पटना,अंग भारत। जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने अपने पटना स्थित प्रदेश कार्यालय में एक नई और व्यवस्थित ‘जनसुनवाई’ व्यवस्था को लागू कर दिया है। अब इस कार्यालय में हर दिन सरकार के मंत्री मौजूद रहेंगे और सीधे आम जनता की शिकायतों को सुनेंगे। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने मंगलवार को इस कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की। इसका मुख्य मकसद जनता और सत्ता के बीच की दूरी को मिटाना है ताकि सुदूर इलाकों से आए लोग अपनी समस्याओं को बिना किसी दलाल या बिचौलिए के सीधे मंत्रियों तक पहुंचा सकें। यह पहल नीतीश कुमार की पुरानी कार्यशैली का ही एक अधिक आधुनिक और संगठित रूप है, जो आम नागरिक को सीधे न्याय की चौखट तक ले जाने की कोशिश है।
मंत्रियों की तय होगी ड्यूटी
इस नई व्यवस्था के तहत जदयू कार्यालय में मंत्रियों की ड्यूटी चार्ट तैयार की जाएगी। इसका मतलब है कि कोई भी व्यक्ति यदि अपनी समस्या लेकर आता है, तो उसे खाली हाथ नहीं लौटना पड़ेगा। विजय कुमार चौधरी ने साफ कहा है कि इस जनसुनवाई में कोई भी बाधा नहीं होगी। मंत्री शिला कुमारी मंडल ने भी इस कार्यक्रम के दौरान सक्रिय भागीदारी निभाई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पार्टी इसे केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी की तरह देख रही है। अब हर रोज राज्य के अलग-अलग विभागों के मंत्री कार्यालय में बैठेंगे, ताकि शिकायतों का मौके पर ही निपटारा हो सके या संबंधित विभाग को तत्काल निर्देश दिए जा सकें।
प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता
सरकार का कहना है कि जनसुनवाई कार्यक्रम पहले से ही चलता आ रहा था, लेकिन अब इसे एक “स्ट्रक्चर्ड फ्रेमवर्क” दिया गया है। जनता की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर निपटाना ही सरकार का असली एजेंडा है। इसमें ढिलाई किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस पहल से उम्मीद है कि:
- सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने की मजबूरी कम होगी।
- फाइलें फाइलों में नहीं दबेंगी, बल्कि शिकायतों का ट्रैक रखा जाएगा।
- प्रशासनिक अधिकारियों पर त्वरित कार्रवाई का दबाव बढ़ेगा।
- आम जनता का सरकार के प्रति भरोसा और मजबूत होगा।
आर्थिक मुद्दों पर दृष्टिकोण
जनसुनवाई के अलावा, विजय चौधरी ने देश की आर्थिक स्थिति पर भी अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने प्रधानमंत्री की ‘तेल और सोना बचाने’ वाली अपील का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह कोई आदेश नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक सलाह है। जब दुनिया में आर्थिक अनिश्चितता का दौर हो, तब ऐसी सलाह देश की विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने में मदद करती है। उन्होंने माना कि यदि आम नागरिक समझदारी से संसाधनों का उपयोग करें, तो इसका सीधा असर राष्ट्र की अर्थव्यवस्था की स्थिरता पर पड़ता है।
विपक्ष पर कड़ा प्रहार
जब उनसे विपक्ष, खासकर कांग्रेस की ओर से की जा रही आलोचनाओं के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि विपक्ष का काम केवल मीन-मेख निकालना रह गया है। सरकार जमीन पर उतरकर समस्याओं को सुलझा रही है, जबकि विपक्ष केवल कागजी बयानबाजी में लगा है। चौधरी का मानना है कि जो कार्यक्रम सीधे जनता से जुड़ा हो, उस पर राजनीति करना ओछी मानसिकता को दर्शाता है। लोकतंत्र में संवाद ही सबसे बड़ी ताकत है और जनसुनवाई इसी लोकतंत्र को मजबूत करने का माध्यम है।
आगे का रास्ता
पटना से शुरू हुई यह जनसुनवाई की संगठित व्यवस्था आने वाले दिनों में बिहार के अन्य जिलों में भी प्रभाव डाल सकती है। यदि यह मॉडल पटना में सफल रहता है, तो जनता की उम्मीद है कि इसे पूरे राज्य में इसी तरह प्रभावी बनाया जाएगा। अब देखना यह है कि यह व्यवस्था कितनी जल्दी शिकायतों के निस्तारण में बदलती है। जनता के लिए यह एक उम्मीद की किरण है, क्योंकि अपनी समस्या को सीधे सत्ता के गलियारों तक पहुँचाना हर नागरिक का अधिकार है और जदयू का यह कदम उसी अधिकार को और ज्यादा सशक्त बनाता है।








