Founder – Mohan Milan

जम्मू से श्रीनगर तक दौड़ी वंदे भारत, यात्रा हुई आसान

जम्मू, अंग भारत। जम्मू-कश्मीर की रेल कनेक्टिविटी में एक नया अध्याय जुड़ गया है। अब जम्मू और श्रीनगर के बीच 20 कोच वाली वंदे भारत एक्सप्रेस का संचालन शुरू हो चुका है, जिससे दोनों राजधानियों के बीच सफर न केवल तेज, बल्कि बेहद आरामदायक हो गया है। यह नई सुविधा यात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के लिए समय की बड़ी बचत साबित हो रही है, क्योंकि अब उन्हें पहाड़ी रास्तों के झमेलों से मुक्ति मिल रही है।

बदलती हुई तस्वीर

रेलवे स्टेशन पर एक भव्य समारोह के दौरान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। इस मौके पर रेल मंत्री ने साफ किया कि यह सिर्फ एक ट्रेन नहीं, बल्कि पूरे घाटी के आर्थिक विकास की धुरी है। इससे साल भर जरूरी सामानों की आपूर्ति निर्बाध बनी रहेगी, जो पहले सर्दियों में बर्फबारी के कारण अक्सर प्रभावित हो जाती थी।

क्षमता में भारी इजाफा

पहले इस रूट पर सिर्फ 8 कोच की वंदे भारत ट्रेनें चल रही थीं, जिनमें सीटों की भारी किल्लत रहती थी। नई व्यवस्था के तहत 20 कोच के रैक लगाने से क्षमता में सीधे ढाई गुना वृद्धि हुई है। इसके प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:

  • पर्यटकों के लिए अधिक उपलब्धता।
  • तीर्थयात्रियों की यात्रा सुगम होना।
  • स्थानीय व्यापार के लिए रसद की आसान आवाजाही।
  • टिकट बुकिंग में कम मारामारी।

समय और यात्रा सारणी

यात्रियों की सुविधा के लिए इस रूट का समय बहुत ही व्यवस्थित रखा गया है। जम्मू तवी से ट्रेन सुबह 6:20 बजे निकलती है और कटरा, रियासी और बनिहाल के खूबसूरत दृश्यों को पार करती हुई 11:10 बजे श्रीनगर पहुँच जाती है। वापसी में, यह ट्रेन दोपहर 2 बजे श्रीनगर से चलकर शाम 6:50 बजे जम्मू लौटती है। यह समय सारणी उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो दिन भर के काम के लिए एक शहर से दूसरे शहर जाना चाहते हैं।

मौसम से निपटने की तकनीक

कश्मीर की हाड़ कंपा देने वाली ठंड को झेलने के लिए इस ट्रेन को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। आम ट्रेनों की तुलना में इसमें तकनीकी बदलाव किए गए हैं, जो इसे बर्फबारी और शून्य से नीचे के तापमान में भी सुरक्षित रखते हैं:

  • हीटिंग सिस्टम: कोच के अंदर का तापमान आरामदायक बनाए रखने के लिए विशेष हीटिंग सुविधा।
  • पाइपलाइन सुरक्षा: अत्यधिक ठंड में भी पाइप को जमने से बचाने के लिए इंसुलेशन।
  • अत्याधुनिक ब्रेकिंग: फिसलन भरे रास्तों पर सुरक्षित स्टॉपेज के लिए एडवांस्ड ब्रेक सिस्टम।
  • गर्म हवा की सुविधा: कोच के हर हिस्से में समान तापमान सुनिश्चित करना।

इंजीनियरिंग का बेमिसाल करिश्मा

इस पूरे सफर का सबसे रोमांचक हिस्सा वो पुल हैं जिनसे होकर यह ट्रेन गुजरती है। चिनाब नदी पर बना पुल दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज है, जिसकी ऊंचाई एफिल टॉवर से भी ज्यादा है। इसके अलावा, अंजी खड्ड पुल, जो भारत का पहला केबल-स्टेड रेल ब्रिज है, भारतीय इंजीनियरिंग की क्षमता को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करता है। इन पुलों पर यात्रा करना किसी रोमांचक अनुभव से कम नहीं है।

सुरक्षा और रणनीतिक लाभ

सुरक्षा के लिहाज से इसमें आरपीएफ और कमांडो की तैनाती की गई है। ट्रेन के भीतर सीसीटीवी कैमरे हर कोने पर नजर रखते हैं। रणनीतिक रूप से, यह लाइन सेना के लिए भी गेम-चेंजर है। खराब मौसम के दौरान जब सड़क मार्ग बंद हो जाते हैं, तब यह रेल लिंक देश के बाकी हिस्सों से घाटी का संपर्क बनाए रखने का एकमात्र और सबसे भरोसेमंद सहारा बन जाता है। अब घाटी का विकास सिर्फ उम्मीद नहीं, बल्कि एक हकीकत बन चुका है, और वंदे भारत इस विकास की रफ्तार को और तेज कर रही है।

Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram
Picture of अंग भारत • रिपोर्टर

अंग भारत • रिपोर्टर

‘अंग भारत’ एक हिंदी दैनिक समाचार पत्र है, जो मिलन ग्रुप द्वारा संचालित एक बहुआयामी मीडिया संगठन का हिस्सा है। हमारा कॉर्पोरेट कार्यालय बिहार के ऐतिहासिक अंग प्रदेश के पवित्र स्थान बांका में स्थित है। हमारा उद्देश्य निष्पक्ष, विश्वसनीय और जनहित से जुड़ी खबरों को पाठकों तक पहुंचाना है।”

Related Posts
Recent Posts
App Icon