देहरादून,अंग भारत। उत्तराखंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। भारी बारिश के चलते नदियां उफान पर हैं और कई प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग भूस्खलन व मलबे के कारण बंद हो गए हैं, जिससे यातायात और संपर्क मार्ग बुरी तरह प्रभावित हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए राज्य की सभी आपदा प्रबंधन एजेंसियों को ‘हाई अलर्ट’ मोड पर रहने के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अगले 24 घंटों के लिए उत्तराखंड के तीन जिलों—देहरादून, बागेश्वर और पिथौरागढ़—में भारी से बहुत भारी बारिश का ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है। इस दौरान गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की प्रबल संभावना है। प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी रुक-रुक कर बारिश का दौर जारी है, जिसने ठंडक तो बढ़ा दी है, लेकिन पहाड़ी रास्तों पर सफर करना जान जोखिम में डालने जैसा बना दिया है।
खतरे के निशान पर नदियां
नदियों का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में प्रशासन ने चिंता जताई है। जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार स्थिति काफी तनावपूर्ण है:
- अलकनंदा नदी: रुद्रप्रयाग में जलस्तर 627.80 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से ऊपर है।
- मंदाकिनी नदी: इसका जलस्तर 626.60 मीटर तक पहुंच गया है।
- भागीरथी नदी: देवप्रयाग में जलस्तर 462.00 मीटर है, जो चेतावनी स्तर के बराबर है।
- बाणगंगा नदी: हरिद्वार के रायसी में जलस्तर 230.09 मीटर दर्ज किया गया, जो चेतावनी स्तर से ऊपर है।
स्थानीय प्रशासन ने नगर निकायों के माध्यम से लाउडस्पीकर का उपयोग करके नदी तटों के निकट रहने वाले निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
बाधित राष्ट्रीय राजमार्ग
भूस्खलन के कारण प्रदेश की लाइफलाइन माने जाने वाले कई मार्ग अवरुद्ध हैं। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले मार्ग की स्थिति जरूर जांच लें:
- एनएच-134 (ऋषिकेश-यमुनोत्री): सिलाईबैंड और दुर्बिल के पास मलबा आने से बंद है।
- एनएच-7 (ऋषिकेश-बदरीनाथ): चमोली के हेलंग क्षेत्र में मलबा आने से यातायात बाधित है।
- गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग: धरासू-नालूपानी के पास मार्ग अवरुद्ध है।
- अन्य मार्ग: कर्णप्रयाग-थराली-ग्वालदम मार्ग और धारचूला-तवाघाट मार्ग भी भारी मलबे के कारण बंद हैं।
राहत और बचाव कार्य
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिव आपदा प्रबंधन से विस्तृत रिपोर्ट ली है। उन्होंने एसडीआरएफ (SDRF), एनडीआरएफ (NDRF), जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को पूरी तरह सक्रिय रहने के आदेश दिए हैं। प्रशासन का मुख्य जोर संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी और मलबा हटाने का कार्य तेजी से करने पर है।
आसन बैराज से डिस्चार्ज
गुरुवार की सुबह आसन नदी में जलप्रवाह के साथ भारी मात्रा में कचरा और घास आने के कारण ट्रैश रैक पूरी तरह जाम हो गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए ढालीपुर स्थित आसन बैराज के गेट खोल दिए। लगभग 39 हजार क्यूसेक पानी यमुना नदी में छोड़ा गया। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को नदी से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सख्त हिदायत दी गई है।
प्रशासन की अपील
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जब तक मौसम सामान्य नहीं होता, अनावश्यक यात्रा करने से बचें। देहरादून जिले में अब तक औसतन 32.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई है और कुल 14 सड़कें (राज्य व ग्रामीण) यातायात के लिए बंद हैं। फिलहाल बिजली आपूर्ति सामान्य है, लेकिन किसी भी आपात स्थिति के लिए जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों को 24×7 सक्रिय रखा गया है।
सावधानी ही बचाव है: भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और उफनते नदी-नालों के पास जाने से बचें। यात्रा पर निकलने से पहले आधिकारिक वेबसाइट या स्थानीय जिला प्रशासन के कंट्रोल रूम से नवीनतम अपडेट प्राप्त करें।








