नई दिल्ली,अंग भारत। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने देश की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं, भर्ती प्रक्रियाओं और प्रवेश परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही धांधली, प्रश्नपत्र लीक और व्यापक भ्रष्टाचार के खिलाफ देशभर में अपना आंदोलन उग्र कर दिया है। यह संघर्ष केवल एक राज्य की समस्या नहीं, बल्कि झारखंड, कर्नाटक, पंजाब और बिहार जैसे कई राज्यों में फैली उस सड़ती हुई परीक्षा प्रणाली के खिलाफ है, जो हर साल लाखों युवाओं के सपनों को कुचल रही है। अभाविप ने स्पष्ट किया है कि जब तक परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और संस्थागत सुधार नहीं होते, तब तक यह लोकतांत्रिक प्रदर्शन निरंतर जारी रहेगा।
परीक्षा प्रणाली पर संकट
देशभर के विद्यार्थियों का सिस्टम से भरोसा उठना एक गंभीर संकेत है। अभाविप का मानना है कि जो छात्र दिन-रात मेहनत कर तैयारी करते हैं, उन्हें एक निष्पक्ष और पारदर्शी मंच मिलना उनका अधिकार है। सरकारों और परीक्षा एजेंसियों की यह प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वे भर्ती प्रक्रिया को भ्रष्टाचार मुक्त रखें। लेकिन हाल के वर्षों में जिस तरह से प्रश्नपत्र लीक की घटनाएं बढ़ी हैं, उन्होंने पूरी चयन प्रक्रिया को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है।
पंजाब में दमनकारी कार्रवाई
पंजाब में स्थिति तब और बिगड़ गई जब अभाविप कार्यकर्ता अपनी जायज मांगों को लेकर विधानसभा का घेराव करने पहुंचे। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे इन छात्रों पर पुलिस ने बर्बर लाठीचार्ज किया और वाटर कैनन का उपयोग किया। अभाविप ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। संगठन का दावा है कि इस प्रशासनिक संवेदनहीनता के कारण कई कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हुए हैं। पंजाब सरकार की यह कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है, क्योंकि छात्रों ने केवल प्रश्नपत्र लीक और भर्ती में हो रही धांधली के खिलाफ आवाज उठाई थी।
विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन
देश के अलग-अलग कोनों में छात्र अपने अधिकारों के लिए सड़क पर हैं। उनकी प्रमुख मांगें कुछ इस प्रकार हैं:
- कर्नाटक (हुब्बली): केपीएससी (KPSC) प्रकरण की सीबीआई जांच और भर्ती में हुई धांधली की निष्पक्ष न्यायिक जांच। साथ ही, रिक्त पड़े शिक्षकीय पदों पर तत्काल नियुक्ति की मांग।
- बिहार (पटना): पटना विश्वविद्यालय की लॉ प्रवेश परीक्षा-2026 में प्रश्नपत्र लीक होने की खबरों के बाद एक उच्चस्तरीय और समयबद्ध जांच की मांग।
- झारखंड: जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं के विरोध में आक्रोश मार्च। छात्रों ने दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई और पूरी परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग की है।
अन्य राज्यों के मुद्दे
विरोध के स्वर केवल भर्ती परीक्षाओं तक सीमित नहीं हैं। तेलंगाना के वारंगल में छात्र अपनी लंबित फीस प्रतिपूर्ति और रुकी हुई छात्रवृत्ति के भुगतान को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। वहीं, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है। मध्य प्रदेश में भी प्रस्तावित निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक-2026 का विरोध किया जा रहा है, क्योंकि छात्रों को डर है कि इससे शिक्षा का निजीकरण और महंगा हो जाएगा, जो आम छात्रों की पहुंच से बाहर होगा।
डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी का बयान
अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने इस पूरे प्रकरण पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि परीक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता कोई क्षेत्रीय मुद्दा नहीं, बल्कि यह पूरे भारत के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा हुआ एक गंभीर विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई राज्य सरकारें छात्रों के साथ संवाद करने के बजाय उन पर दमनात्मक कार्रवाई कर रही हैं। डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा, “विद्यार्थियों के हक, पारदर्शी परीक्षा प्रणाली और जवाबदेह तंत्र के लिए हमारा लोकतांत्रिक संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक सरकारें विद्यार्थियों के भविष्य के प्रति अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से नहीं निभातीं।”
भविष्य की दिशा
वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि देश का युवा अब चुप बैठने वाला नहीं है। प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं ने न केवल छात्रों का समय बर्बाद किया है, बल्कि उन्हें मानसिक रूप से भी तोड़ दिया है। अभाविप का यह आंदोलन केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी ‘व्यवस्था परिवर्तन’ की मांग है, जो आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित और पारदर्शी शिक्षा प्रणाली प्रदान कर सके। यह समय है कि सरकारें अपनी प्रशासनिक विफलता को स्वीकार करें और भविष्य में होने वाली परीक्षाओं को पूरी तरह से तकनीकी और मानवीय सुरक्षा के दायरे में लाएं।








