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बाढ़ की मार झेल रहा असम, 14 जिलों में 1.60 लाख आबादी प्रभावित, पांच और शव मिले

गुवाहाटी, अंग भारत। असम में आई विनाशकारी बाढ़ ने राज्य के 14 जिलों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है, जिससे अब तक कुल 94 लोगों की मृत्यु हो चुकी है और 1.60 लाख से अधिक आबादी संकट में फंसी है। यद्यपि प्रमुख नदियों के जलस्तर में कुछ कमी आई है, लेकिन रिहायशी इलाकों और सड़कों पर जमा गाद और कीचड़ ने लोगों के लिए सामान्य स्थिति में लौटना एक बड़ी चुनौती बना दिया है। फिलहाल गोलाघाट, शिवसागर और चराईदेव जैसे जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं, जहाँ बुनियादी ढांचा और कृषि भूमि को भारी नुकसान पहुंचा है।

बाढ़ का वर्तमान विस्तार

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की 5 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ का दायरा पिछले कुछ दिनों में 5 जिलों से बढ़कर 14 जिलों तक फैल गया है। आंकड़ों के मुताबिक, 38 राजस्व मंडलों के 563 गांव जलमग्न हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि लगभग 16,951.76 हेक्टेयर उपजाऊ कृषि भूमि अभी भी पानी में डूबी हुई है, जिससे स्थानीय किसानों की आजीविका पर सीधा असर पड़ा है। धनसिरि नदी अभी भी नुमलीगढ़ इलाके में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जो प्रशासन के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

मृतकों की संख्या

बुधवार को উদ্ধার कार्यों के दौरान अलग-अलग इलाकों से कई शव बरामद किए गए, जिससे राज्य में इस बाढ़ से मरने वालों का आंकड़ा 94 तक पहुंच गया है। इन जिलों में हुई बरामदगी के विवरण निम्नलिखित हैं:

  • शिवसागर: 2 शव
  • गोलाघाट: 1 शव
  • बिश्वनाथ: 2 शव

प्रभावित प्रमुख जिले

बाढ़ का असर राज्य के एक बड़े हिस्से पर है। प्रभावित जिलों की सूची में शामिल हैं: गोलाघाट, लखीमपुर, चराईदेव, शिवसागर, बिश्वनाथ, धेमाजी, कामरूप (मेट्रो), जोरहाट, शोणितपुर, तिनसुकिया, नगांव, दरंग, कार्बी आंगलोंग और उदालगुरी। इन क्षेत्रों में सड़क संपर्क और पुलों के टूटने से राहत सामग्री पहुंचाना भी एक चुनौतीपूर्ण कार्य बन गया है।

राहत और बचाव कार्य

राज्य सरकार और केंद्र सरकार मिलकर व्यापक स्तर पर बचाव अभियान चला रहे हैं। जमीनी स्तर पर राहत कार्य में कई एजेंसियां और बल तैनात किए गए हैं, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • एसडीआरएफ (SDRF) और एनडीआरएफ (NDRF) की टीमें।
  • भारतीय सेना, अर्धसैनिक बल और वायुसेना।
  • स्थानीय पुलिस, अग्निशमन और आपातकालीन सेवाएं (F&ES)।
  • डीडीआरएफ (DDRF) और नागरिक सुरक्षा के प्रशिक्षित स्वयंसेवक।
  • सर्कल कार्यालय और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी।

केंद्रीय मंत्री का दौरा

स्थिति का जायजा लेने के लिए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा के साथ सबसे अधिक प्रभावित शिवसागर और चराईदेव जिलों का दौरा किया। इस दौरान जेपी नड्डा ने प्रभावित परिवारों को केंद्र की ओर से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। यह दौरा उनके तीन दिवसीय पूर्वोत्तर भारत (असम, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश) के प्रवास का हिस्सा था। उन्होंने नगालैंड के बाढ़ प्रभावित मोन जिले का भी दौरा किया ताकि वहां के हालातों को करीब से समझा जा सके।

भविष्य की चुनौतियां

पानी घटने के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती बीमारियों को फैलने से रोकना और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत करना है। असम में हर साल बाढ़ एक बड़ी समस्या बनकर सामने आती है, जिससे भारी आर्थिक और मानवीय नुकसान होता है। अभी के हालात को देखते हुए, कीचड़ और मलबे को साफ करना और प्रभावित 1.60 लाख लोगों को सुरक्षित आवास और स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराना प्रशासन की शीर्ष प्राथमिकता बनी हुई है। कृषि भूमि के डूबने से होने वाले दीर्घकालिक नुकसान की भरपाई करना भी सरकार के लिए एक बड़ी परीक्षा है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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