तेहरान,अंग भारत। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। ईरान की सशस्त्र सेना के वरिष्ठ प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अबोलफजल शेकारची ने कहा है कि यदि ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमला किया गया तो जवाब में पूरे पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया जाएगा। उनके इस बयान के बाद क्षेत्र में पहले से चल रहा तनाव और बढ़ गया है।ईरानी अधिकारियों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में मौजूदा अस्थिरता के लिए अमेरिका जिम्मेदार है। उनका आरोप है कि अमेरिकी सैन्य गतिविधियों और नौसैनिक मौजूदगी ने क्षेत्र की सुरक्षा को प्रभावित किया है।
‘हमारे सैन्य ठिकानों पर हमला हुआ तो जवाब मिलेगा’
ईरानी सरकारी प्रसारण संस्था आईआरआईबी को दिए एक इंटरव्यू में ब्रिगेडियर जनरल शेकारची ने कहा कि यदि ईरान के सैन्य केंद्रों या रणनीतिक ठिकानों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई तो जवाब बेहद सख्त होगा।उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिका से जुड़े सैन्य ठिकाने और अन्य रणनीतिक ढांचे ईरान के निशाने पर होंगे। उनके अनुसार, ईरान किसी भी सैन्य कार्रवाई का जवाब पूरी ताकत से देगा और लंबे समय तक संघर्ष के लिए भी तैयार है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी दिया बयान
ईरानी प्रवक्ता ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान के नियंत्रण में पूरी तरह सुरक्षित है। उनका आरोप है कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग में बढ़ते तनाव की मुख्य वजह अमेरिकी नौसैनिक मौजूदगी और उसकी गतिविधियां हैं।उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और इजराइल को इस क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी का कोई अधिकार नहीं है। साथ ही पड़ोसी देशों से अपील की कि वे क्षेत्रीय सुरक्षा बनाए रखने के लिए ईरान का सहयोग करें।
खतम-अल-अंबिया मुख्यालय ने भी दी चेतावनी
ईरान की सबसे बड़ी सैन्य ऑपरेशनल कमांड खतम-अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने भी इसी तरह का कड़ा बयान जारी किया है।इस कमांड का कहना है कि अमेरिका को किसी भी स्थिति में होर्मुज जलडमरूमध्य में दखल देने की अनुमति नहीं दी जाएगी। बयान में आरोप लगाया गया कि अमेरिका ईरान के तेल और गैस निर्यात मार्गों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।ईरानी सैन्य नेतृत्व ने चेतावनी दी कि यदि ऐसी गतिविधियां जारी रहीं तो अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के क्षेत्रीय हितों से जुड़े ढांचों को निशाना बनाया जा सकता है।
क्या है होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की बड़ी मात्रा इसी रास्ते से दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचती है।यही वजह है कि इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक व्यापार पर सीधा असर डाल सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा तनाव
यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, हाल के दिनों में अमेरिका ने ईरान के दक्षिणी समुद्री क्षेत्रों में अपनी नौसैनिक गतिविधियां बढ़ाई हैं और कुछ सैन्य अभियानों को भी तेज किया है।इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि यदि दोनों देशों के बीच कोई समझौता नहीं हुआ तो अमेरिकी कार्रवाई और तेज हो सकती है। उनके अनुसार, भविष्य में ईरान के ऊर्जा ढांचे और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को भी निशाना बनाया जा सकता है।
पूरी दुनिया की नजरें हालात पर
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते बयानबाजी के इस दौर ने पूरे पश्चिम एशिया की स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। रक्षा और विदेश नीति के जानकारों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका असर सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी पड़ सकता है।हालांकि फिलहाल दोनों देशों की ओर से बयानबाजी जारी है और आगे की स्थिति कूटनीतिक प्रयासों तथा सैन्य गतिविधियों पर निर्भर करेगी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है।







