काठमांडू,अंग भारत। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर नेपाल के बुनियादी ढांचे के विकास पर पड़ रहा है, जिसके कारण देश की कई प्रमुख सड़क निर्माण परियोजनाएं या तो पूरी तरह ठप हो गई हैं या उनकी गति बेहद धीमी हो गई है। वैश्विक स्तर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण मार्गों पर तेल परिवहन में आई बाधा ने पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में भारी उछाल ला दिया है, जिसका परिणाम नेपाल के निर्माण क्षेत्र में बिटुमिन और डीजल की भीषण किल्लत के रूप में सामने आया है। सड़क परियोजनाओं में इस्तेमाल होने वाली कच्ची सामग्री की कमी और बेतहाशा बढ़ती कीमतों के कारण ठेकेदारों ने काम की रफ्तार कम कर दी है, जिससे सरकार की विकास योजनाओं की समयसीमा पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं।
परियोजनाओं पर गहरा संकट
नेपाल की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली सड़क विस्तार परियोजनाएं इस समय सबसे बुरे दौर से गुजर रही हैं। नारायणघाट-बुटवल सड़क विस्तार परियोजना, जो एशियाई विकास बैंक (ADB) और SASEC के सहयोग से बन रही है, इस संकट का एक बड़ा उदाहरण है।
- नारायणघाट-बुटवल खंड: लगभग 115 किलोमीटर लंबी इस सड़क का अंतिम चरण—यानी बिटुमिन की टॉप लेयर बिछाने का काम—पूरी तरह रुक गया है।
- अधूरा निर्माण: नारायणघाट-दाउन्ने के 65 किलोमीटर के हिस्से में 98 प्रतिशत काम पूरा होने के बावजूद ड्रेनेज और सुरक्षा फेंसिंग जैसे जरूरी काम अधूरे पड़े हैं।
- नागढुंगा-मुग्लिन परियोजना: 38 किलोमीटर लंबी इस सड़क पर अब तक सिर्फ 42 प्रतिशत काम ही हो पाया है, क्योंकि बिटुमिन की कमी ने ठेकेदारों को काम रोकने पर मजबूर कर दिया है।
कीमतों में बेतहाशा वृद्धि
निर्माण व्यवसायी महासंघ के आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में निर्माण सामग्री की कीमतों में जो उछाल आया है, उसने बजट के समीकरण पूरी तरह बिगाड़ दिए हैं। यह बढ़ोतरी ठेकेदारों और सरकार के बीच विवाद का मुख्य कारण बनी हुई है:
| सामग्री/ईंधन | पुरानी कीमत (प्रति लीटर/किग्रा) | नई कीमत (प्रति लीटर/किग्रा) |
|---|---|---|
| डीजल | 139 रुपये | 225 रुपये |
| बिटुमिन | 75 रुपये | 155 रुपये |
ठेकेदारों की नई मांग
निर्माण व्यवसायी महासंघ के अध्यक्ष निकोलस पाण्डेय के मुताबिक, लागत में हुई इस भारी बढ़ोतरी को झेल पाना किसी भी ठेकेदार के लिए संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि डीजल की कीमत में हुई करीब 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि ने परिवहन और मशीनों के संचालन की लागत को कई गुना बढ़ा दिया है। अब ठेकेदार सरकार से अपने अनुबंधों में संशोधन की मांग कर रहे हैं ताकि बढ़ी हुई लागत को समायोजित किया जा सके। सरकार वर्तमान में इन मांगों की समीक्षा कर रही है, लेकिन कोई ठोस समाधान अभी तक सामने नहीं आया है।
सरकार का क्या रुख
सड़क विभाग के प्रवक्ता श्याम बहादुर खड्का ने स्थिति की गंभीरता को स्वीकार करते हुए कहा है कि देशभर में सड़क निर्माण की गति धीमी हुई है। विभाग लगातार निर्माण कंपनियों के साथ समन्वय बिठाने की कोशिश कर रहा है ताकि किसी तरह काम को गति दी जा सके। हालांकि, जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति स्थिर नहीं होती और ईंधन की कीमतें नीचे नहीं आतीं, तब तक स्थानीय निर्माण कार्यों में तेजी की उम्मीद करना चुनौतीपूर्ण है।
वैश्विक तनाव का सबक
यह स्थिति इस बात का प्रमाण है कि नेपाल जैसे विकासशील देश, जो पूरी तरह आयात पर निर्भर हैं, वैश्विक स्तर पर होने वाली उथल-पुथल से कितने संवेदनशील हैं। ईरान-अमेरिका संघर्ष महज एक कूटनीतिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह नेपाल की उन सड़कों की खस्ताहाली का कारण बन गया है जो देश की आर्थिक प्रगति की जीवन रेखा मानी जाती हैं। वर्तमान में अधिकारी स्थिति के सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन तब तक जनता को अधूरी सड़कों और अधूरे विकास कार्यों के बीच से गुजरने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है।








