कोलकाता,अंग भारत। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के दौरान भवानीपुर, रासबिहारी, दमदम और न्यूटाउन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में मतदान प्रक्रिया के दौरान राजनीतिक तनाव और तकनीकी खामियों ने चुनावी सरगर्मी को काफी बढ़ा दिया है। मतदान केंद्रों पर कहीं ईवीएम की खराबी की शिकायतें मिलीं, तो कहीं पोलिंग एजेंटों को रोकने के आरोपों ने चुनावी पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन तमाम बाधाओं के बावजूद, चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन स्थिति को नियंत्रण में रखने और मतदान को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पूरी तरह सक्रिय हैं।
भवानीपुर में पुलिस सख्ती
भवानीपुर विधानसभा सीट पर उस समय माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया जब पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भाई कार्तिक बनर्जी, जो तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी भी हैं, उन्हें मतदान केंद्र के पास कुछ समर्थकों के साथ बैठे देखा गया। कानून के मुताबिक, चुनाव वाले दिन किसी भी बूथ के दायरे में चार से अधिक लोगों के जमा होने पर पाबंदी होती है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर न केवल उन्हें वहां से हटने की चेतावनी दी, बल्कि सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया ताकि प्रक्रिया में कोई दखल न हो।
रासबिहारी में एजेंट विवाद
रासबिहारी के चुनावी रण में कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि उनके पोलिंग एजेंटों को बूथ में प्रवेश करने से रोका गया। उनका सीधा आरोप था कि टीएमसी के कार्यकर्ता मतदान को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे। एक निष्पक्ष चुनाव में पोलिंग एजेंट की भूमिका बहुत अहम होती है, क्योंकि वे बूथ पर निगरानी रखते हैं। ऐसे में इस तरह के आरोपों ने विपक्षी दलों के बीच चिंता पैदा कर दी है।
प्रमुख उम्मीदवार और मुकाबला
रासबिहारी सीट का गणित इस बार काफी दिलचस्प है। यहां दिग्गजों की साख दांव पर लगी है:
- कांग्रेस: आशुतोष चट्टोपाध्याय
- तृणमूल कांग्रेस: देवाशीष कुमार
- भाजपा: स्वपन दासगुप्ता (पूर्व पत्रकार)
- सीपीआई (एमएल) लिबरेशन: मानस घोष
तकनीकी और ईवीएम समस्याएं
दमदम और न्यूटाउन के इलाकों में मतदाताओं को मशीनी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उत्तर दमदम के एक बूथ पर तो विवाद तब शुरू हुआ जब तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न वाले बटन पर कथित तौर पर स्याही लगी होने की शिकायत सामने आई। इसके अलावा, मॉक पोलिंग के दौरान भी ईवीएम में खराबी की सूचना मिली, जिससे मतदाताओं की लंबी कतारें लग गईं और समय की बर्बादी हुई।
न्यूटाउन में देरी का असर
राजारहाट-न्यूटाउन के आदित्य अकादमी बूथ पर मतदान तय समय पर शुरू ही नहीं हो पाया। भाजपा उम्मीदवार पीयूष कनोड़िया ने इस देरी पर कड़ी आपत्ति जताई। तकनीकी खराबी के कारण जब वोटिंग देरी से शुरू होती है, तो इसका सीधा असर मतदान प्रतिशत पर पड़ता है। उम्मीदवारों ने चुनाव आयोग से मांग की कि ऐसी खामियों को तुरंत दुरुस्त किया जाए ताकि लोगों का लोकतंत्र पर भरोसा बना रहे।
प्रशासन की कड़ी निगरानी
इन तमाम विवादों के बीच, चुनाव आयोग और राज्य प्रशासन ने सुरक्षा के घेरे को और अधिक मजबूत कर दिया है। संवेदनशील बूथों की पहचान करके वहां सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है। चुनाव आयोग की कोशिश है कि किसी भी प्रकार की तकनीकी गड़बड़ी या उपद्रव को देखते ही तुरंत एक्शन लिया जाए।
निष्पक्ष चुनाव की चुनौती
चुनाव आयोग का आधिकारिक रुख साफ है कि किसी भी कीमत पर मतदान को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। चाहे ईवीएम की खराबी हो या फिर एजेंटों को लेकर विवाद, अधिकारियों ने हर शिकायत पर संज्ञान लिया है। सुरक्षा बलों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखें ताकि आम नागरिक बिना किसी डर या दबाव के अपना वोट डाल सकें। दिन भर चली इन उठापटक के बीच, प्रशासनिक तंत्र के लिए यह एक कठिन अग्निपरीक्षा साबित हुई है।








