Founder – Mohan Milan

जान जोखिम में डालकर बिजली बहाल कर रहे मानव बल, सुरक्षा उपकरणों का अभाव

बिहार,अंग भारत| अमरपुर प्रखंड में तैनात बिजली विभाग के मानव बल (लाइनमैन) अपनी जान को जोखिम में डालकर उपभोक्ताओं के घरों तक बिजली पहुंचा रहे हैं। आज के डिजिटल युग में, जहां सुरक्षा मानकों को सबसे ऊपर रखा जाना चाहिए, ये कर्मचारी बिना किसी आधुनिक सुरक्षा उपकरण या किट के काम करने को मजबूर हैं। न तो इनके पास इंसुलेटेड जूते हैं और न ही भरोसेमंद सुरक्षा बेल्ट, फिर भी वे बिजली के खंभों पर चढ़कर तकनीकी खामियों को दुरुस्त करते हैं। यह लेख अमरपुर के उन अनसंग हीरोज की हकीकत को बयां करता है जो संसाधनों की कमी के बावजूद अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं।

बांस की सीढ़ी का जोखिम

विभाग की ओर से आधुनिक हाइड्रोलिक सीढ़ियां या सुरक्षित इंसुलेटेड सीढ़ियां उपलब्ध न होने के कारण, लाइनमैन आज भी बांस की बनी सीढ़ी का उपयोग करने को मजबूर हैं। यह न केवल पुराना तरीका है, बल्कि जानलेवा भी है। बांस की सीढ़ी बिजली के खंभों के साथ ठीक से संतुलित नहीं हो पाती, जिससे फिसलने या गिरने का खतरा हर वक्त बना रहता है। जब लाइनमैन खंभे के ऊपरी हिस्से पर काम कर रहे होते हैं, तो उनका पूरा जीवन इस पुरानी सीढ़ी पर ही टिका होता है। यह एक ऐसा दृश्य है जिसे देखकर कोई भी सहम जाए, लेकिन उनके लिए यह रोज का काम है।

भीषण गर्मी में चुनौतियां

गर्मियों के दौरान बिजली की खपत अचानक बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर ट्रांसफॉर्मर और तारों पर पड़ता है। ऐसे में फॉल्ट की घटनाएं आम हो जाती हैं। उपभोक्ताओं की लगातार फोन कॉल और दबाव के बीच ये कर्मी बिना किसी आराम के काम करते हैं। स्थिति तब और खराब हो जाती है जब मौसम भी साथ न दे। बारिश या आंधी के दौरान बिजली लाइनों को ठीक करना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होता। इन विपरीत परिस्थितियों में भी, वे अपनी जान जोखिम में डालकर बिजली बहाली के लिए काम पर निकल पड़ते हैं।

उपकरणों की भारी कमी

  • सुरक्षा बेल्ट (Safety Belt): ऊंचाई पर काम करते समय गिरने से बचाने वाला सबसे बुनियादी उपकरण नदारद है।
  • इंसुलेटेड ग्लव्स (Insulated Gloves): बिजली के काम में करंट से बचाने वाला सबसे जरूरी कवच ही उपलब्ध नहीं है।
  • हेलमेट (Helmet): सिर की सुरक्षा के लिए किसी भी प्रकार के प्रोटेक्टिव हेलमेट का अभाव है।
  • आधुनिक सीढ़ी: इंसुलेटेड और मजबूत सीढ़ियों की जगह पुराने ढर्रे वाली बांस की सीढ़ी ही एकमात्र सहारा है।

हाई वोल्टेज से जंग

अमरपुर के लाइनमैनों के लिए सबसे भयावह तब होता है जब 33 हजार वोल्ट की हाई वोल्टेज लाइनों में फॉल्ट आता है। इन लाइनों में खराबी का मतलब है पूरे इलाके की बिजली का कट जाना। ऐसे में उन्हें रात के अंधेरे में भी काम करना पड़ता है। बिना पर्याप्त रोशनी और सुरक्षा गियर के, इतनी उच्च वोल्टेज वाली लाइन के पास काम करना मौत को न्योता देने जैसा है। कई बार उन्हें अलग-अलग गांवों के खेतों में जाकर फॉल्ट ढूंढना पड़ता है, जो अपने आप में एक जोखिम भरा कार्य है।

स्थानीय लोगों का समर्थन

क्षेत्र के निवासी भी इस स्थिति को देख रहे हैं और वे खुलकर इन कर्मचारियों का समर्थन कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर ये कर्मचारी न हों, तो पूरा क्षेत्र अंधेरे में डूब जाएगा। उनकी निष्ठा की लोग प्रशंसा करते हैं, लेकिन साथ ही विभाग की उदासीनता पर सवाल भी उठाते हैं। स्थानीय ग्रामीणों का मानना है कि जो व्यक्ति आपके घर की रोशनी के लिए अपनी जान दांव पर लगा रहा है, उसे कम से कम सुरक्षा किट तो मिलनी ही चाहिए।

बेहतर भविष्य की मांग

अब समय आ गया है कि विभाग की कार्यप्रणाली में बदलाव आए। इन कर्मचारियों की मांगें बहुत मामूली हैं—काम करने के लिए सुरक्षित उपकरण और समय-समय पर सुरक्षा संबंधी ट्रेनिंग। अगर उन्हें सही उपकरण दिए जाएं, तो न केवल दुर्घटनाओं का आंकड़ा घटेगा, बल्कि बिजली बहाली का काम भी कहीं ज्यादा तेजी से हो सकेगा।

अधिकारियों को संदेश

बिजली विभाग के उच्च अधिकारियों के लिए यह एक चेतावनी है। एक भी छोटी सी लापरवाही किसी परिवार की दुनिया उजाड़ सकती है। सुरक्षा को केवल कागजों तक सीमित न रखकर, इसे जमीनी स्तर पर लागू करना अनिवार्य है। जब तक लाइनमैनों को हेलमेट, ग्लव्स और इंसुलेटेड उपकरण नहीं मिलेंगे, तब तक ये ‘विद्युत रक्षक’ अपनी जान जोखिम में डालकर ही काम करते रहेंगे।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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