पटना,अंग भारत। बिहार की राजनीति में इस समय भूचाल जैसी स्थिति है और आने वाले 48 घंटे राज्य की सत्ता की दिशा तय करने के लिए निर्णायक साबित होंगे। पटना में नई सरकार के गठन और संभावित शपथ ग्रहण समारोह के लिए प्रशासनिक स्तर पर युद्धस्तर पर तैयारियां चल रही हैं, जिसे देखते हुए राजभवन और सचिवालय में हलचल तेज हो गई है। सोमवार की सुबह राज्यपाल द्वारा पटना के जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम को लोकभवन बुलाए जाने को इसी कवायद का हिस्सा माना जा रहा है। प्रशासनिक हलकों में इसे संकेत माना जा रहा है कि शीर्ष स्तर पर शपथ ग्रहण की तैयारियों को अंतिम रूप देने का काम शुरू हो चुका है, जिससे राज्य के सभी सरकारी विभागों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
हलचल का केंद्र राजभवन
राजभवन में अधिकारियों की मौजूदगी महज एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह एक बड़े बदलाव की आहट है। जब भी जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों को राजभवन तलब किया जाता है, तो यह स्पष्ट संकेत होता है कि किसी बड़े सार्वजनिक आयोजन या राजनीतिक घटनाक्रम की रूपरेखा तैयार की जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था, प्रोटोकॉल और अतिथियों के बैठने की व्यवस्था जैसे बिंदुओं पर चर्चा के लिए जिलाधिकारी का वहां पहुंचना यह दर्शाता है कि अगले कुछ घंटों में बिहार की राजनीति में कोई बड़ा प्रशासनिक ऐलान हो सकता है।
कैबिनेट बैठक के मायने
सभी की नजरें 14 अप्रैल को प्रस्तावित कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक पर टिकी हैं। यह बैठक केवल नियमित कामकाज तक सीमित नहीं रहने वाली, बल्कि इसमें नई सरकार के गठन की औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि:
- नई सरकार के शपथ ग्रहण का समय और स्थान तय हो सकता है।
- मंत्रिमंडल के स्वरूप पर चर्चा की जा सकती है।
- राज्य के आगामी नीतिगत फैसलों पर मुहर लग सकती है।
- सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया को संवैधानिक रूप से आगे बढ़ाया जाएगा।
1 अण्णे मार्ग पर हलचल
मुख्यमंत्री आवास, 1 अण्णे मार्ग, इन दिनों बिहार की राजनीति का ‘पावर सेंटर’ बना हुआ है। वहां लगातार बड़े नेताओं का जमावड़ा लगा है। जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और मंत्री विजय चौधरी जैसे दिग्गज नेताओं की वहां मौजूदगी यह बताने के लिए काफी है कि सत्ता के गलियारों में गहन मंथन चल रहा है। ये नेता भविष्य की रणनीति और गठबंधन के तालमेल को लेकर एक-दूसरे के संपर्क में हैं। संजय झा ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि सब कुछ तय योजना के अनुसार ही हो रहा है, जिससे यह संदेश जाता है कि सरकार किसी भी अनिश्चितता के दौर में नहीं है।
भाजपा की सक्रिय भूमिका
भारतीय जनता पार्टी भी इस पूरे परिदृश्य में अपनी भूमिका को लेकर पूरी तरह सतर्क है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में पटना भेजा जा रहा है, जो यह साबित करता है कि भाजपा नेतृत्व इसे बेहद गंभीरता से ले रहा है। विधायक दल के नेता का चुनाव हो या गठबंधन के साथियों के साथ समन्वय, भाजपा कोई भी कसर छोड़ने के मूड में नहीं दिखती। शिवराज सिंह चौहान का पटना आगमन केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि भाजपा की आगामी बिहार रणनीति का एक बड़ा हिस्सा माना जा रहा है।
शपथ ग्रहण और अटकलें
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोर-शोर से चल रही है कि नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री की उपस्थिति हो सकती है। अगर ऐसा होता है, तो यह बिहार के राजनीतिक इतिहास का एक बड़ा घटनाक्रम होगा। हालांकि, अभी तक आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासनिक स्तर पर चल रही तैयारियां कुछ ऐसे ही बड़े आयोजन की ओर इशारा करती हैं।
आगे क्या होगा?
अगले 48 घंटे बिहार के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। क्या सरकार में कोई बड़ा फेरबदल होगा या गठबंधन में कुछ नए समीकरण उभर कर सामने आएंगे, यह तो समय ही बताएगा। फिलहाल, मुख्यमंत्री खुद हर बारीक गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं। जो भी हो, पटना की सड़कों पर दिख रही सुरक्षा और नेताओं की भागदौड़ यह बताने के लिए पर्याप्त है कि बिहार में एक बड़ा राजनीतिक अध्याय लिखा जाने वाला है।
नोट: बिहार की राजनीति का हर मोड़ अब दिल्ली और पटना के बीच चल रही तालमेल पर निर्भर करता है। स्थिति स्पष्ट होते ही आधिकारिक घोषणाओं का सिलसिला शुरू हो जाएगा।








