कोलकाता,अंग भारत। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के तहत बुधवार सुबह सात जिलों की 142 सीटों पर मतदान शुरू होते ही राज्य के कई इलाकों में हिंसा, धांधली के आरोपों और तनावपूर्ण स्थितियों ने लोकतंत्र के इस महापर्व की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मतदान की प्रक्रिया शुरू होते ही मिनाखा, बारासात, नदिया और भांगड़ जैसे संवेदनशील क्षेत्रों से झड़प और मतदाताओं को डराने-धमकाने की जो खबरें सामने आई हैं, उन्होंने चुनावी माहौल को काफी गर्मा दिया है। पिछले चुनावों के आंकड़ों पर गौर करें तो 2021 में इन 142 सीटों में से 123 पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) का कब्जा था, जिसकी वजह से इस बार का मुकाबला बेहद कांटे का और प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है।
हिंसा का बढ़ता दायरा
मतदान केंद्रों के बाहर भारी सुरक्षा व्यवस्था के दावों के बीच, धरातल पर स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण दिखाई दी। उत्तर 24 परगना जिले का मिनाखा इलाका सुबह से ही तनाव का केंद्र बना रहा। वहां से प्राप्त रिपोर्ट्स के अनुसार, स्थानीय मतदाताओं को बूथ तक पहुँचने से रोका गया। लोगों ने खुलकर बताया कि उन्हें वोट डालने के बदले में धमकाया जा रहा है। ऐसी घटनाएं न केवल स्वतंत्र मतदान पर प्रहार करती हैं, बल्कि आम जनता में सुरक्षा को लेकर एक बड़ा डर भी पैदा करती हैं।
बूथ एजेंटों पर हमले
चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए बूथ एजेंटों को निशाना बनाना एक पुरानी रणनीति रही है, जो इस बार भी साफ दिखी। बारासात में भाजपा ने आरोप लगाया कि उनके एजेंटों को न केवल धमकाया गया, बल्कि आधिकारिक फाइलें भी छीन ली गईं। वहीं, नदिया जिले के चापड़ा में स्थिति और भी भयावह रही, जहां मारपीट के दौरान भाजपा के एक बूथ एजेंट का सिर फोड़ दिया गया।
- बारासात: भाजपा एजेंट की फाइल छीनी गई।
- नदिया (चापड़ा): बूथ एजेंट पर जानलेवा हमला।
- दक्षिण 24 परगना: कार्यकर्ताओं को घर में घुसकर डराना।
आईएसएफ के गंभीर दावे
भांगड़ से इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के उम्मीदवार नौशाद सिद्दीकी ने चुनाव की पूर्व संध्या पर हुए घटनाक्रमों पर गंभीर चिंता जताई। उनका आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता रात के अंधेरे का फायदा उठाकर घर-घर जाकर मतदाताओं को प्रभावित कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि जो भी समर्थक इस हरकत का विरोध कर रहे थे, उन्हें सीधा निशाना बनाया गया। यह दिखाता है कि तनाव केवल मतदान के दिन ही नहीं, बल्कि उससे पहले भी चरम पर था।
प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था
विजयगंज के कोचपुर इलाके में हुई झड़प में एक महिला समेत चार लोगों के घायल होने की खबर के बाद जिला प्रशासन बैकफुट पर आ गया। आनन-फानन में संवेदनशील बूथों पर अतिरिक्त केंद्रीय बलों की तैनाती की गई। जब बात सुरक्षा की आती है, तो पुलिस और चुनाव आयोग की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है। अब प्रशासन के सामने चुनौती है कि वे इन छिटपुट हिंसाओं को बड़े दंगों में बदलने से कैसे रोकें।
आयोग का कड़ा रुख
चुनाव आयोग ने इन सभी घटनाओं का स्वतः संज्ञान लिया है। अधिकारियों को स्पष्ट आदेश दिए गए हैं कि किसी भी हालत में मतदान प्रक्रिया बाधित नहीं होनी चाहिए। हालांकि, विपक्षी दलों का तर्क है कि चुनाव आयोग को जमीनी स्तर पर और अधिक सक्रिय होने की जरूरत है ताकि डर का माहौल खत्म हो सके और मतदाता बिना किसी दबाव के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।
राजनीतिक समीकरण
इस चरण में तृणमूल कांग्रेस, भाजपा, वाम दलों और कांग्रेस के बीच चतुष्कोणीय लड़ाई है। आंकड़ों का खेल देखिए, 123 सीटों पर पिछली जीत के बाद टीएमसी के लिए इन इलाकों को बचाना बड़ी चुनौती है, जबकि भाजपा अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए आक्रामक प्रचार कर रही है। इस खींचतान के बीच आम जनता, जो केवल एक शांतिपूर्ण मतदान चाहती है, अक्सर इन सियासी झड़पों में पिस जाती है। आने वाले घंटों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या चुनाव आयोग इन तनावपूर्ण क्षेत्रों में शांति बहाल कर पाता है या हिंसा की यह आग चुनाव के अंतिम घंटों तक जारी रहेगी।








