शंभूगंज/बांका/अंगभारत। बांका जिले के शंभूगंज प्रखंड अंतर्गत बड़ी खौजड़ी गांव में सरकारी नल-जल योजना के कार्य में बाधा डालने और विरोध करने वाली महिलाओं के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। इस घटना ने एक तरफ जहां गांव में तनावपूर्ण स्थिति पैदा कर दी है, वहीं सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के क्रियान्वयन पर भी सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। गायत्री देवी और रंजू देवी नामक महिलाओं ने गांव के ही प्रभावशाली लोगों पर घर में घुसकर मारपीट करने और अभद्र व्यवहार करने का गंभीर आरोप लगाया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब गांव में पाइपलाइन बिछाने का काम चल रहा था और कुछ दबंगों ने इसे रुकवा दिया।
विवाद की मुख्य वजह
नल-जल योजना का उद्देश्य हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना है, लेकिन बड़ी खौजड़ी गांव में यह विकास कार्य विवाद की जड़ बन गया। ग्रामीण जब अपने क्षेत्र में पाइप बिछाने का काम करवा रहे थे, तब स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली माने जाने वाले कुछ लोगों ने इसमें बाधा डाल दी। उनका तर्क था कि पाइपलाइन उनके निजी हितों या जमीन के रास्ते से नहीं गुजरनी चाहिए। जब ग्रामीणों ने इस पर आपत्ति जताई, तो स्थिति हिंसक हो गई। सरकारी कार्य को इस तरह रोकना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि सामुदायिक विकास के खिलाफ भी है।
पीड़ित महिलाओं का आरोप
इस पूरे मामले में पीड़ित महिलाओं ने सीधे तौर पर हमलावरों के नाम लिए हैं। गायत्री देवी (पति दिलीप तांती) और रंजू देवी (पति दिनेश तांती) का कहना है कि उन्होंने किसी तरह की गुंडागर्दी नहीं की थी, बल्कि वे सिर्फ अपने हक की सुविधा मांग रही थीं। उनके द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने निम्नलिखित लोगों के साथ मिलकर घटना को अंजाम दिया:
- राजेश मंडल
- किशोर मंडल
- शिव मंडल
- चंदन कुमार
- एक अन्य अज्ञात व्यक्ति
पीड़ितों के अनुसार, हमलावर उनके घरों में घुस आए और न केवल गाली-गलौज की, बल्कि शारीरिक प्रताड़ना भी दी। इस घटना के बाद से पीड़िताएं और उनका परिवार काफी डरा हुआ है।
थाने में दर्ज रिपोर्ट
घटना के तुरंत बाद पीड़ित महिलाएं शंभूगंज थाना पहुंचीं और दोषियों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। शंभूगंज थानाध्यक्ष राज कुमार प्रसाद ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच के आदेश दिए हैं। थानाध्यक्ष राज कुमार प्रसाद के अनुसार, पुलिस वर्तमान में दोनों पक्षों के बयानों को दर्ज कर रही है और घटनास्थल के साक्ष्यों का मिलान किया जा रहा है। पुलिस यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि इस विवाद में कानून का राज कायम रहे और दोषियों को उनके कृत्यों की सजा मिले।
आरोपियों का बचाव
दूसरी ओर, आरोपी पक्ष ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने अपने बचाव में कहा है कि यह मामला केवल पुरानी रंजिश के कारण उन्हें फंसाने के लिए रचा गया है। उनका दावा है कि किसी भी प्रकार की मारपीट या गाली-गलौज की घटना नहीं हुई है। अब पुलिस के सामने चुनौती यह है कि वह बिना किसी पूर्वाग्रह के इस मामले की सच्चाई तक पहुंचे। दोनों पक्षों के बयानों में भारी विरोधाभास होने के कारण मामले की जांच चुनौतीपूर्ण हो गई है।
प्रशासन के लिए चुनौती
इस प्रकार की घटनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी विकास कार्यों को लेकर होने वाली खींचतान का एक सटीक उदाहरण हैं। जब प्रभावशाली लोग निजी हितों को सार्वजनिक हित से ऊपर रखते हैं, तो ऐसी अप्रिय घटनाएं होती हैं।
शंभूगंज थानाध्यक्ष राज कुमार प्रसाद ने कहा है कि, “प्राप्त आवेदन के आधार पर निष्पक्ष जांच जारी है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए अब पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है। स्थानीय प्रशासन की कोशिश है कि किसी भी हाल में सरकारी कार्य में बाधा न आए और ग्रामीणों के बीच का यह तनाव और अधिक न बढ़े। यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि समाज में विकास कार्य के दौरान सामुदायिक सहयोग और कानूनी नियमों का पालन कितना जरूरी है।








