नई दिल्ली,अंग भारत। चुनाव आयोग ने आज शाम 4:00 बजे प्रेस कांफ्रेंस कर पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा कर दी है, जिसके साथ ही केरल, असम, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। आयोग द्वारा जारी इस विस्तृत चुनावी कैलेंडर के अनुसार, लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए मतदान और मतगणना की तिथियां निर्धारित कर दी गई हैं, जिससे राजनीतिक दलों और प्रशासनिक तंत्र के लिए अब चुनावी मोड में आने का समय शुरू हो गया है।
चुनाव की मुख्य तिथियां
भारत निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, पांचों राज्यों में मतदान की प्रक्रिया को अलग-अलग चरणों में विभाजित किया गया है। पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है कि मतगणना की प्रक्रिया सभी राज्यों के लिए एक साथ पूरी की जाएगी।
- पश्चिम बंगाल: दो चरणों में मतदान – 23 अप्रैल और 29 अप्रैल।
- असम: मतदान तिथि – 9 अप्रैल।
- पुडुचेरी: मतदान तिथि – 9 अप्रैल।
- तमिलनाडु: मतदान तिथि – 23 अप्रैल।
- केरल: मतदान तिथि – 9 अप्रैल।
- परिणाम: सभी पांच राज्यों की मतगणना एक साथ 4 मई को होगी।
आचार संहिता के नियम
आदर्श आचार संहिता लागू होते ही संबंधित राज्यों में सत्ताधारी दलों के लिए सरकारी मशीनरी का उपयोग करना पूरी तरह प्रतिबंधित हो गया है। चुनाव आयोग के कड़े निर्देशों का पालन करना हर राजनीतिक दल और प्रत्याशी के लिए अनिवार्य है। इसका मुख्य उद्देश्य चुनावी माहौल को निष्पक्ष रखना और सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग रोकना होता है।
क्या प्रतिबंधित है?
- किसी भी नई सरकारी घोषणा या योजना का उद्घाटन करने पर रोक।
- सरकारी वाहनों का उपयोग चुनावी प्रचार के लिए नहीं किया जा सकता।
- किसी भी प्रकार की वित्तीय अनुदान या नई नियुक्तियों की घोषणा नहीं की जा सकती।
- धार्मिक स्थलों का उपयोग चुनाव प्रचार के मंच के रूप में करना वर्जित है।
प्रशासनिक तैयारियां तेज
चुनाव की तारीखों के ऐलान के तुरंत बाद से ही सभी संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। मतदान केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना, ईवीएम (EVM) मशीनों की जांच और संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करना अब प्रशासन की प्राथमिकता है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती पर भी चर्चा शुरू हो चुकी है ताकि मतदाता बिना किसी डर के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।
राजनीतिक दलों पर दबाव
तारीखों के घोषित होते ही पांचों राज्यों में सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। जहां एक ओर सत्ताधारी दल अपनी पिछले पांच वर्षों की उपलब्धियों को गिनाने में जुट गए हैं, वहीं विपक्षी पार्टियां जनता के बीच अपनी पैठ बनाने के लिए आक्रामक प्रचार अभियान की रूपरेखा तैयार कर रही हैं। सोशल मीडिया से लेकर जमीनी रैलियों तक, राजनीतिक दलों ने अपनी कमर कस ली है।
मतदान क्यों महत्वपूर्ण?
ये चुनाव न केवल राज्यों की स्थानीय राजनीति की दिशा तय करेंगे, बल्कि राष्ट्रीय पटल पर भी इन परिणामों के दूरगामी प्रभाव पड़ेंगे। पांचों राज्यों के सामाजिक और आर्थिक समीकरण भिन्न हैं, इसलिए इन चुनावों में जीत हासिल करने के लिए दलों को अलग-अलग रणनीतियां अपनानी होंगी।
आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे बढ़-चढ़कर इस लोकतांत्रिक उत्सव में हिस्सा लें। 4 मई को आने वाले परिणाम यह स्पष्ट कर देंगे कि अगले पांच वर्षों के लिए इन राज्यों की बागडोर किसके हाथों में होगी। तब तक, पूरा प्रशासनिक ढांचा ‘इलेक्शन मोड’ में रहेगा और हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर चुनाव आयोग की पैनी नजर बनी रहेगी।








