भागलपुर,अंग भारत। बिहार और झारखंड की सीमा को जोड़ने वाली कहलगांव-नंदलालपुर-बाराहाट ग्रामीण सड़क आज एक बड़े हादसे को न्योता दे रही है। हालात इतने विकट हैं कि राहगीरों को यह समझ नहीं आता कि सड़क के भीतर गड्ढे हैं या गड्ढों के बीच सड़क बची है। करीब 14 किलोमीटर लंबी यह मुख्य जीवनरेखा पूरी तरह टूट चुकी है, जिससे दर्जनों गांवों का संपर्क मुख्य बाजार से लगभग कट सा गया है।
सड़क की दयनीय स्थिति
यह सड़क दो प्रमुख मार्गों में बंटती है। पहला मार्ग कहलगांव-प्यालापुर होते हुए एनएच-133 के प्यालापुर चौक तक जाता है, जबकि दूसरा मार्ग नंदलालपुर से होकर बाराहाट तक पहुंचता है। दोनों ही मार्गों की स्थिति बदतर है। विशेषकर नंदलालपुर से चांदनी चौक के आगे के सात किलोमीटर के हिस्से में हालात भयावह हैं। जमीनी स्तर पर की गई पड़ताल में इस सात किलोमीटर के दायरे में करीब 800 छोटे-बड़े गड्ढे पाए गए हैं। एनटीपीसी कहलगांव की निगरानी में आने वाले शुरुआती हिस्से तक में अब तारकोल का नामोनिशान नहीं बचा है।
पूर्व विधायकों का घर
विडंबना यह है कि इसी रास्ते पर पीरपैंती विधानसभा के दो पूर्व विधायकों के पुश्तैनी घर स्थित हैं—रामविलास पासवान (आरजेडी) और अमन कुमार (भाजपा)। जब हमने इस संबंध में पूर्व विधायक अमन कुमार से बात की, तो उन्होंने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए कहा, “मैंने सड़क की मरम्मत के लिए खूब प्रयास किए, लेकिन किसी ने मेरी बात नहीं सुनी।” जब सत्ता के गलियारों में रहने वालों के घर के बाहर की सड़क ऐसी है, तो सुदूर गांवों की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
ग्रामीणों का दर्द
बनस्पति गांव के रहने वाले मिथुन यादव लोहा का कहना है कि वे पिछले 20 वर्षों से सड़क को टूटते हुए देख रहे हैं। सड़क की दुर्दशा पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी ने ग्रामीणों के आक्रोश को बढ़ा दिया है। हरचंदपुर गांव के निवासी अमल कुमार उर्फ गुड्डू और बिनोद कुमार यादव ने बताया कि अब स्थिति इतनी खराब है कि उनके रिश्तेदार भी गांव आने से कतराने लगे हैं।
- गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने में जान का जोखिम।
- बीमार बुजुर्गों के लिए एम्बुलेंस का पहुंचना नामुमकिन।
- रोजाना समय से स्कूल न पहुंच पाने के कारण बच्चों की पढ़ाई बाधित।
ओवरलोडिंग बनी काल
सड़क के जल्दी टूटने का एक बड़ा कारण अनियंत्रित ओवरलोडिंग है। प्रशासन की ढिलाई का फायदा उठाकर भारी मालवाहक ट्रैक्टर और ट्रक इस कमजोर सड़क से गुजरते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध खनन और ढुलाई के कारण सड़क पूरी तरह उधड़ चुकी है। बरसात के दिनों में यही गड्ढे जलजमाव का केंद्र बन जाते हैं, जिससे पैदल चलना भी दुश्वार हो जाता है।
स्कूली बच्चों की परेशानी
क्षेत्र के अभिभावक इस बात से डरे रहते हैं कि कब कोई बच्चा हादसे का शिकार हो जाए। स्कूल बसों को गहरे गड्ढों से बचाने के चक्कर में चालकों को रफ्तार बहुत धीमी रखनी पड़ती है। छात्रों को स्कूल समय से दो घंटे पहले घर से निकलना पड़ता है। यदि सड़क ऐसी ही रही, तो भविष्य में यह मार्ग पूरी तरह आवागमन के अयोग्य हो जाएगा।
तत्काल सुधार की जरूरत
विकास के बड़े-बड़े दावों और चुनावी वादों के बीच यह सड़क पिछले कई सालों से कोढ़ में खाज साबित हो रही है। स्थानीय निवासियों की मांग है कि सिर्फ खानापूर्ति के लिए पैच वर्क न किया जाए, बल्कि इस 14 किलोमीटर के हिस्से का पूरी तरह पुनर्निर्माण हो। जब तक स्थानीय प्रशासन और विभागीय अधिकारी ओवरलोडिंग पर लगाम नहीं लगाएंगे, तब तक मरम्मत का कोई भी प्रयास स्थायी समाधान नहीं दे पाएगा।
| समस्या | प्रभाव |
|---|---|
| सड़क में 800 से ज्यादा गड्ढे | वाहनों की टूट-फूट और दुर्घटना |
| भारी वाहनों की आवाजाही | सड़क का आधार पूरी तरह खत्म |
| बरसात में जलजमाव | पैदल यात्रियों के लिए खतरा |
आने वाले समय में अगर समय रहते इस सड़क की सुध नहीं ली गई, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन करने की चेतावनी दे रहे हैं। यह सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि हजारों लोगों की रोजी-रोटी और जीवन की रक्षा का सवाल है।







