं मिलती। पिछले सालों में इस ट्रेन को मात्र 14 डिब्बों (कोच) के साथ चलाया जाता था, जिससे भारी मारामारी रहती थी।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए इस साल रेलवे ने ट्रेन में 6 अतिरिक्त कोच जोड़ने का फैसला किया है। अब यह स्पेशल ट्रेन पूरे 20 कोच के साथ पटरियों पर दौड़ रही है। डिब्बों की संख्या बढ़ने से अब मिडिल क्लास और गरीब परिवारों को भी आसानी से कंफर्म टिकट मिल सकेगा।
लंबे संघर्ष की जीत
हजारीबाग और इसके आसपास के जिलों से हर साल सावन के महीने में लाखों की संख्या में शिवभक्त सुल्तानगंज और देवघर जाते हैं। सीधी ट्रेन न होने के कारण इन लोगों को मजबूरी में निजी गाड़ियों या बसों का सहारा लेना पड़ता था। सावन के दिनों में बसों का किराया आसमान छूने लगता है और सड़क पर घंटों जाम का सामना करना पड़ता है।
इस बड़ी समस्या को दूर करने के लिए भाजपा नेत्री शेफाली गुप्ता पिछले तीन वर्षों से लगातार प्रयास कर रही थीं। उन्होंने रेल मंत्रालय और रेलवे के उच्च अधिकारियों के समक्ष बार-बार इस ट्रेन को चलाने की मांग रखी थी। उनके इस जमीनी और लगातार किए गए प्रयासों का ही नतीजा है कि आज यह ट्रेन धरातल पर उतर पाई है और लोगों का सफर आसान हो पाया है।
यात्रियों की नई मांग
ट्रेन के परिचालन के पहले दिन कोच में उम्मीद से थोड़ी कम भीड़ देखने को मिली। रेलवे प्रशासन का कहना है कि यह बिल्कुल सामान्य बात है। सावन के शुरुआती दिनों में और खासकर पहले फेरे में अक्सर भीड़ कम होती है, लेकिन जैसे-जैसे सावन का रंग चढ़ेगा और सोमवारी के दिन नजदीक आएंगे, यात्रियों की संख्या में भारी उछाल आएगा। टिकटों की बुकिंग भी तेजी से बढ़ रही है।
इस बीच, ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों ने एक नई और व्यावहारिक मांग उठानी शुरू कर दी है। श्रद्धालुओं का कहना है कि हजारीबाग से बाबाधाम जाने वाले लोगों का तांता सिर्फ सावन में ही नहीं रहता, बल्कि पूरे साल लोग पूजा-अर्चना के लिए देवघर जाते रहते हैं। इसलिए, इस स्पेशल ट्रेन को केवल सावन और भादो महीने तक सीमित न रखकर पूरे साल एक नियमित ट्रेन के रूप में चलाया जाना चाहिए। इससे हजारीबाग और गया के बीच दैनिक यात्रियों को भी एक बेहतर विकल्प मिल सकेगा।







