जम्मू,अंग भारत। जम्मू-कश्मीर में पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाए जाने की सातवीं बरसी के अवसर पर सुरक्षा कारणों से रोकी गई वार्षिक श्री अमरनाथ यात्रा को एक दिन बाद गुरुवार को फिर से बहाल कर दिया गया है। जम्मू के भगवती नगर स्थित संयुक्त पुलिस कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा करते हुए तड़के 2:45 बजे तीर्थयात्रियों का 28वां जत्था बालटाल बेस कैंप के लिए रवाना हुआ। इस जत्थे में कुल 1,801 श्रद्धालु शामिल हैं, जिन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच भेजा गया है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए चप्पे-चप्पे पर कड़े बंदोबस्त किए हैं ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। संवेदनशील तारीखों पर अक्सर सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट पर रहती हैं, जिसके चलते यह अस्थाई रोक लगाई गई थी।
जत्थे का पूरा विवरण
सुरक्षा विभाग से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस 28वें जत्थे में शामिल यात्रियों का वर्गीकरण बहुत व्यवस्थित ढंग से किया गया है। जत्थे की कुल संख्या 1,801 है, जो अलग-अलग वाहनों के जरिए आगे बढ़ रही है। इस दल को रवाना करने से पहले जम्मू के यात्री निवास में सभी की सुरक्षा जांच की गई। नीचे दी गई तालिका में इस जत्थे की पूरी जानकारी दी गई है:
| श्रद्धालुओं की श्रेणी | कुल संख्या |
|---|---|
| पुरुष तीर्थयात्री | 1,347 |
| महिला तीर्थयात्री | 351 |
| साधु | 89 |
| साध्वियां | 14 |
| कुल यात्री | 1,801 |
इन सभी श्रद्धालुओं को 74 अलग-अलग गाड़ियों के बड़े काफिले के साथ रवाना किया गया। इस काफिले में सुरक्षा और सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है। वाहनों की सूची में 40 बड़ी बसें, 12 मीडियम मोटर व्हीकल, 19 लाइट मोटर व्हीकल और तीन दोपहिया वाहन शामिल हैं। पूरे सफर के दौरान जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के सशस्त्र जवान मुस्तैदी से सुरक्षा में तैनात हैं।
सुरक्षा के इंतजाम
कश्मीर घाटी में सुरक्षा की स्थिति हमेशा से संवेदनशील रही है, विशेषकर उन तारीखों पर जिनका राजनीतिक और ऐतिहासिक महत्व है। 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 के खात्मे की वर्षगांठ थी, जिसके कारण सुरक्षा बलों ने हाई अलर्ट घोषित किया हुआ था। इसी वजह से बुधवार को यात्रा रोक दी गई थी।
“यात्रियों की सुरक्षा हमारी सबसे पहली प्राथमिकता है। सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बाद ही जत्थों को आगे बढ़ने की अनुमति दी जाती है।” — संयुक्त पुलिस कंट्रोल रूम, भगवती नगर
राजमार्ग पर किसी भी प्रकार के खतरे से निपटने के लिए सेना और अर्धसैनिक बलों के जवानों ने मोर्चा संभाल रखा है। सुबह-सुबह रोड ओपनिंग पार्टी (ROP) पूरे रास्ते की जांच करती है। इसके बाद ही यात्री वाहनों को हाईवे से गुजरने की अनुमति दी जाती है। ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी नेटवर्क से पूरे नेशनल हाईवे की निगरानी चौबीसों घंटे की जा रही है।
यात्रा के मुख्य मार्ग
अमरनाथ गुफा तक पहुंचने के लिए मुख्य रूप से दो रास्ते उपयोग में लाए जाते हैं। दोनों ही रास्तों की अपनी विशेषताएं और चुनौतियां हैं। श्रद्धालुओं को अपनी शारीरिक क्षमता के आधार पर ही इन मार्गों का चयन करना पड़ता है।
- बालटाल मार्ग: यह रास्ता सोनमर्ग के पास से शुरू होता है। इसकी कुल दूरी मात्र 14 से 16 किलोमीटर है, जो काफी कम समय में तय की जा सकती है। हालांकि, यह मार्ग बहुत ही खड़ी चढ़ाई वाला और संकरा है। शारीरिक रूप से मजबूत लोग ही इस रास्ते को चुनते हैं। वर्तमान में अधिकारियों ने इसी मार्ग के लिए श्रद्धालुओं का नया जत्था रवाना किया है।
- पहलगाम मार्ग: यह यात्रा का सबसे पुराना और पारंपरिक मार्ग है। इसे अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित माना जाता है। यह रास्ता चंदनवाड़ी से होकर शीशनाग और पंचतरणी जैसे मनमोहक पड़ावों से गुजरता है। इस मार्ग से गुफा तक पहुंचने में श्रद्धालुओं को तीन से पांच दिन लग जाते हैं। अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा कारणों से इस बार पहलगाम मार्ग के लिए नया जत्था नहीं भेजा गया है।
धार्मिक और भौगोलिक महत्व
श्री अमरनाथ गुफा हिंदू समाज की गहरी आस्था का प्रतीक है। यह पवित्र गुफा दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में समुद्र तल से लगभग 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां की कठिन भौगोलिक परिस्थितियां और हाड़ कंपा देने वाली ठंड भी भक्तों के हौसले को डिगा नहीं पातीं। गुफा के भीतर हर साल प्राकृतिक रूप से बर्फ का शिवलिंग बनता है, जिसे श्रद्धालु प्यार से बाबा बर्फानी कहते हैं।
इस साल यह पावन यात्रा 3 जुलाई से शुरू हुई थी। इसका समापन 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन होगा। मान्यता है कि इसी गुफा में भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व की कथा सुनाई थी, जिसे छिपकर एक कबूतर के जोड़े ने सुन लिया था और वे भी अमर हो गए थे। आज भी गुफा के पास वह कबूतर का जोड़ा श्रद्धालुओं को दिखाई देता है, जिसे देखना बेहद शुभ माना जाता है।
श्रद्धालुओं के लिए गाइडलाइन
यदि आप भी इस यात्रा पर जाने की सोच रहे हैं, तो प्रशासन द्वारा तय नियमों का पालन करना आपके लिए बेहद मददगार साबित होगा। यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए नीचे दी गई बातों का विशेष ध्यान रखें:
- आरएफआईडी कार्ड: सभी तीर्थयात्रियों के लिए आरएफआईडी (RFID) कार्ड साथ रखना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे आपकी सुरक्षा सुनिश्चित होती है और आपातकाल में आपको ट्रैक करना आसान होता है।
- गर्म कपड़े और दवाएं: पहाड़ी मौसम का कोई भरोसा नहीं होता। अचानक तापमान गिरने से ठंड बढ़ जाती है, इसलिए अपने साथ पर्याप्त ऊनी कपड़े, रेनकोट और बुनियादी दवाइयां जरूर रखें।
- फिटनेस सर्टिफिकेट: यात्रा पर निकलने से पहले अधिकृत डॉक्टरों से मेडिकल जांच कराना बेहद जरूरी है। कम ऑक्सीजन वाले क्षेत्रों में केवल स्वस्थ लोग ही आसानी से यात्रा पूरी कर पाते हैं।








