Founder – Mohan Milan

बिहार,गुजरात और मध्य प्रदेश की तीन सीटों पर उपचुनाव के लिए मतदान शुरू, 3 अगस्त को नतीजे

बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात में विधानसभा उपचुनाव के लिए पोलिंग बूथ पर वोट डालने के लिए कतारों में खड़े मतदाता और सुरक्षा बल

नई दिल्ली, अंग भारत। बिहार, गुजरात और मध्य प्रदेश की तीन महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों—बांकीपुर, मंजलपुर और दतिया—पर उपचुनाव के लिए आज सुबह सात बजे से मतदान शुरू हो गया है। इन तीनों सीटों पर जनता अपने नए जनप्रतिनिधियों को चुनने के लिए पोलिंग बूथों पर कतारों में खड़ी है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित इन तीनों राज्यों में हो रहे इस चुनावी मुकाबले के नतीजे आगामी 3 अगस्त को घोषित किए जाएंगे। इस मुकाबले में जहां भाजपा अपनी साख बचाने की कोशिश कर रही है, वहीं कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और प्रशांत किशोर की जनसुराज जैसी पार्टियां सत्ताधारी दल को कड़ी टक्कर देने के लिए मैदान में डटी हैं।

विधानसभा सीट राज्य खाली होने का कारण मुख्य उम्मीदवार
बांकीपुर बिहार नितिन नवीन के राज्यसभा जाने से नीरज कुमार सिन्हा (BJP), रेखा गुप्ता (RJD), जनसुराज प्रत्याशी
दतिया मध्य प्रदेश राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द होने से आशुतोष तिवारी (BJP), घनश्याम सिंह (Congress)
मंजलपुर गुजरात विधायक योगेश पटेल के निधन से सतीश पटेल (BJP), भीखाभाई रबारी (Congress)

बांकीपुर का सियासी समीकरण

बिहार की राजधानी पटना के अंतर्गत आने वाली बांकीपुर विधानसभा सीट राज्य की सबसे चर्चित सीटों में से एक है। यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के अप्रैल में राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद खाली हुई है। बांकीपुर को पारंपरिक रूप से भाजपा का एक बेहद मजबूत और अभेद्य गढ़ माना जाता है। इस बार भाजपा ने यहां से नीरज कुमार सिन्हा को अपना उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारा है।

हालांकि, इस बार बांकीपुर की लड़ाई केवल एकतरफा नहीं है। चुनावी मैदान में राजद की तरफ से रेखा गुप्ता ताल ठोक रही हैं, जिन्हें विपक्ष का मजबूत समर्थन हासिल है। इसके साथ ही, चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की पार्टी ‘जनसुराज’ ने भी इस सीट पर अपने उम्मीदवार को उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। जनसुराज की एंट्री ने स्थानीय समीकरणों को प्रभावित किया है, जिससे युवाओं के बीच चर्चा बढ़ गई है। देखना होगा कि क्या भाजपा अपना यह पुराना किला बचाने में कामयाब रहती है या विपक्षी दल कोई बड़ा उलटफेर करने में सफल होते हैं।

दतिया में कांटे की टक्कर

मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर मुकाबला सीधे तौर पर भाजपा और कांग्रेस के बीच है। यह सीट कांग्रेस के विधायक राजेंद्र भारती को कोर्ट द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद खाली हुई थी। सजा मिलने के कारण इस साल अप्रैल में उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई थी, जिसके बाद यहां उपचुनाव कराने की नौबत आई।

इस सीट पर भाजपा ने आशुतोष तिवारी पर भरोसा जताया है, वहीं कांग्रेस की ओर से घनश्याम सिंह मैदान में हैं। दतिया का इतिहास हमेशा से कड़े राजनीतिक संघर्षों का रहा है। राजेंद्र भारती की सदस्यता जाने के बाद उपजी सहानुभूति को भुनाने में कांग्रेस अपनी पूरी ताकत लगा रही है। दूसरी तरफ, भाजपा सरकारी कामकाज और जमीनी संगठन के दम पर आशुतोष तिवारी को जिताने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है। जमीन पर दोनों ही दलों के कार्यकर्ता सुबह से ही वोटरों को पोलिंग बूथ तक लाने की कोशिश में जुटे हुए हैं।

मंजलपुर में साख की लड़ाई

गुजरात की मंजलपुर विधानसभा सीट पर हो रहा उपचुनाव काफी भावुक परिस्थितियों में हो रहा है। यह सीट भाजपा के कद्दावर नेता, पूर्व मंत्री और लगातार आठ बार के विधायक रहे योगेश पटेल के निधन के कारण खाली हुई है। लंबी बीमारी से जूझने के बाद बीती दो जून को उनका देहांत हो गया था। साल 2008 में हुए परिसीमन के बाद वजूद में आई मंजलपुर सीट पर शुरुआत से ही भाजपा का दबदबा रहा है।

योगेश पटेल की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए भाजपा ने इस बार सतीश पटेल को अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं, कांग्रेस ने भीखाभाई रबारी को टिकट देकर मुकाबले को त्रिकोणीय और कड़ा बनाने का प्रयास किया है। भाजपा के लिए यह सीट जीतना उनके दिवंगत नेता को एक श्रद्धांजलि देने जैसा है, जबकि कांग्रेस यहां अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने के लिए संघर्ष कर रही है। देखना होगा कि स्थानीय मतदाता योगेश पटेल के पुराने कामों पर मुहर लगाते हैं या फिर किसी नए चेहरे को मौका देते हैं।

सुरक्षित और पारदर्शी मतदान

चुनाव आयोग ने तीनों ही राज्यों की इन सीटों पर निष्पक्ष, सुरक्षित और शांतिपूर्ण तरीके से मतदान संपन्न कराने के लिए कड़े इंतजाम किए हैं। गर्मी के मौसम और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मतदान केंद्रों पर पीने के पानी, छांव और प्राथमिक चिकित्सा की विशेष व्यवस्था की गई है। सुबह सात बजे वोटिंग शुरू होते ही पोलिंग बूथों पर सुरक्षा बलों की भारी तैनाती देखी गई ताकि किसी भी गड़बड़ी को रोका जा सके।

“लोकतंत्र की मजबूती मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी से ही संभव है। चुनाव आयोग ने निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए हैं और मतदाता बिना किसी भय के अपने मत का प्रयोग कर रहे हैं।”

सभी मतदान केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के साथ-साथ वीवीपैट (VVPAT) मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे मतदाता खुद यह देख पा रहे हैं कि उनका वोट सही उम्मीदवार को गया है। संवेदनशील बूथों पर अतिरिक्त सुरक्षा बलों और सीसीटीवी कैमरों के जरिए सीधी निगरानी रखी जा रही है ताकि मतदान में पारदर्शिता बनी रहे।

तीनों सीटों के नतीजे

इन तीनों विधानसभा सीटों पर आज हो रहे मतदान के बाद सभी उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में बंद हो जाएगी। इसके बाद मुख्य मुकाबला मतगणना के दिन यानी 3 अगस्त को देखने को मिलेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन उपचुनावों के परिणाम केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि तीनों राज्यों की राजनीति पर भी गहरा प्रभाव डालेंगे। भाजपा के लिए इन सीटों को बरकरार रखना अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने का प्रमाण होगा, जबकि विपक्षी दलों के लिए यह अपना जनाधार साबित करने का बेहतरीन मौका है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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