पूर्वी सिंहभूम,अंग भारत। झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले का बहरागोड़ा प्रखंड इन दिनों एक गंभीर सुरक्षा चुनौती से जूझ रहा है, जहां लगातार संदिग्ध विस्फोटक मिलने से ग्रामीणों में भारी दहशत है। हाल ही में बरागाड़िया पंचायत के पानीपाड़ा गांव में स्वर्णरेखा नदी के किनारे एक सिलेंडरनुमा वस्तु मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ गई है। यह घटना कोई इकलौती नहीं है, बल्कि पिछले कुछ हफ्तों में हुई घटनाओं की एक कड़ी है, जिसने बहरागोड़ा की शांति को खतरे में डाल दिया है। जब ग्रामीण देर रात नदी किनारे सैर कर रहे थे, तो उन्हें कुछ अजीब चमकती हुई चीज दिखाई दी, जिसे बाद में एक संदिग्ध बम होने का अंदेशा जताया गया।
नदी किनारे संदिग्ध वस्तु
बुधवार देर रात जब पानीपाड़ा के निवासियों ने इस संदिग्ध वस्तु को देखा, तो वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। उत्सुकता और डर के बीच, कुछ लोगों ने बिना सोचे-समझे उसे नदी से बाहर निकाल लिया। यह कदम बेहद खतरनाक हो सकता था, क्योंकि पुराने विस्फोटक अनस्टेबल हो सकते हैं। ग्रामीणों की यह घबराहट वाजिब है, क्योंकि बहरागोड़ा का इतिहास अब पुराने युद्धकालीन हथियारों के मिलने से जुड़ गया है। अब पूरा गांव इस बात से सहमा हुआ है कि अगली बार ऐसी चीज उनके घर या खेत के पास न मिल जाए।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
सूचना मिलते ही बहरागोड़ा थाना पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए इलाके को सील कर दिया। सुरक्षा का घेरा बनाते हुए आम जनता की आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई है। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए बम निरोधक दस्ते (Bomb Disposal Squad) को बुलाया गया है ताकि वैज्ञानिक तरीके से जांच हो सके। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जब तक तकनीकी जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी तरह के दावे करना जल्दबाजी होगी। इलाके में अब सघन सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है ताकि ऐसी और भी कोई सामग्री छिपी न हो।
पुराने बमों का इतिहास
यह इलाका अचानक से सुरक्षा एजेंसियों के लिए हॉटस्पॉट बन गया है। इन घटनाओं का सिलसिला अचानक शुरू नहीं हुआ है:
- 17 मार्च: पानीपाड़ा गांव के पास ही एक संदिग्ध बम बरामद हुआ था।
- 24 मार्च: द्वितीय विश्व युद्ध काल का एक अमेरिकी बम मिला था, जिसे सेना ने विशेष निगरानी में निष्क्रिय किया।
- वर्तमान स्थिति: लगातार मिल रहे इन बमों ने इलाके में पुराने युद्ध सामग्री के दबे होने की आशंका को बल दे दिया है।
ग्रामीणों की भारी चिंता
लगातार हो रही इन बरामदगी ने स्थानीय निवासियों की रातों की नींद उड़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्वर्णरेखा नदी का किनारा है जहां बच्चे खेलते हैं और किसान खेती करते हैं। यदि प्रशासन ने इस पूरे क्षेत्र की वैज्ञानिक तरीके से मैपिंग और खुदाई नहीं करवाई, तो कोई बड़ी दुर्घटना कभी भी हो सकती है। लोग अब मांग कर रहे हैं कि सरकार इस मामले को हल्के में न ले और विशेषज्ञों की टीम को बुलाकर पूरे इलाके को ‘क्लियरेंस’ सर्टिफिकेट दे।
प्रशासन की कड़ी चेतावनी
पुलिस अधिकारियों ने लोगों के लिए एक गाइडलाइन जारी की है। प्रशासन ने साफ कहा है कि यदि नदी किनारे या किसी सुनसान जगह पर कोई भी धातु का टुकड़ा, सिलेंडर या पुरानी दिखने वाली वस्तु मिले, तो उसे छूने की गलती न करें।
“किसी भी संदिग्ध वस्तु को हाथ न लगाएं और तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दें। आपकी एक छोटी सी लापरवाही बड़े हादसे का कारण बन सकती है।”
फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां इलाके पर कड़ी नजर रखे हुए हैं। बहरागोड़ा के लोग अब बस इस उम्मीद में हैं कि कब यह डर का माहौल खत्म होगा और वे वापस अपनी सामान्य जिंदगी जी पाएंगे।








