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अंबुबासी महायोग की निवृत्ति के बाद श्रद्धालुओं के लिए खुले मां कामाख्या मंदिर के कपाट

गुवाहाटी,अंग भारत। पूर्वोत्तर भारत के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शामिल अंबुबासी मेला संपन्न होने के बाद गुरुवार सुबह मां कामाख्या मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए गए। मंदिर खुलते ही नीलाचल पहाड़ी स्थित शक्तिपीठ में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। देर रात से ही भक्त लंबी कतारों में खड़े होकर माता के दर्शन का इंतजार करते रहे।

अंबुबासी महायोग के बाद खुले मंदिर के द्वार

हर वर्ष आयोजित होने वाले अंबुबासी महायोग के दौरान धार्मिक मान्यता के अनुसार मां कामाख्या रजस्वला होती हैं। इस अवधि में मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद रहते हैं। इस वर्ष 22 जून को महायोग शुरू होने के साथ ही मंदिर के द्वार बंद कर दिए गए थे। अंबुबासी महायोग की निवृत्ति बुधवार देर रात 12 बजकर 02 मिनट और 13 सेकेंड पर हुई।इसके बाद मंदिर के पुजारियों ने विधि-विधान से विशेष पूजा-अर्चना, शुद्धिकरण और साफ-सफाई की प्रक्रिया पूरी की। सभी धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होने के बाद गुरुवार सुबह श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए गए।

रातभर कतार में डटे रहे श्रद्धालु

मां कामाख्या के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। बड़ी संख्या में भक्त बुधवार रात से ही मंदिर परिसर के बाहर लाइन में लग गए थे। कई श्रद्धालुओं ने बताया कि वे सुबह तीन बजे से पहले ही मंदिर पहुंच गए थे ताकि सबसे पहले माता के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त कर सकें।मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे, जिससे दर्शन प्रक्रिया सुचारु रूप से चलती रही।

राज्यपाल और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने किए दर्शन

मंदिर के कपाट खुलने के बाद असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य भी मां कामाख्या के दर्शन के लिए पहुंचे। उनके साथ असम भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद दिलीप सैकिया ने भी पूजा-अर्चना की।दोनों नेताओं ने अंबुबासी मेले के सफल आयोजन के लिए मंदिर परिचालन समिति, राज्य सरकार, कामरूप (मेट्रो) जिला प्रशासन, पुलिस, सुरक्षा बलों और विभिन्न समाजसेवी संगठनों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सभी के सामूहिक प्रयासों से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।

आठ लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान

असम सरकार, कामरूप (मेट्रो) जिला प्रशासन और मंदिर परिचालन समिति ने इस वर्ष अंबुबासी मेले में आठ लाख से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने का अनुमान लगाया था। मंदिर परिचालन समिति के दोलोई समाज के अनुसार, इस बार श्रद्धालुओं की संख्या अनुमान से भी अधिक रही और लाखों भक्तों ने मां कामाख्या के दरबार में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

तंत्र साधना का सबसे महत्वपूर्ण पर्व

अंबुबासी महायोग को तंत्र साधना की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। देश-विदेश से बड़ी संख्या में साधु-संत, तांत्रिक और श्रद्धालु इस अवसर पर कामाख्या धाम पहुंचते हैं। यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का भी प्रमुख केंद्र माना जाता है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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