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6 वर्षों से अधर में लटका पसंटा पुल निर्माण कार्य अब होगा पूरा, विधायक दुलाल चंद्र गोस्वामी ने किया स्थल निरीक्षण

कटिहार,अंग भारत| कटिहार जिले के डंडखोरा प्रखंड अंतर्गत महेशपुर के पास स्थित पसंटा अर्धनिर्मित पुल का निर्माण कार्य अब जल्द ही पूरा होने जा रहा है। पिछले करीब छह वर्षों से जमीन अधिग्रहण के विवाद के कारण अधर में लटका यह छह करोड़ रुपये की लागत का प्रोजेक्ट अब धरातल पर उतरेगा। कदवा विधानसभा क्षेत्र के विधायक दुलाल चंद्र गोस्वामी ने गुरुवार को विभागीय इंजीनियरों के साथ इस स्थल का खुद जाकर बारीकी से जायजा लिया। इस निरीक्षण के बाद अब स्थानीय ग्रामीणों में एक नई उम्मीद जगी है क्योंकि पुल के एप्रोच रोड के लिए जरूरी रैयती जमीन के मुआवजे की राशि आखिरकार जारी हो चुकी है। जमीन से जुड़ी कागजी प्रक्रिया पूरी होते ही ठेकेदार को दोबारा काम शुरू करने का आदेश दे दिया गया है।

क्यों अटका था काम?

यह पुल केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत स्वीकृत हुआ था। लगभग 6 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि से बनने वाले इस पसंटा पुल का मुख्य कंक्रीट ढांचा तो विभाग ने समय पर तैयार करवा लिया था। लेकिन असली पेंच तब फंसा जब पुल को मुख्य सड़क से जोड़ने वाले एप्रोच रोड (पहुंच पथ) का काम शुरू होना था। एप्रोच रोड की जमीन सरकारी नहीं बल्कि निजी रैयती जमीन थी। जमीन के मालिकों को मुआवजा न मिलने के कारण उन्होंने अपनी जमीन पर काम करने से साफ मना कर दिया। इसके बाद संवेदक (ठेकेदार) ने भी अपनी मशीनें और मजदूर वहां से हटा लिए। देखते ही देखते छह साल बीत गए, लेकिन इस कानूनी और प्रशासनिक उलझन का कोई हल नहीं निकल पा रहा था।

योजना से जुड़ी मुख्य बातें

  • कुल बजट: करीब 6 करोड़ रुपये की सरकारी राशि
  • योजना का नाम: प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY)
  • मुख्य प्रभावित क्षेत्र: महेशपुर सहित डंडखोरा प्रखंड के कई पड़ोसी गांव
  • अड़चन का मुख्य कारण: एप्रोच रोड की जमीन का रैयती (निजी) होना और मुआवजा न मिलना

ग्रामीणों को बड़ी राहत

पसंटा पुल का निर्माण अधूरा रहने से महेशपुर और इसके आसपास के दर्जनों गांवों की बड़ी आबादी पिछले छह साल से बेहद कठिन जीवन जीने को मजबूर थी। बरसात के दिनों में जब स्थानीय नदियां उफान पर होती थीं, तब इन गांवों का संपर्क प्रखंड मुख्यालय से पूरी तरह कट जाता था। स्कूल जाने वाले बच्चों, दैनिक मजदूरों और बीमार मरीजों को अस्पताल ले जाने के लिए कई किलोमीटर का लंबा और कच्चा रास्ता तय करना पड़ता था। आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस का गांव तक पहुंचना भी नामुमकिन हो जाता था। इस पुल के बन जाने से न केवल डंडखोरा प्रखंड बल्कि कदवा और कटिहार जिला मुख्यालय तक की दूरी काफी कम हो जाएगी और लोगों को सालों भर सुगम रास्ता मिलेगा।

विधायक ने क्या कहा?

गुरुवार को हुए इस महत्वपूर्ण स्थल निरीक्षण के दौरान कदवा विधायक दुलाल चंद्र गोस्वामी ने मौके पर मौजूद ग्रामीण कार्य विभाग के इंजीनियरों से काम में आ रही हर एक तकनीकी बाधा की जानकारी ली। विधायक ने कहा कि पसंटा पुल इस पूरे ग्रामीण क्षेत्र की लाइफलाइन है। इसे इतने लंबे समय तक अधूरा छोड़ना जनता के साथ सीधे तौर पर अन्याय था। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे को लेकर उन्होंने विधानसभा से लेकर विभाग के आला अधिकारियों के सामने कई बार आवाज उठाई। अब आखिरकार सरकार ने रैयती जमीन के मुआवजे के भुगतान के लिए आवश्यक राशि स्वीकृत कर जिला प्रशासन को उपलब्ध करा दी है। जमीन अधिग्रहण की कागजी औपचारिकताएं अब अंतिम चरण में हैं।

अब आगे क्या होगा?

निरीक्षण के बाद विधायक दुलाल चंद्र गोस्वामी ने मौके पर ही विभागीय अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जैसे ही मुआवजे की राशि का वितरण जमीन मालिकों को कर दिया जाता है, तुरंत ठेकेदार को साइट पर वापस बुलाकर एप्रोच रोड का काम चालू कराया जाए। अधिकारियों ने भी आश्वस्त किया है कि इस बार बिना किसी देरी के काम को युद्ध स्तर पर पूरा किया जाएगा। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि इस साल की बाढ़ आने से पहले पुल पूरी तरह चालू हो जाएगा ताकि उन्हें फिर से पानी के बीच से होकर न गुजरना पड़े। यदि समय रहते सड़क जुड़ जाती है, तो इलाके के किसानों को अपनी फसल बाजार तक पहुंचाने में भी बड़ी मदद मिलेगी।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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