Founder – Mohan Milan

कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई हुए भाजपा में शामिल

गुवाहाटी/नई दिल्ली,अंग भारत। असम के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और नगांव के सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने कांग्रेस का हाथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया है। यह राजनीतिक घटनाक्रम असम में 2026 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले कांग्रेस के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। प्रद्युत बोरदोलोई ने पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद बुधवार को नई दिल्ली में औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। इस महत्वपूर्ण मौके पर असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया प्रमुख रूप से मौजूद थे।

भाजपा में शामिल

सांसद प्रद्युत बोरदोलोई का भाजपा में स्वागत करने के लिए नई दिल्ली में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस दौरान केंद्रीय मंत्री पवित्र मार्घेरिटा, भाजपा सांसद प्रदान बरुवा और सांसद कामाख्या प्रसाद तासा की उपस्थिति रही। बोरदोलोई का यह निर्णय रातों-रात नहीं लिया गया, बल्कि उन्होंने पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को अपना इस्तीफा सौंपा। वे नगांव लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे और उनका पार्टी छोड़ना कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे के लिए एक बड़ी चुनौती है।

चुनावी समीकरण बदले

प्रद्युत बोरदोलोई केवल एक सांसद नहीं, बल्कि असम कांग्रेस की रणनीतिक धुरी थे। उनके इस्तीफे के मायने निम्नलिखित बिंदुओं से समझे जा सकते हैं:

  • घोषणा पत्र की कमान: वे असम विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की घोषणा पत्र कमेटी के चेयरमैन थे। उनकी अनुपस्थिति में पार्टी को नई रणनीति बनानी होगी।
  • सांसदों की संख्या: बोरदोलोई के जाने से असम में कांग्रेस के तीन मौजूदा सांसदों में से एक कम हो गया है।
  • पार्टी का मनोबल: भूपेन कुमार बोरा के जाने के एक महीने के भीतर यह दूसरा बड़ा दलबदल है, जो कार्यकर्ताओं में मायूसी पैदा कर रहा है।

अंदरूनी कलह और असंतोष

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस दलबदल पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वीकार किया कि पार्टी के भीतर कुछ मतभेद थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि टिकट बंटवारे को लेकर प्रद्युत बोरदोलोई असंतुष्ट थे। यह असंतोष न केवल टिकट वितरण तक सीमित था, बल्कि पार्टी की कार्यप्रणाली में बदलाव की कमी को भी दर्शाता है। बोरदोलोई जैसे वरिष्ठ नेता का जाना बताता है कि कांग्रेस असम में आंतरिक तालमेल बिठाने में विफल रही है।

मुख्यमंत्री का बड़ा बयान

असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने प्रद्युत बोरदोलोई की कार्यकुशलता की तारीफ करते हुए उनके राजनीतिक सफर को याद किया। डॉ. सरमा ने कहा कि 1975 में छात्र जीवन से ही बोरदोलोई ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा था। मुख्यमंत्री ने आगे कहा:

“प्रद्युत बोरदोलोई ने 2001 में तरुण गोगोई के कार्यकाल में गृह मंत्री के रूप में बेहतरीन काम किया था। वर्तमान कांग्रेस में अब किसी हिंदू नेता के लिए कोई जगह नहीं बची है। 2016 से हमने अच्छे नेताओं को भाजपा में लाने का जो सिलसिला शुरू किया था, वह आगे भी जारी रहेगा।”

भविष्य पर असर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रद्युत बोरदोलोई का भाजपा में आना महज एक दलबदल नहीं, बल्कि राज्य की सत्ता के केंद्र में बदलाव का संकेत है। भाजपा इस समय “कांग्रेस मुक्त असम” के अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए आक्रामक रणनीति पर काम कर रही है। दूसरी ओर, कांग्रेस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपने बचे हुए नेताओं को एकजुट रखने और नए नेतृत्व को सामने लाने की है।

आने वाले हफ्तों में चुनावी सरगर्मी और तेज होगी। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस अपनी खोई हुई साख वापस पा सकती है या बोरदोलोई का जाना पार्टी के पतन की एक और कड़ी साबित होगा। उनके समर्थकों के बीच भी अब संशय की स्थिति है, क्योंकि एक कद्दावर नेता का पाला बदलना जमीनी स्तर पर वोट बैंक को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।

Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram
Picture of अंग भारत • रिपोर्टर

अंग भारत • रिपोर्टर

‘अंग भारत’ एक हिंदी दैनिक समाचार पत्र है, जो मिलन ग्रुप द्वारा संचालित एक बहुआयामी मीडिया संगठन का हिस्सा है। हमारा कॉर्पोरेट कार्यालय बिहार के ऐतिहासिक अंग प्रदेश के पवित्र स्थान बांका में स्थित है। हमारा उद्देश्य निष्पक्ष, विश्वसनीय और जनहित से जुड़ी खबरों को पाठकों तक पहुंचाना है।”

Related Posts
Recent Posts
App Icon