चंडीगढ़,अंग भारत। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव लाते हुए 28 मार्च को 100 नए मोहल्ला क्लीनिक जनता को समर्पित करने का ऐलान किया है। सरकार का लक्ष्य आम लोगों के घर के पास इलाज उपलब्ध कराना है। वर्तमान में राज्य में 883 क्लीनिक संचालित हो रहे हैं और नए क्लीनिकों के साथ यह संख्या तेजी से बढ़ रही है। सरकार का लक्ष्य कुल 1400 मोहल्ला क्लीनिकों का जाल बिछाना है ताकि स्वास्थ्य सेवा हर नागरिक की पहुंच में हो।
मुफ्त इलाज का वादा
मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत राज्य के करीब तीन करोड़ लोगों को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इलाज पूरी तरह निशुल्क है। किसी भी लाभार्थी को अपनी जेब से एक रुपया भी खर्च करने की जरूरत नहीं है। कार्ड में दर्ज सभी सदस्यों को गंभीर बीमारियों जैसे दिल, फेफड़े, गुर्दे और आंखों से जुड़ी समस्याओं के लिए उपचार की सुविधा दी जा रही है। अब तक लगभग 25 लाख परिवारों को रजिस्टर किया जा चुका है और 1.60 लाख से अधिक लोग इसका लाभ उठा चुके हैं।
क्लीनिकों का प्रदर्शन
आंकड़े बताते हैं कि मोहल्ला क्लीनिकों ने पंजाब की स्वास्थ्य सेवा में नई जान फूंकी है। इन क्लीनिकों की ओपीडी पांच करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी है, जो आम आदमी के भरोसे को दर्शाता है। अन्य प्रमुख उपलब्धियां इस प्रकार हैं:
- 94 फीसदी मरीजों ने मोहल्ला क्लीनिक की सेवाओं पर पूर्ण संतुष्टि जताई है।
- 30 हजार से अधिक गर्भवती महिलाओं का नियमित चेकअप किया गया है।
- मरीजों की सुविधा के लिए 400 अतिरिक्त क्लीनिक बनाने की प्रक्रिया जारी है।
- 15 अप्रैल तक सभी सरकारी अस्पतालों को एक केंद्रीय हॉटलाइन से जोड़ा जाएगा।
दवाओं की उपलब्धता
दवाओं की कमी को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सरकारी अस्पतालों में हर हाल में मुफ्त दवाइयां मिलनी चाहिए। यदि किसी केंद्र पर दवा उपलब्ध नहीं है, तो एसएमओ (SMO) को तत्काल बाजार से दवा खरीदकर मरीज को देनी होगी। इसके लिए सरकार ने अलग से फंड जारी किए हैं। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है, क्योंकि स्वास्थ्य मंत्री का मानना है कि पहले भी ऐसे गैर-जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त एक्शन लिया गया है।
मेडिकल कॉलेज का विकास
सिर्फ मोहल्ला क्लीनिक ही नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर मेडिकल बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। होशियारपुर और कपूरथला में बनने वाले मेडिकल कॉलेजों के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और जल्द ही निर्माण कार्य धरातल पर उतरेगा। इसके अलावा, मलेरकोटला में प्रस्तावित कम्युनिटी मेडिकल कॉलेज के लिए भूमि अधिग्रहण का काम अपने अंतिम चरण में है। एमबीबीएस सीटों की संख्या में भी इजाफा किया गया है ताकि भविष्य के लिए डॉक्टरों की कमी न रहे।
स्टाफ की बंपर भर्तियां
स्वास्थ्य विभाग में मानव संसाधन की कमी को दूर करने के लिए पिछले चार वर्षों में ऐतिहासिक भर्तियां की गई हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, आजादी के बाद से अब तक की कुल नियुक्तियों का करीब 35 फीसदी हिस्सा इन चार सालों में पूरा हुआ है।
| पद का नाम | भर्ती संख्या |
|---|---|
| सामान्य डॉक्टर | 948 |
| स्पेशलिस्ट डॉक्टर | 627 |
| स्टाफ नर्स (प्रक्रियाधीन) | 300+ |
| फार्मासिस्ट (प्रक्रियाधीन) | 250 |
भविष्य की रणनीति
राज्य सरकार सात नए मदर चाइल्ड केयर केंद्र भी स्थापित कर रही है, जिनमें से प्रत्येक की क्षमता 250 बेड की होगी। यह कदम जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य सुरक्षा के लिहाज से मील का पत्थर साबित होगा। सरकार का जोर इस बात पर है कि केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना की तुलना में राज्य की स्वास्थ्य योजनाओं का दायरा न केवल बड़ा हो, बल्कि शर्तें भी कम हों। 2000 करोड़ रुपये का समर्पित बजट यह सुनिश्चित करता है कि पंजाब का कोई भी नागरिक पैसों की तंगी के कारण इलाज से वंचित न रहे।








