‘हीरुदा’ की कविताओं ने असमिया साहित्य को नई पहचान दी, उनकी रचनाएं हमेशा प्रेरणा देती रहेंगी : मुख्यमंत्री
गुवाहाटी,अंग भारत। असम के लोकप्रिय कवि हीरेन भट्टाचार्य की पुण्यतिथि पर शनिवार को पूरा साहित्य जगत उन्हें याद करता नजर आया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि हीरेन भट्टाचार्य ने अपनी सहज और संवेदनशील कविताओं के जरिए असमिया साहित्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनकी रचनाएं आज भी लोगों के दिलों में उसी तरह बसती हैं, जैसे उनके जीवनकाल में बसती थीं।मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने संदेश में कहा कि हीरेन भट्टाचार्य केवल एक कवि नहीं थे, बल्कि वे असम की सांस्कृतिक चेतना की मजबूत आवाज थे। उन्होंने अपनी लेखनी से समाज की भावनाओं, संघर्षों और उम्मीदों को बेहद सरल शब्दों में अभिव्यक्त किया।
‘हीरुदा’ नाम से मिली अलग पहचान
असमिया साहित्य में हीरेन भट्टाचार्य को लोग प्यार से ‘हीरुदा’ कहकर पुकारते थे। मुख्यमंत्री ने भी अपने संदेश में इसी नाम का उल्लेख करते हुए कहा कि शब्दों को सीधे लोगों के दिल तक पहुंचाने की कला उनमें अद्भुत थी। उनकी कविताएं पढ़ने वाला हर व्यक्ति उनसे खुद को जुड़ा हुआ महसूस करता था।डॉ. सरमा ने कहा कि आधुनिक असमिया कविता को नई दिशा देने में हीरेन भट्टाचार्य की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। उन्होंने कविता को सिर्फ साहित्य तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे आम लोगों के जीवन, उनकी खुशियों, दुखों और भावनाओं से जोड़ दिया।
सरल शब्दों में गहरी बातें कहने की थी कला
मुख्यमंत्री ने कहा कि हीरेन भट्टाचार्य की सबसे बड़ी खासियत उनकी सादगी थी। उनकी कविताओं में कठिन शब्दों का दिखावा नहीं मिलता, लेकिन हर रचना गहरी संवेदनाओं और जीवन के अनुभवों से भरी होती थी। यही वजह है कि उनकी रचनाएं हर उम्र के पाठकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं।उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े साहित्यकार की पहचान यही होती है कि उसकी रचनाएं समय के साथ पुरानी नहीं पड़तीं। हीरेन भट्टाचार्य की कविताएं भी आज के दौर में उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी अपने समय में थीं।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं उनकी रचनाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि हीरेन भट्टाचार्य की साहित्यिक विरासत आने वाले वर्षों में भी नई पीढ़ी का मार्गदर्शन करती रहेगी। उनकी कविताएं सिर्फ भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं हैं, बल्कि समाज को बेहतर बनाने का संदेश भी देती हैं।उन्होंने कहा कि असम की भाषा, संस्कृति और साहित्य को समृद्ध बनाने में हीरेन भट्टाचार्य का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। उनके विचार और उनकी लेखनी आने वाले समय में भी साहित्य प्रेमियों को प्रेरित करती रहेगी।
मुख्यमंत्री ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
अपने संदेश के अंत में डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने दिवंगत कवि को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि ऐसे महान साहित्यकार कभी भुलाए नहीं जा सकते। उनकी रचनाएं और विचार हमेशा लोगों के बीच जीवित रहेंगे और असमिया साहित्य की अमूल्य धरोहर बने रहेंगे।











